केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)
| पहलू | विधिक विवरण |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) |
| माननीय पीठ | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे एवं जस्टिस गौतम अनखड़े |
| संबंधित प्राधिकरण | महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) |
| मुख्य विवाद | निजी होटलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई (लाइसेंस निलंबन) जबकि मंत्रालय कैंटीन को 98% फर्जी स्वच्छता रेटिंग |
| अदालत का आदेश | पक्षपात खत्म करने का निर्देश; मंत्रालय कैंटीन को सुधार नोटिस जारी और दोबारा जांच के आदेश। |
| अगली सुनवाई की तारीख | 6 अगस्त 2026 |
FDA Laughable Rating: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की दोहरी कार्यशैली और पक्षपातपूर्ण रवैये पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting CJ) रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अनखड़े की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून की नजर में राज्य का हर नागरिक और प्रतिष्ठान समान है—चाहे वह प्राइवेट रेस्टोरेंट हो या सरकारी मंत्रालय की कैंटीन। राज्य सचिवालय (मंत्रालय) की कैंटीनों में मक्खियों, कॉकरोच, टूटी सीवर पाइपलाइन और गंदगी की तस्वीरों को देखकर कोर्ट ने FDA द्वारा उन्हें दी गई 98% स्वच्छता रेटिंग को “हास्यास्पद” (Laughable) और झूठा करार दिया।
हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणियां और कानूनी बिंदु
FDA की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई पर हाई कोर्ट की फटकार
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समानता और निष्पक्षता का नियम
• प्राइवेट हो या सरकारी, कानून सबके लिए बराबर है।
• केवल प्राइवेट होटल-रेस्तरां को निशाना नहीं बना सकते।
सफाई की बदहाल स्थिति पर तंज
• "तस्वीरें देखकर लगता है कि जूतों का रैक भी
इन कैंटीनों की तुलना में अधिक साफ होता है।"
दवा बीमारी से भी बदतर नहीं होनी चाहिए
कोर्ट ने FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे और विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए चेतावनी दी।
“हम विभाग के काम की सराहना करते हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि वे सभी के प्रति समान रहें। उनका रुख पक्षपातपूर्ण नहीं होना चाहिए। कार्रवाई निष्पक्ष और समान होनी चाहिए, लेकिन दवा (दंडात्मक कार्रवाई) बीमारी से ज्यादा बदतर नहीं होनी चाहिए। यदि भेदभाव या पूर्वाग्रह होगा, तो एक सराहनीय काम भी गलत मोड़ ले लेगा।”
प्राइवेट होटल और मंत्रालय कैंटीन में समानता (Parity)
दक्षिण मुंबई के प्रसिद्ध ‘पूर्णिमा रेस्टोरेंट’ का लाइसेंस सीधे सस्पेंड करने और दूसरी तरफ मंत्रालय की कैंटीन को 98% रेटिंग देकर क्लीन चिट देने पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा,
“अगर किसी एक रेस्तरां का लाइसेंस सस्पेंड होना है, तो फिर मंत्रालय की कैंटीन का लाइसेंस भी सस्पेंड होना चाहिए। या तो इसे सस्पेंड करें या फिर पूर्णिमा का लाइसेंस बहाल करें। हमें समानता (Parity) चाहिए, कानून से ऊपर कोई नहीं है।”
वकीलों की समिति की जांच में खुली पोल
FDA का दावा (98% क्लीन चिट) ──► HC द्वारा 4 वकीलों की कमेटी का गठन ──► सरप्राइज इंस्पेक्शन ──► गंदगी, मक्खियां, कॉकरोच उजागर ──► FDA को नोटिस जारी
- अदालत द्वारा वकीलों की कमेटी का गठन: जब FDA ने दावा किया कि मंत्रालय की कैंटीन बिल्कुल साफ-सुथरी हैं, तो हाई कोर्ट ने 4 अधिवक्ताओं (Lawyers’ Panel) की एक स्वतंत्र समिति बनाकर तुरंत कैंटीन का निरीक्षण करने भेजा।
- कैंटीन की भयावह तस्वीरें सामने आईं: दोपहर में वकीलों ने कोर्ट में रिपोर्ट और तस्वीरें सौंपीं, जिसमें टूटी हुई सीवर लाइन, जमा हुआ गंदा पानी, रसोइयों की फर्श और दीवारों पर कॉकरोच व मक्खियां, और फ्रिज के बेहद गंदे डिफ्रॉस्ट डिब्बे दिखाए गए। तस्वीरें देखकर कोर्ट ने तंज कसा: “जूतों का रैक भी इससे ज्यादा साफ होता है।”
- झूठी रिपोर्ट पर एक्शन के निर्देश: पीठ ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को निर्देश दिया कि वे उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें जिन्होंने मंत्रालय की कैंटीन को 98% की फर्जी रेटिंग देकर “झूठ” बोला था।
उच्च न्यायालय के कड़े निर्देश और अगले कदम
- सस्पेंशन नोटिस सुधार नोटिस (Improvement Notice) में बदला: FDA की सहमति के बाद, पूर्णिमा रेस्टोरेंट को जारी निलंबन (Suspension) आदेश को सुधार नोटिस (Show Cause Improvement Notice) में बदलने का आदेश दिया गया।
- मंत्रालय और विधान भवन की कैंटीनों को नोटिस: मंत्रालय की तीन कैंटीनों और विधान भवन की कैंटीन को भी खामियों को ठीक करने के लिए तत्काल ‘सुधार नोटिस’ जारी करने का निर्देश दिया गया।
- दोबारा निरीक्षण (Re-inspection): सभी प्रतिष्ठानों को मंगलवार तक सुधार का समय दिया गया है। बुधवार को FDA और वकीलों की समिति दोबारा इन कैंटीनों का निरीक्षण करेगी।
- अगली सुनवाई: इस मामले में आगे की समीक्षा 6 अगस्त [2026] को की जाएगी।
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक एजेंसियों द्वारा किए जाने वाले ‘दोहरे मापदंड’ और ‘पक्षपात’ पर सीधा प्रहार है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा खाद्य सुरक्षा का नियम किसी निजी भोजनालय के लिए जितना सख्त है, उतना ही सख्त सत्ता के गलियारों में चलने वाली कैंटीनों के लिए भी रहेगा।

