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मामले की पृष्ठभूमि: कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार से लेकर विवाद तक
- सीईओ का आक्रामक व अनुचित आचरण:जूली मेयेस ने 4 जनवरी 2022 को चैरिटी में जॉइन किया था, जो कमजोर परिवारों और बुजुर्गों को खाद्य सहायता व आपातकालीन सहायता प्रदान करती थी। ट्रिब्यूनल के समक्ष साक्ष्यों के अनुसार, 6 से 8 महीनों के दौरान सीईओ मैथ्यू गिब्स का व्यवहार आक्रामक होता गया। वह कर्मचारियों पर चिल्लाते, गाली-गलौज करते, बक्से फेंकते और अनुचित यौन व्यवहार (जैसे टेबल पर चढ़कर अनुचित शारीरिक हरकतें करना) करते थे।
- 18 जुलाई व 21 अगस्त 2024 की घटनाएं:18 जुलाई 2024 को जूली ने ट्रस्टियों से सीईओ के आचरण की शिकायत की कि इससे पूर्व में उत्पीड़न झेल चुके लोगों की पुरानी दर्दनाक यादें ताजा हो सकती हैं। 21 अगस्त को जब सामान के क्रेट्स द्वारा रास्ता रोके जाने पर बहस हुई, तो गिब्स ने जूली के चेहरे के बिल्कुल करीब आकर चिल्लाना शुरू कर दिया— “आई एम द सीईओ!” इस घटना के बाद जूली को ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने का निर्देश दिया गया।
- अनाम शिकायत और बर्खास्ती (30 सितंबर 2024):4 सितंबर 2024 को ट्रस्टियों को एक गुमनाम संदेश मिला, जिसमें आरोप लगाया गया कि जूली सीईओ को हटाने के लिए एक समूह का हिस्सा बन रही हैं। 12 सितंबर की जांच बैठक में जूली द्वारा तथ्य रखने के बावजूद, 30 सितंबर 2024 को उन्हें ‘घोर दुराचार’ (Gross Misconduct) के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया।
ट्रिब्यूनल के मुख्य निष्कर्ष और सिद्धांत
1. निष्पक्ष जांच का अभाव:
एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल ने माना कि चैरिटी के ट्रस्टियों ने अनुशासनात्मक कार्यवाही के दौरान निष्पक्ष जांच करने के बजाय पूरी तरह से एक अनाम गवाह के बयानों पर भरोसा किया, जो कानून की नज़र में पूरी तरह गलत था।
2. अनुचित बर्खास्तगी (Unfair Dismissal):
अदालत ने फैसला सुनाया कि जूली मेयेस को नौकरी से निकाला जाना पूरी तरह अनुचित (Unfair) था और चैरिटी प्रबंधन अपने अधिकारियों के आक्रामक आचरण को दबाने व जांच में विफलता का दोषी है।
लिवरपूल (यूके): यूनाइटेड किंगडम के रोजगार अधिकार अधिनियम, 1996 (Employment Rights Act, 1996) की धारा 98 (अनुचित बर्खास्तगी / Unfair Dismissal), कार्यस्थल पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice in Workplace Disciplinary Inquiries), अनाम शिकायतों (Anonymous Allegations) पर बिना निष्पक्ष जांच के की गई दंडात्मक कार्रवाई की विधिक अवैधता, तथा कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले आक्रामक व अमर्यादित व्यवहार के कानूनी परिणामों पर ब्रिटेन के लिवरपूल रोजगार अधिकरण (Liverpool Employment Tribunal) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
लिवरपूल एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल के रोजगार न्यायाधीश एलन जॉनसन (Employment Judge Alan Johnson) ने विर्रल (मर्सीसाइड) स्थित चैरिटी संस्था ‘द कारब्रिज सेंटर’ (The Carrbridge Centre) में कम्युनिटी सपोर्ट वर्कर के पद पर कार्यरत रहीं जूली मेयस (Julie Mayes) को घोर कदाचार (Gross Misconduct) के आरोप में गलत तरीके से बर्खास्त किए जाने के मामले में चैरिटी को दोषी ठहराया है।
अधिकरण ने चैरिटी प्रबंधन को आदेश दिया कि वह अपनी पूर्व कर्मचारी को अनुचित बर्खास्तगी के हर्जाने के रूप में £2,160.81 (लगभग ₹2.7 लाख) का भुगतान करे। ट्रिब्यूनल ने पाया कि जब कर्मचारी ने चैरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मैथ्यू गिब्स (Matthew Gibbs) के चिल्लाने, गाली-गलौज करने, चेहरे पर चीखकर “मैं सीईओ हूँ” कहने और अनुचित यौन व्यवहार की शिकायत ट्रस्टियों से की, तो निष्पक्ष जांच करने के बजाय चैरिटी ने एक अज्ञात/अनाम शिकायत के आधार पर पीड़िता को ही बलि का बकरा बना दिया और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना बर्खास्त कर दिया।
