कोर्ट द्वारा जारी मुख्य निर्देश:
- डेटा प्रस्तुत करने का आदेश: कोर्ट ने NCLT प्रिंसिपल्स बेंच बार एसोसिएशन को निर्देश दिया कि वह देश भर की सभी क्षेत्रीय NCLT पीठों में उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर का डेटा एकत्र कर एक तालिका (Tabulated Form) में अदालत के समक्ष रखे।
- केंद्र सरकार से स्टेटस रिपोर्ट: केंद्र सरकार (Union of India) को निर्देश दिया गया कि वह प्रिंसिपल बेंच और क्षेत्रीय पीठों में उपलब्ध कराई गई बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे।
- ज़रूरतों की पहचान: केंद्र सरकार को NCLT के अध्यक्ष (President) के साथ परामर्श करके उन सुविधाओं की पहचान करने को कहा गया है जिनकी तत्काल (Urgent) आवश्यकता है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी कानून अधिकरण (NCLT) और राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण (NCLAT) में न्यायिक व तकनीकी सदस्यों की भारी कमी, लचर बुनियादी ढांचे, कोर्ट मास्टर्स व जजमेंट राइटर्स के अभाव और देश भर की 18 बेंचों के केवल आधे दिन (Half-Day) बैठने की विवशता पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने NCLT में बुनियादी सुविधाओं और सदस्यों की नियुक्ति को लेकर चल रहे स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले की सुनवाई करते हुए यह सख्त टिप्पणी की। अदालत ने केंद्र सरकार को NCLT अध्यक्ष के साथ तत्काल परामर्श कर आवश्यक सुविधाओं की पहचान करने और विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये अधिकरण देश की आर्थिक व्यवस्था और सरकार के लिए “लाइफलाइन” (Lifeline) हैं, क्योंकि सभी राष्ट्रीयकृत बैंक, पूरा बैंकिंग क्षेत्र और हजारों करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं इन्हीं मंचों पर परखी जाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष एवं तल्ख टिप्पणियां
1. ‘हजारों करोड़ के विवाद सुलझाने वाले मंचों के पास बुनियादी साधन नहीं’: CJI सूर्यकांत
ट्रिब्यूनल की दयनीय स्थिति पर कड़ा रोष जताते हुए तीन न्यायाधीशों की पीठ ने टिप्पणी की: “ये अधिकरण अब सरकार की ‘लाइफलाइन’ हैं। सभी राष्ट्रीयकृत बैंक, संपूर्ण बैंकिंग क्षेत्र और सभी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा व जांच इन्हीं ट्रिब्यूनलों के समक्ष होती है। जब तक आप बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराएंगे, कोई संस्था कैसे काम करेगी? आपके पास इमारत नहीं है, पर्याप्त स्टाफ नहीं है, जजमेंट राइटर नहीं हैं और न ही उचित व पर्याप्त तकनीकी समावेशन (Technological Inclusion) है। जो संस्थाएं प्रतिदिन हजारों करोड़ रुपये के विवादों का निपटारा करती हैं, उनसे बिना बुनियादी ढांचे के प्रभावी कामकाज की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”
2. स्थायी कर्मचारियों का अभाव और संविदा व्यवस्था पर प्रहार
- पीठ के संज्ञान में जब यह लाया गया कि ट्रिब्यूनल के 246 कर्मचारी—जिनमें कोर्ट मास्टर जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं—अस्थायी (Temporary/Contractual) हैं, तो अदालत ने इस पर असंतोष व्यक्त किया।
- अदालत ने रेखांकित किया कि इतने संवेदनशील कॉर्पोरेट और दिवाला मामलों का संचालन करने वाले ट्रिब्यूनलों में स्थायी व प्रशिक्षित सहायक कर्मचारियों का न होना न्याय वितरण को सीधे तौर पर पंगु बना रहा है।
बार एसोसिएशन द्वारा कोर्ट के समक्ष उठाए गए चार प्रमुख संकट
NCLT प्रिंसिपल बेंच बार एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव सेन ने अधिकरणों की जमीनी हकीकत बयां करते हुए अदालत को बताया:
- आधे दिन की सिटिंग (Half-Day Sittings): 24 अगस्त के रोस्टर के अनुसार, सदस्यों की सेवानिवृत्ति और भारी रिक्तियों के कारण देश भर में कम से कम 18 NCLT बेंच केवल आधे दिन बैठने को विवश हैं। प्रिंसिपल बेंच (नई दिल्ली) की सभी बेंचों में यही स्थिति बनी हुई है।
- IBC के बाद बढ़े दायरे के बावजूद वही पुरानी स्वीकृत संख्या: जब से दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (IBC) लागू हुई है, मुकदमों की संख्या में भारी उछाल आया है। इसके बावजूद NCLT की कुल स्वीकृत सदस्य संख्या केवल 63 पर ही अटकी हुई है।
