Friday, June 5, 2026
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Leave Benefits: प्राइवेट स्कूल की महिला कर्मचारी भी सरकारी कर्मचारियों की तरह चाइल्ड केयर लीव की है हकदार…यह पढ़कर मांगें अपना अधिकार

Leave Benefits: दिल्ली के गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों (Unaided Private Schools) में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के हक में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है।

सिंगल जज के फैसले को डिविजन बेंच ने किया खारिज

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने 4 जून 2026 (गुरुवार) को यह फैसला सुनाते हुए एक सिंगल जज के उस पुराने आदेश को पूरी तरह खारिज (Set Aside) कर दिया, जिसने एक निजी स्कूल की महिला शिक्षिका की सीसीएल (CCL) की मांग वाली याचिका को ठुकरा दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि निजी स्कूलों की महिला शिक्षक और कर्मचारी भी सरकारी स्कूलों की तर्ज पर अपने बच्चों की देखभाल के लिए ‘चाइल्ड केयर लीव’ (CCL) पाने की पूरी हकदार हैं।

दिल्ली स्कूल एजुकेशन रूल्स (DSER) बना आधार

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम, 1973 (Delhi School Education Rules) के नियम 111 को मुख्य आधार बनाया।

क्या कहता है नियम 111: इस नियम के तहत दिल्ली के किसी भी मान्यता प्राप्त निजी स्कूल (चाहे वह सहायता प्राप्त हो या गैर-सहायता प्राप्त) के कर्मचारियों को छुट्टियों के वही लाभ (Leave Benefits) मिलने चाहिए, जो सरकारी स्कूलों में उनके समान पद (Status) पर काम करने वाले कर्मचारियों को मिलते हैं।

केंद्रीय सिविल सेवा नियम का हवाला: कोर्ट ने नोट किया कि सरकारी स्कूल के कर्मचारियों को केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1972 के नियम 43(C) के तहत चाइल्ड केयर लीव की सुविधा मिलती है। इसलिए, नियम 111 के तहत यह लाभ निजी स्कूलों पर भी हूबहू लागू होता है।

यह रही अदालत की स्पष्ट टिप्पणी

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसी विशेष प्रकार की छुट्टी का कोई वित्तीय या मौद्रिक मूल्य (Character of Money) है या नहीं। चूंकि नियम 111 निजी स्कूल के कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों के समान दर्जा देता है, इसलिए हमारा मानना है कि दिल्ली के निजी तौर पर प्रबंधित और गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी CCL का लाभ उसी तरह मिलेगा, जैसे सरकारी स्कूलों के कर्मचारियों को मिलता है।”
क्या था पूरा मामला? (शिक्षिका संगीता नेगी की कानूनी जीत)

यह मामला भारती पब्लिक स्कूल की एक शिक्षिका संगीता नेगी से जुड़ा है

स्कूल का इनकार: संगीता नेगी ने अपने बेटे की देखभाल और सहायता के लिए मई से सितंबर 2025 तक स्कूल से चाइल्ड केयर लीव (CCL) मांगी थी। स्कूल प्रबंधन ने इस मांग को खारिज कर दिया था।

सिंगल जज का रुख: शिक्षिका ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट के सिंगल जज के पास याचिका दायर की, लेकिन 8 अगस्त 2025 को सिंगल जज ने भी उनकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि निजी स्कूलों पर यह नियम बाध्यकारी नहीं है।

डिवीजन बेंच में अपील: संगीता नेगी ने अपने वकीलों (सर्मन रावत और आस्था विश्वकर्मा) के जरिए इस फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, जहां अब उन्हें बड़ी जीत मिली है।

चाइल्ड केयर लीव सिर्फ छुट्टी नहीं, एक बड़ा सामाजिक उद्देश्य है: कोर्ट

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में अमनदीप कौर बनाम भारत संघ मामले के पुराने अदालती फैसले का हवाला देते हुए एक बहुत ही संवेदनशील टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि चाइल्ड केयर लीव (CCL) केवल एक प्रशासनिक छुट्टी नहीं है, बल्कि यह परिवार के कल्याण को बढ़ावा देने और बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करने के एक महत्वपूर्ण सामाजिक उद्देश्य (Social Purpose) को पूरा करती है।

कोर्ट का अंतिम आदेश: डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश को रद्द करते हुए भारती पब्लिक स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वे महिला शिक्षिका (संगीता नेगी) द्वारा दी गई CCL की अर्जी पर नए सिरे से विचार करें और जल्द से जल्द (With Expedition) इस पर सकारात्मक निर्णय लें।

विश्लेषण: सरकारी बनाम प्राइवेट स्कूल के अधिकार अब समान

यह फैसला दिल्ली के हजारों प्राइवेट स्कूल टीचर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

विषयप्राइवेट स्कूलों का पुराना तर्कदिल्ली हाई कोर्ट का नया आदेश (2026)
छुट्टियों का नियमनिजी स्कूल अपने आंतरिक नियमों और कांट्रैक्ट के हिसाब से छुट्टियां तय करते हैं।दिल्ली स्कूल एजुकेशन रूल्स का नियम 111 सर्वोपरि है। छुट्टियां सरकारी स्तर की ही देनी होंगी।
महिला/बाल कल्याणसीसीएल (CCL) जैसी लंबी छुट्टियां केवल सरकारी नौकरियों के लिए व्यावहारिक हैं।सीसीएल एक सामाजिक दायित्व है, निजी संस्थान मातृत्व और बाल सुरक्षा के अधिकारों से मुंह नहीं मोड़ सकते।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

दिल्ली हाई कोर्ट का यह निर्णय कॉरपोरेट या निजी शैक्षणिक संस्थानों की मनमानी पर एक बड़ा कानूनी अंकुश है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के मातृत्व और उनके बच्चों की देखभाल के अधिकारों को ‘प्राइवेट और सरकारी’ के संकीर्ण चश्मे से नहीं देखा जा सकता। दिल्ली के सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अब अपनी महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ के साथ-साथ चाइल्ड केयर लीव की सुविधाएं भी अनिवार्य रूप से देनी होंगी।

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