Wednesday, July 15, 2026
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Safety Failure: 6 एयरबैग्स, फिर भी जीरो सुरक्षा… नेशनल कंज्यूमर कोर्ट ने क्यूं कहा- फोर्ड लौटाए व कार के पूरे पैसे वापस करें

Safety Failure: भारत के राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने वाहन सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

जिला फोरम और पंजाब राज्य आयोग का फैसला बरकरार

आयोग के प्रिसाइडिंग मेंबर डॉ. इंदर जीत सिंह और जस्टिस डॉ. सुधीर कुमार जैन की बेंच ने फोर्ड इंडिया और उसके डीलर की याचिकाओं को खारिज करते हुए अमृतसर जिला फोरम और पंजाब राज्य आयोग के पुराने फैसलों को बरकरार रखा। आयोग ने फोर्ड इंडिया (Ford India) को आदेश दिया है कि वह एक ग्राहक को उसकी फोर्ड इकोस्पोर्ट (Ford EcoSport) कार की पूरी कीमत (10.42 लाख रुपये) वापस करे। यह आदेश तब आया जब एक गंभीर दुर्घटना के दौरान कार के 6 में से 4 एयरबैग्स नहीं खुले, जिसे आयोग ने ‘मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’ (उत्पादन दोष) माना।

मामला क्या था? (The Expressway Crash)

  • खरीद: अमृतसर के योगेश जैन ने 1 जुलाई 2015 को 10.42 लाख रुपये में ‘6 एयरबैग्स’ वाली फोर्ड इकोस्पोर्ट खरीदी थी।
  • एक्सीडेंट: 27 मई 2016 को पठानकोट-अमृतसर एक्सप्रेसवे पर कार डिवाइडर से टकराकर पलट गई। ड्राइवर को सिर, गर्दन और हाथ में गंभीर चोटें आईं।
  • विफलता: कार में 6 एयरबैग्स होने के बावजूद, दुर्घटना के समय केवल 2 एयरबैग्स खुले। ड्राइवर साइड का फ्रंट एयरबैग और बाईं ओर के तीन एयरबैग्स बिल्कुल नहीं खुले।

कोर्ट का तर्क: तथ्य खुद गवाही देते हैं

  • फोर्ड ने दलील दी थी कि एयरबैग्स केवल विशिष्ट कोण (Angles) पर टकराने पर ही खुलते हैं और इसकी जांच के लिए किसी एक्सपर्ट की रिपोर्ट नहीं ली गई। कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
  • Res Ipsa Loquitur: आयोग ने ‘रेस इप्सा लोक्विटुर’ (तथ्य स्वयं बोलते हैं) का सिद्धांत लागू किया। कोर्ट ने कहा कि इतने भीषण एक्सीडेंट में एयरबैग्स का न खुलना खुद साबित करता है कि कार में तकनीकी खराबी थी। इसके लिए अलग से लैब टेस्टिंग की जरूरत नहीं है।
  • सुरक्षा की आखिरी दीवार: एयरबैग्स और सीटबेल्ट दुर्घटना में सुरक्षा की ‘लास्ट लाइन ऑफ डिफेंस’ होते हैं। अगर ये समय पर काम नहीं करते, तो यह ग्राहक के जीवन के साथ खिलवाड़ है।

फोर्ड और डीलर की लापरवाही

  • मरम्मत में देरी: एक्सीडेंट के बाद कार 3 महीने तक डीलर के पास रही, लेकिन वे एयरबैग्स की खराबी को ठीक नहीं कर सके।
  • कंपनी की चुप्पी: ग्राहक ने कंपनी को शिकायत भेजी, लेकिन फोर्ड इंडिया ने समस्या सुलझाने के बजाय तकनीकी तर्कों का सहारा लिया।
  • जिला फोरम का रुख: जिला उपभोक्ता फोरम ने नोट किया कि कंपनी ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष सही समय पर नहीं रखा, जिससे ग्राहक के सबूतों को चुनौती नहीं मिल सकी।

आयोग का अंतिम आदेश

  • NCDRC ने फोर्ड इंडिया और डीलर को संयुक्त रूप से निर्देश दिया है।
  • फुल रिफंड: कार की मूल कीमत 10,42,776 रुपये वापस की जाए।
  • मुआवजा: 20,000 रुपये का मुआवजा और 5,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में दिए जाएं।
  • ब्याज: देरी होने पर इस राशि पर 9% सालाना ब्याज भी देना होगा।

निष्कर्ष: ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए बड़ा सबक

यह फैसला कार निर्माताओं के लिए एक सख्त चेतावनी है। कंपनियां केवल ‘6 एयरबैग्स’ का विज्ञापन देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं। यदि सुरक्षा फीचर्स आपातकाल में काम नहीं करते हैं, तो उन्हें ‘मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’ माना जाएगा और कंपनियों को भारी हर्जाना भुगतना होगा।

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