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Recruitment Rights: दिल्ली में शिक्षकों की भर्ती पर बड़ा फैसला… पद खाली होने का मतलब यह नहीं कि आपको नौकरी मिले, केस जरूर पढ़ें

Recruitment Rights: दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में नियुक्ति (Appointment) के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला और जस्टिस सी. हरि शंकर की बेंच ने ‘सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल’ (CAT) के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ किया कि भर्ती प्रक्रिया को अदालतों द्वारा दोबारा नहीं लिखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार कट-ऑफ (Cut-off) और वेटिंग लिस्ट (Waiting List) में जगह नहीं बना पाता है, तो वह केवल इस आधार पर नौकरी का दावा नहीं कर सकता कि कुछ पद खाली (Unfilled vacancies) रह गए हैं।

मामला क्या था? (The Dispute)

  • भर्ती: दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) ने सहायक शिक्षक (प्राइमरी) के लिए 554 पदों का विज्ञापन निकाला था।
  • OBC कैटेगरी: इस कैटेगरी के लिए 226 पद थे और कट-ऑफ 132.25 तय की गई थी।
  • याचिकाकर्ता की स्थिति: याचिकाकर्ता (OBC) ने 131.75 अंक प्राप्त किए थे, यानी वह कट-ऑफ से महज 0.50 अंक पीछे था।
  • तर्क: याचिकाकर्ता ने दलील दी कि OBC श्रेणी में 37 पद अभी भी खाली हैं (क्योंकि कुछ उम्मीदवारों ने जॉइन नहीं किया या अन्य कारणों से), इसलिए कट-ऑफ को कम करके उसे नियुक्ति दी जानी चाहिए।

कोर्ट का फैसला: अनिवार्य अधिकार नहीं (No Indefeasible Right)

  • अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों (तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान हाई कोर्ट, 2025 और कर्नाटक राज्य बनाम संतोष कुमार, 2026) का हवाला देते हुए कुछ बुनियादी नियम स्पष्ट किए।
  • चयन सूची बनाम नियुक्ति: मेरिट लिस्ट या वेटिंग लिस्ट में नाम आने मात्र से किसी उम्मीदवार को नौकरी पाने का ‘अकाट्य अधिकार’ (Indefeasible Right) नहीं मिल जाता।
  • राज्य का विवेक: सरकार के पास यह शक्ति है कि वह उचित कारणों से कुछ रिक्तियों को न भरे।
  • नियमों का पालन: भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से निर्धारित नियमों (जैसे 10% की वेटिंग लिस्ट सीमा) के अधीन होती है।

“एक बार जब कट-ऑफ और वेटिंग लिस्ट नियमों के अनुसार तय हो जाती है, और उम्मीदवार उनमें जगह नहीं पाता, तो वह केवल रिक्तियों की मौजूदगी के आधार पर नियुक्ति की मांग नहीं कर सकता।” — दिल्ली हाई कोर्ट

वेटिंग लिस्ट की सीमा (The 10% Rule)

कोर्ट ने पाया कि नियमों के अनुसार, भर्ती बोर्ड केवल विज्ञापित पदों और उसके अतिरिक्त 10% उम्मीदवारों की वेटिंग लिस्ट तैयार करने के लिए बाध्य है। नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो इस सीमा से बाहर जाकर केवल पद भरने के लिए कम अंक वाले उम्मीदवारों को बुलाने की अनुमति देता हो।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
याचिकाकर्ताशिक्षक भर्ती का उम्मीदवार (OBC कैटेगरी)।
अंक131.75 (कट-ऑफ 132.25 से कम)।
दावा37 खाली पदों पर नियुक्ति की मांग।
कोर्ट का आदेशयाचिका खारिज; पद खाली होने पर भी कट-ऑफ कम करना जरूरी नहीं।

भर्ती प्रक्रिया की पवित्रता

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला भर्ती बोर्डों को स्वायत्तता प्रदान करता है और स्पष्ट करता है कि मेरिट के मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता। यह उन उम्मीदवारों के लिए एक संदेश है जो अक्सर भर्ती पूरी होने के बाद शेष रिक्तियों पर अपना अधिकार जताते हैं। कोर्ट ने माना कि यदि वह इस मांग को स्वीकार करता, तो यह ‘भर्ती प्रक्रिया को फिर से लिखने’ जैसा होता, जो न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

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