मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| संबंधित संस्था | बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) |
| माननीय पीठ | CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी. मोहना |
| मुख्य आदेश | परिणाम घोषित होंगे, लेकिन फैसला इलेक्शन ट्रिब्यूनल के अधीन रहेगा। |
| साक्ष्य सुरक्षा निर्देश | BCD और दिल्ली पुलिस को मूल बैलेट रिकॉर्ड व CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश। |
| निपटारे की समय-सीमा | ट्रिब्यूनल को 3 महीने के भीतर विवादों पर फैसला करने का सुझाव। |
Bar Council Of Delhi: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के चुनाव परिणामों को घोषित करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनाव परिणाम इलेक्शन ट्रिब्यूनल (Election Tribunals) के समक्ष लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन (Subject to outcome) रहेंगे।
मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने BCD चुनाव से जुड़े सभी विवादों को चुनाव न्यायाधिकरण (Election Tribunal) को स्थानांतरित कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
- चुनाव परिणाम घोषित करने की अनुमति
- सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल चुनावों की अनिश्चितता समाप्त करने के लिए परिणाम घोषित करने की अनुमति दी, लेकिन यह परिणाम ट्रिब्यूनल के फैसले के अधीन रहेंगे।
- मामले ट्रिब्यूनल को ट्रांसफर
- पीठ ने कहा कि चूंकि अन्य राज्य बार काउंसिलों के चुनाव विवादों को पहले ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों की अध्यक्षता वाले इलेक्शन ट्रिब्यूनल को भेजा जा चुका है, इसलिए BCD के लिए अलग रुख अपनाने का कोई कारण नहीं है।
- न्यायालय ने ट्रिब्यूनल से अनुरोध किया कि वे 3 महीने के भीतर इन विवादों का शीघ्र निपटारा करें।
- CCTV फुटेज और मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश:
- BCD को चुनाव से जुड़े सभी मूल रिकॉर्ड और बैलेट पेपर सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।
- दिल्ली पुलिस को चुनाव और मतगणना की पूरी मूल CCTV फुटेज सुरक्षित रखने तथा संबंधित पक्षों को इसकी प्रति उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है।
मामले का पृष्ठभूमि और विवाद (Background of the Dispute)
- फरवरी 2026 चुनाव: BCD की 23 निर्वाचित सीटों के लिए 221 उम्मीदवारों के बीच 21, 22 और 23 फरवरी 2026 को मतदान हुआ था।
- बैलेट पेपर से छेड़छाड़ (April 15): 15 अप्रैल को मतगणना के दौरान गिनती स्टाफ के सदस्य (निखिल कुमार) को मतपत्रों पर मतदाताओं की प्राथमिकताओं में हेरफेर करते रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके बाद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई और मतगणना रोक दी गई।
- री-पोल (पुनर्मतदान) की मांग: 116 उम्मीदवारों ने पूरी चुनाव प्रक्रिया के दूषित होने का हवाला देते हुए नए सिरे से मतदान की मांग की, जिसे हाई-पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी ने खारिज कर दिया।
- दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला (June 6): दिल्ली हाई कोर्ट ने पूरे चुनाव को रद्द करने से इनकार कर दिया और माना कि प्रभावित बैलेट पेपर्स की पहचान कर ली गई है, इसलिए एलिमिनेशन राउंड से पुनर्गणना पर्याप्त है।
- सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: हाई कोर्ट के री-पोल न कराने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां कोर्ट ने पहले परिणाम की अधिसूचना पर रोक लगाई थी, जिसे अब ट्रिब्यूनल की शर्त के साथ हटा दिया गया है।

