Monday, August 17, 2026
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ITBP PUNISHMENT: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जो रक्षक था, वही लुटेरा बन गया..ITBP जवान की बर्खास्तगी बरकरार

ITBP PUNISHMENT: सुप्रीम कोर्ट ने इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) के उस सिपाही की बर्खास्तगी को सही ठहराया है, जिसने जवानों की तनख्वाह के लिए रखे गए कैश बॉक्स से पैसे चुरा लिए थे।

उपयुक्त सजा देने का निर्देश

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें ITBP को सिपाही की बर्खास्तगी पर पुनर्विचार करने को कहा गया था। कोर्ट ने कहा कि जब किसी जवान को नैतिक पतन वाले गंभीर अपराध का दोषी पाया जाता है, तो अनुशासनात्मक अधिकारी का कर्तव्य बनता है कि वह उपयुक्त सजा दे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस होना चाहिए, क्योंकि जिस पर भरोसा किया गया था, वही लुटेरा बन गया।

कोई जवान खुद ही कैश बॉक्स तोड़कर पैसे चुरा ले

कोर्ट ने कहा कि अर्धसैनिक बलों में अनुशासन, ईमानदारी, सेवा के प्रति समर्पण और भरोसेमंद होना बेहद जरूरी है। ऐसे में जब कोई जवान खुद ही कैश बॉक्स तोड़कर पैसे चुरा ले, तो यह गंभीर अपराध है और उस पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।

हाईकोर्ट की दलील को गलत बताया

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि किसी की आजीविका को देखते हुए उसकी पूरी सेवा अवधि के आचरण को ध्यान में रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आरोपी सिपाही के खिलाफ पहले भी आठ बार अनुशासनहीनता के मामले दर्ज हो चुके हैं, इसलिए उस पर कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।

क्या था मामला

सिपाही जगेश्वर सिंह 30 नवंबर 1990 को ITBP में भर्ती हुआ था। 4 और 5 जुलाई 2005 की रात को वह कोटे में संतरी ड्यूटी पर था, जहां जवानों की तनख्वाह के लिए लाखों रुपए कैश बॉक्स में रखे गए थे। उसी रात उसने बॉक्स का ताला तोड़कर पैसे चुरा लिए और बॉक्स को कोटे से करीब 200 गज दूर छिपा दिया। फिर वह पोस्ट से फरार हो गया।

6 जुलाई 2005 को FIR दर्ज की गई

घटना की जानकारी मिलते ही कंपनी कमांडर ने आसपास के इलाके और उत्तरकाशी की ओर जा रहे वाहनों की तलाशी ली, लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद कमांडिंग ऑफिसर को सूचना दी गई और 6 जुलाई 2005 को FIR दर्ज की गई।

पूछताछ में सिपाही ने जुर्म कबूला

कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में जगेश्वर सिंह को दोषी पाया गया। गिरफ्तारी के बाद उसने जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद 14 नवंबर 2005 को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

हाईकोर्ट में दी चुनौती

बर्खास्तगी के खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और दावा किया कि उसका कबूलनामा दबाव में लिया गया था। हालांकि हाईकोर्ट ने यह दलील नहीं मानी, लेकिन ITBP को सजा पर पुनर्विचार करने को कहा। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का यह आदेश भी रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह अपराध इतना गंभीर और चौंकाने वाला है कि बर्खास्तगी से कम कोई सजा पर्याप्त नहीं होगी।

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