हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क
- मुस्लिम पर्सनल लॉ और ‘सर दिनशॉ मुल्ला’ का संदर्भ:अदालत ने सर दिनशॉ फरदूनजी मुल्ला की पुस्तक ‘Principles of Mohammedan Law’ के अनुच्छेद 195 का हवाला दिया। इसके अनुसार:“स्वस्थ दिमाग का कोई भी मुस्लिम जो यौवन (Puberty) प्राप्त कर चुका है, विवाह का अनुबंध कर सकता है। किसी विपरीत साक्ष्य के अभाव में 15 वर्ष की आयु पूरी होने पर यौवन प्राप्त हुआ मान लिया जाता है।”
- पूर्व निर्णयों का हवाला (Gulam Deen v. State of Punjab):हाईकोर्ट ने अपने पिछले फैसलों का संदर्भ देते हुए कहा कि मुस्लिम लड़की का विवाह मुस्लिम पर्सनल लॉ से शासित होता है। चूंकि याचिकाकर्ता लड़की की उम्र 16 वर्ष से अधिक है, इसलिए वह अपनी पसंद के व्यक्ति से निकाह का अनुबंध करने के लिए सक्षम है।
- जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार:अदालत ने स्पष्ट किया कि हालांकि वह शादी की कानूनी वैधता (Validity) पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं कर रही है, लेकिन किसी भी नागरिक के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना राज्य का कर्तव्य है।
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत), यौवन प्राप्त करने पर विवाह की विधिक क्षमता और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार पर एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की एकल पीठ ने 10 सितंबर 2026 के अपने आदेश में लुधियाना (ग्रामीण) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP Rural, Ludhiana) को निर्देश दिया कि वे महिला के परिवार से जान के खतरे का सामना कर रहे मुस्लिम दंपत्ति के सुरक्षा प्रतिवेदन (Representation) पर कानून के अनुसार त्वरित और आवश्यक सुरक्षात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें। अदालत ने व्यवस्था दी है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के सिद्धांतों के अनुसार, 15 वर्ष की आयु पूर्ण कर यौवन (Puberty) प्राप्त कर चुका कोई भी मुस्लिम युवक या युवती अपनी पसंद के साथी के साथ निकाह करने के लिए विधिक रूप से सक्षम है।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां
1. मुस्लिम पर्सनल लॉ और विवाह योग्य आयु (Article 195, Mulla’s Code) सर दिनशॉ फरदूनजी मुल्ला द्वारा रचित ‘प्रिंसिपल्स ऑफ मोहम्मडन लॉ’ (Principles of Mohammedan Law) के अनुच्छेद 195 का संदर्भ लेते हुए अदालत ने स्पष्ट किया:
- स्वस्थ चित्त (Sound Mind) का कोई भी मुस्लिम, जिसने यौवन प्राप्त कर लिया हो, विवाह का अनुबंध (Contract of Marriage) करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
- किसी विपरीत साक्ष्य के अभाव में, 15 वर्ष की आयु पूरी होने पर यौवन (Puberty) की कानूनी उपधारणा (Presumption) मानी जाती है।
2. गुलाम दीन बनाम पंजाब राज्य नजीर का संदर्भ न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल ने पूर्ववर्ती फैसले गुलाम दीन एवं अन्य बनाम पंजाब राज्य का हवाला देते हुए दोहराया: “कानून पूरी तरह स्पष्ट है कि एक मुस्लिम लड़की का विवाह मुस्लिम पर्सनल लॉ द्वारा शासित होता है। सर दिनशॉ फरदूनजी मुल्ला की पुस्तक ‘प्रिंसिपल्स ऑफ मोहम्मडन लॉ’ के अनुच्छेद 195 के अनुसार, याचिकाकर्ता संख्या 2 (लड़की) 16 वर्ष से अधिक आयु की होने के कारण अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ विवाह का अनुबंध करने के लिए सक्षम थी। इस प्रकार, मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत दोनों याचिकाकर्ता विवाह योग्य आयु के हैं।”
3. विवाह की वैधता पर टिप्पणी किए बिना जीवन व स्वतंत्रता की सुरक्षा
- अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वह विवाह की वैधानिक वैधता (Validity of Marriage) पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं कर रही है।
- अदालत का प्राथमिक सरोकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक को प्राप्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की रक्षा करना है, जिसे परिवार के विरोध के कारण खतरे में नहीं डाला जा सकता।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (लुधियाना का मामला)
- पक्षकारों की आयु व संबंध: याचिकाकर्ता संख्या 1 (युवक) की आयु 26 वर्ष है, जबकि याचिकाकर्ता संख्या 2 (युवती) की आयु 17 वर्ष 8 माह है। दोनों एक-दूसरे को जानते थे और आपसी सहमति से विवाह करना चाहते थे।
- पारिवारिक विरोध और निकाह: युवती के पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे। इसके बाद युवती ने 22 अगस्त 2026 को अपना पैतृक घर छोड़ दिया और उसी दिन दोनों ने मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार विधिवत निकाह कर लिया।
- जान का खतरा व पुलिस में अर्जी: युवती के परिजनों द्वारा लगातार धमकियां दिए जाने के बाद दंपत्ति ने 30 अगस्त 2026 को एसएसपी (ग्रामीण), लुधियाना को सुरक्षा के लिए अभ्यावेदन दिया था। कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में सुरक्षा याचिका दायर की।
- राज्य का रुख: सुनवाई के दौरान राज्य के वकील याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत कानूनी स्थिति और मुल्ला के सिद्धांतों का खंडन नहीं कर सके।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश व निर्देश
- सुरक्षा अभ्यावेदन पर तत्काल कार्रवाई: उच्च न्यायालय ने लुधियाना ग्रामीण के एसएसपी को निर्देश दिया कि वे 30 अगस्त 2026 के सुरक्षा प्रतिवेदन पर संज्ञान लें और तथ्यों व परिस्थितियों के अनुसार कानून सम्मत सुरक्षात्मक कदम उठाएं।
- याचिका का निस्तारण: विवाह की वैधता पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिका को सुरक्षा निर्देशों के साथ निस्तारित (Disposed of) कर दिया गया।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: मुस्लिम दंपत्ति बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य [रिट याचिका (सिविल) – पुलिस सुरक्षा मांग]
- प्रासंगिक कानून: भारत का संविधान – अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा) एवं अनुच्छेद 226; मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) अनुप्रयोग अधिनियम, 1937; मुल्ला के ‘प्रिंसिपल्स ऑफ मोहम्मडन लॉ’ का अनुच्छेद 195
- संबद्ध न्यायिक नजीर: गुलाम दीन एवं अन्य बनाम पंजाब राज्य व अन्य
- पीठ: न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय)
Muslim Law: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल (Justice Vikram Aggarwal) |
| याचिकाकर्ताओं की उम्र | याचिकाकर्ता 1 (पुरुष): 26 वर्ष | याचिकाकर्ता 2 (महिला): 17 वर्ष 8 महीने |
| संबंधित कानून | संविधान का अनुच्छेद 226 और ‘प्रिंसिपल्स ऑफ मोहमडन लॉ’ (अनुच्छेद 195) |
| मुख्य विवाद | परिवार की मर्जी के खिलाफ निकाह करने पर जोड़े की जान-माल की सुरक्षा का खतरा |
| अदालत का आदेश | पुलिस प्रशासन को सुरक्षा याचिका पर तत्काल निर्णय लेने और कानूनन कार्रवाई का निर्देश |

