Friday, July 10, 2026
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Matrimonial dispute: पत्नी कमाती है, लेकिन इससे उसका गुजारा नहीं होता; पति देंगे गुजारा भत्ता

Matrimonial dispute: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक पति की अपील खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ इसलिए कि पत्नी कमाती है, उसे पति से गुजारा भत्ता नहीं मिलना चाहिए, यह उचित नहीं है।

हर महीने 15 हजार रुपए अंतरिम गुजारा भत्ता दे

कोर्ट ने कहा कि पत्नी को वैसा ही जीवन स्तर मिलना चाहिए, जैसा वह शादीशुदा जीवन में जी रही थी। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पति को पत्नी को हर महीने 15 हजार रुपए अंतरिम गुजारा भत्ता देने को कहा गया था।

पति ने कहा- पत्नी की कमाई अच्छी है, इसलिए भत्ता नहीं देना चाहिए

यह मामला ठाणे के 36 वर्षीय व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने बांद्रा फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पति का कहना था कि उसकी पत्नी एक स्कूल में नौकरी करती है और हर महीने 21,820 रुपए कमाती है। इसके अलावा वह ट्यूशन से सालाना 2 लाख रुपए कमाती है और फिक्स्ड डिपॉजिट से ब्याज भी मिलता है। इसलिए उसे गुजारा भत्ता नहीं मिलना चाहिए।

पत्नी का पक्ष- पति की आमदनी लाखों में, फिर भी जिम्मेदारी से भाग रहा

पत्नी की ओर से वकील एसएस दुबे ने कोर्ट में कहा कि पति एक प्रतिष्ठित कंपनी में सीनियर मैनेजर/मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव है और उसकी आमदनी लाखों में है। उसके पास अच्छी खासी बचत और संसाधन हैं। इसके बावजूद वह पत्नी को उसका कानूनी हक देने से बच रहा है।

कोर्ट ने कहा- पत्नी की आमदनी कम, अकेले जीवन यापन संभव नहीं

न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की बेंच ने कहा कि पत्नी की आमदनी इतनी नहीं है कि वह अकेले सम्मानजनक जीवन जी सके। वह रोज लंबी दूरी तय कर नौकरी पर जाती है और फिलहाल अपने माता-पिता के साथ भाई के घर में रह रही है। इससे सभी को असुविधा हो रही है। कोर्ट ने माना कि पत्नी की स्थिति कठिन है और वह स्वतंत्र रूप से रहने की स्थिति में नहीं है।

पति की आमदनी ज्यादा, जिम्मेदारियां नहीं

कोर्ट ने यह भी कहा कि पति की आमदनी पत्नी से कहीं ज्यादा है और उस पर कोई विशेष पारिवारिक जिम्मेदारी भी नहीं है। भले ही वह अपनी जरूरतों और कानूनी जिम्मेदारियों के लिए कुछ खर्च करता हो, लेकिन उसके पास इतना पैसा है कि वह पत्नी को फैमिली कोर्ट के आदेश के अनुसार भत्ता दे सके।

कोर्ट ने कहा- फैमिली कोर्ट का आदेश सही, दखल की जरूरत नहीं

कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट का आदेश उचित है और इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है। इसलिए पति की अपील खारिज की जाती है।

शादी के तीन साल बाद अलग रहने लगे थे दोनों

यह दंपती 28 नवंबर 2012 को शादी के बंधन में बंधा था। पति का कहना है कि मई 2015 से पत्नी अपने माता-पिता के साथ रहने लगी थी। उसने आरोप लगाया कि पत्नी का व्यवहार ठीक नहीं था और वह अनुचित शर्तें रखती थी। पति ने तलाक की अर्जी दी थी, जिसके बाद पत्नी ने 29 सितंबर 2021 को अंतरिम गुजारा भत्ते की मांग की थी। फैमिली कोर्ट ने 24 अगस्त 2023 को पत्नी के पक्ष में फैसला दिया था।

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