हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के मुख्य बिंदु
- पोस्ट हटाने की जानकारी:सुधीर चौधरी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से उन सभी पोस्टों को हटा दिया है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी तीसरे पक्षों द्वारा शेयर की गई री-पोस्ट्स हटाने को लिखा है।
- केस जारी रखने पर अड़े शेरावत:बचाव पक्ष का तर्क था कि पोस्ट हटाए जाने के बाद अब केस में कुछ शेष नहीं बचता, लेकिन याचिकाकर्ता विजय शेरावत ने मानहानि का मुकदमा जारी रखने की इच्छा जताई।
- कोर्ट फीस पर खिंचाई:सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लगभग ₹4.90 लाख की अदालती फीस (Court Fee) जमा न करने पर याचिकाकर्ता को टोकते हुए कहा कि उन्होंने केवल ₹100 जमा किए हैं। हालांकि, शेरावत के छात्र होने का हवाला देने पर कोर्ट ने फीस जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दे दिया।
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी और दूरदर्शन (DD News) के खिलाफ दायर ₹5 करोड़ के सिविल मानहानि मुकदमे (Defamation Suit) में मंगलवार (22 सितंबर 2026) को महत्वपूर्ण प्रगति हुई।
न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सुधीर चौधरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने बयान दिया कि उन्होंने खुद संज्ञान लेकर यह पोस्ट्स हटाई हैं और सोशल मीडिया मध्यवर्ती कंपनियों (Intermediaries) को भी पत्र लिखकर तीसरे पक्षों द्वारा साझा किए गए कंटेंट को हटाने का अनुरोध किया है। हालांकि, पोस्ट्स हटने के बावजूद वादी विजय शेरावत ने मानहानि और हर्जाने के मुकदमे को आगे जारी रखने की बात कही, जिसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 तय की। पत्रकार सुधीर चौधरी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी ‘एस्प्रिट प्रोडक्शंस’ (Essprit Productions) ने उच्च न्यायालय को औपचारिक रूप से सूचित किया कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता विजय शेरावत की गलत पहचान करने और उन्हें भड़काऊ नारों से जोड़ने वाली सभी सोशल मीडिया पोस्ट्स को स्वेच्छा से हटा (Take down) दिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में प्रस्तुत विधिक दलीलें
1. ‘हमने स्वेच्छा से पोस्ट्स हटा ली हैं’: वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन
सुधीर चौधरी और प्रोडक्शन कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया: “मैंने इसे अपनी मर्जी से हटा दिया है। हमने इसे हटाने का एक सचेत निर्णय (Conscious Decision) लिया है… हमने सोशल मीडिया मध्यवर्तियों को भी पत्र लिखकर कहा है कि यदि हमारे पोस्ट से संबंधित कोई सामग्री तीसरे पक्षों के पास है, तो वे उसे भी हटा दें।”
- वरिष्ठ वकील ने यह भी कहा कि यदि अदालत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इस सामग्री को ब्लॉक/डिलीट करने के संबंध में कोई औपचारिक निर्देश जारी करती है, तो उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी।
- उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि विवादित पोस्ट्स हटाई जा चुकी हैं, इसलिए अब अंतरिम निषेधाज्ञा (Interim Injunction) के तहत मामले में कुछ शेष नहीं बचता है और इसे बंद किया जा सकता है।
2. वादी का मुकदमा जारी रखने का रुख एवं कोर्ट फीस पर अदालत के सवाल
- वादी विजय शेरावत के वकीलों ने स्पष्ट किया कि पोस्ट हटाना पर्याप्त नहीं है; क्योंकि जो मानहानि और जान का खतरा उत्पन्न हो चुका है, उसके लिए वे ₹5 करोड़ के हर्जाने के मुख्य मुकदमे को आगे चलाना चाहते हैं।
- कोर्ट फीस में चूक: सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला ने ₹5 करोड़ के दावे के अनुपात में कोर्ट फीस जमा न करने पर वादी से सवाल किया। अदालत ने संज्ञान लिया कि लगभग ₹4.90 लाख की कोर्ट फीस जमा की जानी थी, जबकि वादी ने मात्र ₹100 जमा किए थे।
- छात्र होने के नाते समय विस्तार: वादी के वकील ने दलील दी कि विजय शेरावत एक 20 वर्षीय छात्र और यूपीएससी (UPSC) अभ्यर्थी हैं, इसलिए उन्हें फीस जुटाने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। अदालत ने उनकी इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए कोर्ट फीस जमा करने के लिए समय सीमा बढ़ा दी।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं मानहानि का आधार