रोजगार अधिकरण (Employment Tribunal) के मुख्य विधिक निष्कर्ष
1. ‘अनाम आरोपों पर निर्भरता और जांच की विफलता अनुचित बर्खास्तगी का आधार’
रोजगार न्यायाधीश एलन जॉनसन ने चैरिटी ट्रस्टियों की अनुशासनात्मक प्रक्रिया में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पाते हुए दर्ज किया:
- साक्ष्यों की अनदेखी: चैरिटी प्रबंधन अपनी जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों और वास्तविक साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन करने में पूरी तरह विफल रहा।
- अनाम गवाह पर आंख मूंदकर भरोसा: ट्रस्टियों ने एक अज्ञात पत्र/संदेश के आधार पर यह मान लिया कि जूली मेयस सीईओ को पद से हटाने के लिए किसी गुप्त अभियान में शामिल थीं, जबकि ट्रस्टियों ने यह सत्यापित करने का कोई प्रयास नहीं किया कि मेयस ने वास्तव में उस सामुदायिक बैठक में क्या कहा था।
- पूर्व सूचना के बिना जिरह: 12 सितंबर 2024 की ‘फैक्ट-फाइंडिंग’ बैठक में मेयस को पहले से बताए बिना अचानक सामुदायिक बैठक को लेकर सवाल पूछे गए, जो प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन था।
2. संरक्षित प्रकटीकरण (Protected Disclosure / Whistleblowing) का दावा खारिज:
- याचिकाकर्ता जूली मेयस ने यह भी दावा किया था कि उनकी बर्खास्तगी ‘व्हिसलब्लोइंग’ (Protected Disclosure) के कारण हुई थी।
- तथापि, अधिकरण ने तकनीकी आधारों पर संरक्षित प्रकटीकरण से जुड़ी इस विशिष्ट शिकायत को खारिज कर दिया, किंतु सामान्य कानूनी सिद्धांतों के तहत बर्खास्तगी को प्रक्रियात्मक रूप से घोर अनुचित (Unfair Dismissal) माना।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं विधिक कालक्रम (2022–2024)
| संदर्भ / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
| फोरम / अधिकरण | लिवरपूल रोजगार अधिकरण (Liverpool Employment Tribunal), यूके |
| पीठासीन न्यायाधीश | रोजगार न्यायाधीश एलन जॉनसन (Employment Judge Alan Johnson) |
| दावाकर्ता कर्मचारी | जूली मेयस (Julie Mayes) — पूर्व कम्युनिटी सपोर्ट वर्कर (नियुक्ति: 4 जनवरी 2022)। |
| प्रतिवादी नियोक्ता | द कारब्रिज सेंटर (The Carrbridge Centre) — विर्रल, मर्सीसाइड स्थित पंजीकृत चैरिटी ट्रस्ट। |
| संबंधित अधिकारी | मैथ्यू गिब्स (Matthew Gibbs) — मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), द कारब्रिज सेंटर। |
| सीईओ के खिलाफ आरोप | 1. कर्मचारियों पर बार-बार चिल्लाना, अपशब्दों का प्रयोग और बॉक्स फेंकना। 2. अनुचित व यौन संकेत वाली भाषा का प्रयोग; एक बार सार्वजनिक स्थल (हब) में टेबल पर चढ़कर अनुचित शारीरिक हरकतें (कूल्हे मटकाना) करना। 3. स्वयंसेवकों और कमजोर तबके के लोगों के साथ हिंसक व आक्रामक तेवर दिखाना। |
| विवाद की मुख्य घटना (21 अगस्त 2024) | केंद्र के प्रवेश द्वार पर क्रेट्स (टोकरे) रखे होने की शिकायत पर सीईओ भड़क गए और स्वयंसेवकों पर चिल्लाने लगे। जब मेयस ने बीच-बचाव किया, तो सीईओ ने उनके चेहरे के ठीक सामने आकर जोर-जोर से चीखते हुए कहा: “मैं सीईओ हूँ” (“I am the CEO”)। घटना से आहत होकर मेयस कार में जाकर रोने लगीं और उन्हें ‘वर्क फ्रॉम होम’ पर भेज दिया गया। |
| बर्खास्तगी का आधार (30 सितंबर 2024) | 4 सितंबर को ट्रस्टियों को मिले एक अज्ञात पत्र के आधार पर मेयस पर आरोप लगाया गया कि वे प्रबंधन व सीईओ को हटाने की साजिश का हिस्सा थीं। उन्हें ‘ग्रॉस मिसकंडक्ट’ के तहत निकाल दिया गया। |
| ट्रिब्यूनल का निर्णय | बर्खास्तगी को अनुचित (Unfair Dismissal) घोषित किया गया; £2,160.81 (लगभग ₹2.7 लाख) का मुआवजा स्वीकृत। |
विधिक विश्लेषण: ‘कार्यस्थल उत्पीड़न और निष्पक्ष अनुशासनात्मक प्रक्रिया’
