Thursday, October 1, 2026
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Land Case: किसान ध्यान दें…सुप्रीम कोर्ट खुले अदालत में सुनेगा मुआवजे का मामला

Land Case: एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की समीक्षा याचिका को सुनेगा।

पिछले फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई

सुप्रीम अदालत ने मामले को खुले अदालत में सुनने पर सहमति जताई है, इसमें किसानों को ब्याज सहित मुआवजा देने के अपने पिछले फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई।यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 2019 के “तरसेम सिंह बनाम NHAI” वाले ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने कहा था कि जिन किसानों की जमीनें NHAI अधिनियम के तहत अधिग्रहित की गई थीं, उन्हें भी सोलाटियम (अतिरिक्त मुआवजा) और ब्याज का लाभ मिलेगा — और यह आदेश पिछली तिथि (retrospective effect) से लागू होगा।

अब क्या हुआ है

न्यायमूर्ति सूर्या कांत और उज्जल भूयान की पीठ ने मंगलवार को NHAI की समीक्षा याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि यह मामला 11 नवंबर 2025 को दोपहर 3 बजे खुले अदालत (open court) में सुना जाएगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, NHAI की ओर से पेश होकर, अदालत को बताया कि इस फैसले के वित्तीय प्रभाव करीब ₹32,000 करोड़ तक के हो सकते हैं — जो कि पहले बताए गए ₹100 करोड़ से कहीं अधिक हैं।

पृष्ठभूमि: फरवरी 2025 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला

इस साल 4 फरवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने NHAI की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि 2019 का निर्णय पूर्व प्रभाव से (retrospectively) लागू होगा। तब अदालत ने कहा था, “हम NHAI की दलीलों में कोई मेरिट नहीं देखते। हम तरसेम सिंह (2019) में स्थापित सिद्धांतों को दोहराते हैं कि सोलाटियम और ब्याज देना एक न्यायसंगत और लाभकारी प्रावधान है, और इससे अलग वर्ग बनाना अनुचित होगा।”

यह है विवाद का कानूनी आधार

2019 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि NHAI अधिनियम की धारा 3J — जो 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून को लागू होने से बाहर रखती थी — संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करती है। इसलिए, जिन किसानों की जमीनें 1997 से 2015 के बीच अधिग्रहित की गई थीं, उन्हें भी सोलाटियम और ब्याज मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि अगर फैसला सिर्फ भविष्य में लागू होता, तो 31 दिसंबर 2014 को अधिग्रहित जमीन के मालिक को मुआवजा नहीं मिलता, जबकि 1 जनवरी 2015 (जिस दिन नया कानून लागू हुआ) को अधिग्रहित जमीन के मालिक को पूरा लाभ मिल जाता — जो अनुच्छेद 14 के खिलाफ असमानता होती।

अदालत की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि “तरसेम सिंह का फैसला किसी ‘पांडोरा बॉक्स’ को नहीं खोलता, बल्कि सिर्फ उन किसानों को वैधानिक लाभ देता है जिन्हें पहले वंचित रखा गया था। यह पहले से तय मामलों को दोबारा खोलने जैसा नहीं है।”

अब आगे क्या होगा

अब NHAI की समीक्षा याचिका पर खुले अदालत में सुनवाई होगी, जिसका मतलब है कि यह मामला फिर से विस्तार से सुना जाएगा और दोनों पक्षों की दलीलें सार्वजनिक रूप से रखी जाएंगी। यह सुनवाई भूमि अधिग्रहण मुआवजे से जुड़े हजारों मामलों और किसानों के अधिकारों पर बड़ा असर डाल सकती है।

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