Thursday, October 1, 2026
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FIR Format: पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी की जाति लिखना तुरंत बंद करे यूपी सरकार…इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया आदेश

FIR Format: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी की जाति दर्ज करने की प्रथा को तुरंत रोका जाए।

शराब तस्करी से जुड़े मामले पर सुनवाई

अदालत ने इस प्रथा को कानूनी भ्रांति और संवैधानिक नैतिकता को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया, जो संवैधानिक लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती है। यह आदेश जस्टिस विनोद दिवाकर ने शराब तस्करी से जुड़े एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान 16 सितंबर को दिया।

पुलिस रिकॉर्ड से हटें जाति कॉलम

अदालत ने कहा कि एफआईआर, जब्ती मेमो और अन्य दस्तावेजों में आरोपी, मुखबिर या गवाह की जाति लिखने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि पुलिस के सभी प्रपत्रों से ऐसे कॉलम हटाए जाएँ।

यह रही कोर्ट की टिप्पणी

एफआईआर और जब्ती मेमो में आरोपी की जाति को माली, पहाड़ी, राजपूत, ठाकुर, पंजाबी पराशर और ब्राह्मण लिखना किसी वैध उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता। दुर्भाग्य यह है कि अधिकारी पर विभागीय जांच या संवैधानिक नैतिकता की ट्रेनिंग कराने के बजाय इस आचरण का बचाव किया गया।

एफआईआर फॉर्मेट में नहीं है अनिवार्यता

कोर्ट ने साफ किया कि एफआईआर और क्राइम डिटेल फॉर्म के निर्धारित प्रारूप में कहीं भी जाति या धर्म लिखना अनिवार्य नहीं है। फिर भी पुलिस पहचान के लिए जाति का सहारा ले रही है, जो 21वीं सदी में भी एक दुर्भाग्यपूर्ण सोच है। जब बॉडी कैमरा, मोबाइल कैमरा, फिंगरप्रिंट, आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, माता-पिता का विवरण और अन्य आधुनिक साधन उपलब्ध हैं, तब पहचान के लिए जाति पर निर्भर रहना असंगत है।

सोशल मीडिया पर जातिगत आक्रामकता

अदालत ने सोशल मीडिया पर भी चिंता जताई। इंस्टाग्राम, यूट्यूब शॉर्ट्स और फेसबुक रील्स जैसे प्लेटफॉर्म पर जाति-आधारित आक्रामकता, ग्रामीण मर्दानगी और पुरानी मान्यताओं का महिमामंडन किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि यह “डिजिटल जातीय अहंकार” युवाओं के मानसिक व्यवहार को प्रभावित कर रहा है और भाईचारे व एकता की संवैधानिक भावना को कमजोर कर रहा है।

वाहनों से हटें जाति के नारे

कोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया कि मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर सभी निजी और सार्वजनिक वाहनों पर जाति आधारित नारे और पहचान चिह्न प्रतिबंधित किए जाएँ। आरटीओ और ट्रैफिक विभाग को निर्देश दिए जाएँ कि ऐसे बोर्ड हटाए जाएँ और भारी जुर्माना लगाया जाए। हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई कि इन सिफारिशों पर गंभीरता से अमल होगा ताकि जाति-रहित समाज की ओर बढ़ा जा सके।

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