- रोजगार अधिकार अधिनियम, 1996 (धारा 98) की कसौटियां:
- किसी कर्मचारी को कदाचार (Misconduct) के आधार पर तभी निकाला जा सकता है जब नियोक्ता ने:
- वास्तविक और निष्पक्ष जांच (Burchell Test – Reasonable Investigation) की हो,
- आरोपों के समर्थन में उचित व ठोस साक्ष्य एकत्र किए हों, और
- कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पूरा और निष्पक्ष अवसर दिया हो।
- किसी कर्मचारी को कदाचार (Misconduct) के आधार पर तभी निकाला जा सकता है जब नियोक्ता ने:
- अनाम साक्ष्यों की विधिक सीमा:
- रोजगार न्यायशास्त्र में केवल किसी अज्ञात पत्र या बेनामी शिकायत को सच मानकर किसी कर्मचारी की वर्षों की निष्कलंक सेवा समाप्त नहीं की जा सकती। जब तक शिकायतकर्ता सामने न आए या उसके आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि न हो, तब तक अनुशासनात्मक बर्खास्तगी कानूनन टिक नहीं सकती।
- कार्यस्थल पर सत्ता का असंतुलन और गरिमा:
- चैरिटी जैसी संस्थाओं में, जो कमजोर और शोषित वर्गों की सेवा के लिए बनी हैं, शीर्ष अधिकारियों द्वारा अपने मातहतों पर सत्ता का रौब दिखाना (“I am the CEO”) और आक्रामक शारीरिक भाषा का प्रयोग करना कार्यस्थल की बुनियादी सुरक्षा और गरिमा को नष्ट करता है। ट्रिब्यूनल का यह आदेश रेखांकित करता है कि पद कितना भी ऊंचा हो, वह कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार का लाइसेंस नहीं देता।
विधिक विवरण एवं संदर्भ
- अधिकरण: लिवरपूल एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल (यूनाइटेड किंगडम)
- मामला: जूली मेयस बनाम द कारब्रिज सेंटर (Julie Mayes v. The Carrbridge Centre)
- पीठासीन न्यायाधीश: एम्प्लॉयमेंट जज एलन जॉनसन
- मुआवजा राशि: £2,160.81 (लगभग ₹2,70,000 / ₹2.7 लाख)
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- रोजगार अधिकार अधिनियम, 1996 (Employment Rights Act, 1996 – UK) — धारा 98 (अनुचित बर्खास्तगी के मानदंड) एवं धारा 43B/103A (संरक्षित प्रकटीकरण)
- एकास (ACAS) आचार संहिता — कार्यस्थल पर अनुशासनात्मक और शिकायत निवारण प्रक्रियाएं (Code of Practice on Disciplinary and Grievance Procedures)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- कार्यस्थल बर्खास्तगी और अनाम शिकायतों का विधिक मानक: ‘किसी कर्मचारी को घोर कदाचार के आधार पर सेवामुक्त करने से पूर्व नियोक्ता का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह निष्पक्ष व निष्पक्षतापूर्ण जांच करे; वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अपने पद का अनुचित रौब दिखाना (“I am the CEO”) और आक्रामक आचरण करना स्वीकार्य नहीं है; बिना पुष्टि वाली अनाम शिकायतों के आधार पर तथा कर्मचारी को पूर्व सूचना दिए बिना की गई विभागीय पूछताछ प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है और ऐसी बर्खास्तगी को कानूनन अनुचित (Unfair Dismissal) माना जाएगा।’
Liverpool Employment Tribunal: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित ट्रिब्यूनल | लीवरपूल एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल (Liverpool Employment Tribunal), यूके |
| न्यायाधीश | एम्प्लॉयमेंट जज एलन जॉनसन (Employment Judge Alan Johnson) |
| पीड़ित कर्मचारी | जूली मेयेस (Julie Mayes) — कम्युनिटी सपोर्ट वर्कर |
| आरोपी/सीईओ | मैथ्यू गिब्स (Matthew Gibbs) — मुख्य कार्यकारी अधिकारी, द कारब्रिज सेंटर |
| मुख्य घटना | सीईओ के आक्रामक, गाली-गलौज और यौन व्यवहार का विरोध करने पर 30 सितंबर 2024 को घोर दुराचार (Gross Misconduct) के आरोप में बर्खास्तगी। |
| ट्रिब्यूनल का अंतिम निर्णय | कर्मचारी के पक्ष में फैसला: अनुचित बर्खास्तगी (Unfair Dismissal) सिद्ध; चैरिटी को £2,160.81 (लगभग ₹2.7 लाख) मुआवजा देने का आदेश। |