- ‘डिकोड’ (DECODE) शो का प्रसारण: विजय शेरावत ने सुधीर चौधरी, उनकी प्रोडक्शन कंपनी एस्प्रिट प्रोडक्शंस और प्रसार भारती (DD News) के खिलाफ यह मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि डीडी न्यूज पर 27 अगस्त 2026 को प्रसारित प्राइम-टाइम कार्यक्रम ‘DECODE’ में सुधीर चौधरी ने जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन का विश्लेषण किया था।
- गलत पहचान और भड़काऊ नारे का आरोप:
- शो के दौरान शेरावत की तस्वीर और वीडियो फुटेज दिखाते हुए यह आरोप लगाया गया कि वे देश में “संसद भवन उखाड़ दिया जाएगा… नेपाल बना दिया जाएगा” जैसे देशविरोधी नारे लगा रहे थे।
- वादी का दावा है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान कभी नहीं दिया; यह बयान किसी अन्य कार्यक्रम में किसी अज्ञात और पूरी तरह अलग व्यक्ति द्वारा दिया गया था।
- तथ्यों के सत्यापन का अभाव (Lack of Due Verification):
- वादपत्र में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रीय प्रसारण से पूर्व कोई पत्रकारिता सत्यापन (Fact-checking/Due Diligence) नहीं किया गया और न ही शेरावत को उनका पक्ष रखने का कोई अवसर दिया गया।
- आरोप है कि जानबूझकर निम्न-गुणवत्ता (Low quality) वाले फुटेज का उपयोग किया गया ताकि दोनों चेहरों का अंतर स्पष्ट न हो सके।
- जान से मारने की धमकियां और सोशल मीडिया ट्रोलिंग:
- शो के प्रसारण के कुछ ही घंटों के भीतर यह क्लिप एक्स (X) और इंस्टाग्राम पर वायरल हो गई।
- वादी ने आरोप लगाया कि उन्हें गोली मारने, सिर कलम करने और हाथ-पैर तोड़ने की खुली धमकियां मिलीं, और कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने हमला करने के उद्देश्य से उनके घर का पता तक मांगा।
- शेरावत ने 31 जुलाई को अपने इंस्टाग्राम पर स्पष्टीकरण जारी किया था, लेकिन लगभग 4,224 फॉलोअर्स वाला उनका अकाउंट 1.4 अरब व्यूज का दावा करने वाले राष्ट्रीय प्रसारक के प्रभाव का मुकाबला नहीं कर सका।
उच्च न्यायालय का वर्तमान आदेश
- बयान रिकॉर्ड पर दर्ज: अदालत ने सुधीर चौधरी की ओर से दिए गए इस बयान को रिकॉर्ड पर दर्ज किया कि उनके प्लेटफॉर्म्स से सभी विवादित पोस्ट्स स्वेच्छा से हटा ली गई हैं।
- कोर्ट फीस जमा करने की मोहलत: वादी छात्र को कानून के अनुसार अपेक्षित संपूर्ण कोर्ट फीस जमा करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया गया।
- मुख्य मुकदमे की अगली सुनवाई: मानहानि और हर्जाने के मुख्य मुकदमे में सुनवाई को स्थगित करते हुए अगली तिथि जनवरी 2027 तय की गई।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: विजय शेरावत बनाम सुधीर चौधरी, एस्प्रिट प्रोडक्शंस एवं अन्य [दीवानी वाद (Civil Suit – CS(OS)) – दिल्ली उच्च न्यायालय]
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- वादी (विजय शेरावत) की ओर से: अधिवक्ता पुष्प शर्मा, आदित्य नारायण शुक्ला, जय अल्लाघ एवं प्रसून शेखर
- प्रतिवादी (सुधीर चौधरी व प्रोडक्शन हाउस) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन
- प्रासंगिक कानून: सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) का आदेश 7 नियम 11 (कोर्ट फीस अनिवार्यता) एवं आदेश 39 नियम 1 व 2 (अस्थायी व्यादेश); कोर्ट फीस अधिनियम, 1870; अपकृत्य विधि (Law of Torts – सिविल मानहानि एवं प्रतिष्ठा की क्षति); सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश) नियम, 2021
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (सुप्रीम कोर्ट) — ‘गरिमा और प्रतिष्ठा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का अभिन्न अंग है।’
- राम जेठमलानी बनाम सुब्रमण्यम स्वामी (दिल्ली हाईकोर्ट) — ‘पत्रकारिता की स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं है; बिना उचित सत्यापन के किसी निर्दोष नागरिक की गलत पहचान कर उसे देशविरोधी गतिविधियों से जोड़ना घोर मानहानिकारक है और भारी दंडात्मक हर्जाने का आधार बनता है।’
- पीठ: न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला (दिल्ली उच्च न्यायालय)
- अगली सुनवाई: जनवरी 2027
DECODE Program: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला |
| याचिकाकर्ता (Plaintiff) | विजय शेरावत (CJP कार्यकर्ता व छात्र) |
| प्रतिवादी (Defendants) | सुधीर चौधरी, एस्प्रिट प्रोडक्शंस और दूरदर्शन (DD News) |
| मुकदमे की राशि | ₹5 करोड़ मानहानि का मुआवजा (Defamation Suit) |
| अगली सुनवाई | जनवरी 2027 |