- आगामी 1 वर्ष में 18 और रिक्तियां: वरिष्ठ वकील ने चेतावनी दी कि यदि तुरंत नियुक्तियां नहीं की गईं, तो अगले एक वर्ष के भीतर सदस्यों के सेवानिवृत्त होने से 18 अतिरिक्त पद खाली हो जाएंगे।
- बदहाल भौतिक व तकनीकी ढांचा: प्रिंसिपल बेंच सहित कई क्षेत्रीय पीठों में एयर कंडीशनिंग, सर्वर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल कोर्ट रूम की सुविधाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश एवं समयबद्ध आदेश
- क्षेत्रीय बेंचों का डेटा संकलन: सुप्रीम कोर्ट ने NCLT प्रिंसिपल बेंच बार एसोसिएशन को निर्देश दिया कि वह देश भर की सभी क्षेत्रीय NCLT बेंचों में उपलब्ध भौतिक व तकनीकी बुनियादी ढांचे का व्यापक डेटा एकत्र करे और उसे अदालत के समक्ष सारणीबद्ध प्रारूप (Tabulated Form) में प्रस्तुत करे।
- केंद्र सरकार की स्टेटस रिपोर्ट: भारत संघ (Union of India) को निर्देश दिया गया कि वह प्रिंसिपल बेंच और सभी क्षेत्रीय बेंचों को प्रदान की गई बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत ब्यौरा देते हुए औपचारिक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे।
- NCLT अध्यक्ष से परामर्श: केंद्र सरकार को NCLT के अध्यक्ष (President) के साथ समन्वय स्थापित कर उन अत्यंत आवश्यक सुविधाओं (Urgent Amenities) को तत्काल चिन्हित करने का आदेश दिया गया जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाना है।
- सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों के सेवा विस्तार का सुझाव: बार एसोसिएशन के इस अनुरोध पर कि जब तक नई नियुक्तियां न हों, सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे सदस्यों को कुछ और समय कार्य करने की अनुमति दी जाए, अदालत ने आगामी तारीख पर विचार करने का संकेत दिया।
- अगली सुनवाई: इस मामले को विस्तृत समीक्षा के लिए दो सप्ताह बाद पुनः सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: स्वतः संज्ञान (Suo Motu) याचिका (सिविल) – NCLT और NCLAT में नियुक्तियां एवं बुनियादी ढांचा [सर्वोच्च न्यायालय]
- मध्यस्थ/हस्तक्षेपकर्ता: NCLT प्रिंसिपल बेंच बार एसोसिएशन (प्रतिनिधित्व: वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव सेन)
- प्रासंगिक कानून: कंपनी अधिनियम, 2013 (धारा 408 से 434 – NCLT/NCLAT का गठन एवं सेवा शर्तें); दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (IBC, 2016) की धारा 5(1) एवं धारा 60 (न्यायनिर्णयन प्राधिकारी); ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम, 2021; भारत का संविधान – अनुच्छेद 32 एवं अनुच्छेद 142
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2021, सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ) — ‘ट्रिब्यूनलों को कार्यपालिका के नियंत्रण से मुक्त और वित्तीय व प्रशासनिक रूप से स्वायत्त होना चाहिए; जब तक उन्हें बुनियादी ढांचा, उचित कोर्ट रूम और पर्याप्त स्टाफ नहीं मिलता, तब तक त्वरित न्याय की अवधारणा कागजी बनकर रह जाएगी।’
- स्विस रिबन प्रा. लि. बनाम भारत संघ (2019, सुप्रीम कोर्ट) — ‘IBC की सफलता NCLT और NCLAT द्वारा तय समय-सीमा (Time-bound Resolution) में मामलों के निपटारे पर टिकी है; अधिकरणों में देरी से परिसंपत्तियों के मूल्य में क्षरण होता है।’
- पीठ: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना (सर्वोच्च न्यायालय)
Demand Of Staff:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ (Judges) | सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना |
| याचिकाकर्ता / मध्यस्थ | NCLT प्रिंसिपल्स बेंच बार एसोसिएशन (NCLT Bar Association) |
| मुख्य मुद्दा | ट्रिब्यूनल में सदस्यों की कमी, हाफ-डे सिटिंग्स और जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर |
| अदालत की टिप्पणी | “बिना बुनियादी सुविधाओं के ये ट्रिब्यूनल कैसे काम करेंगे? ये सरकार की लाइफलाइन हैं।” |
| अगली सुनवाई | 2 सप्ताह बाद |

