Monday, August 31, 2026
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Abuses At Judges: लखनऊ यूनिवर्सिटी के दो लॉ स्टूडेंट्स थे गालीबाज… दिल्ली पुलिस का एक्शन, आरोपी छात्रों को किया अरेस्ट, पढ़ें यहां

Abuses At Judges: कानून की पढ़ाई करने वाले छात्र जब खुद ही कानून को हाथ में ले लें और देश की सबसे बड़ी अदालत को अखाड़ा बना दें, तो पुलिस को एक्शन लेना ही पड़ता है।

10 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम नंबर 13 में हुए था भारी हंगामा

सुप्रीम कोर्ट में लाइव सुनवाई के दौरान जजों को ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’ कहकर हुक्म सुनाने, कोर्ट रूम में फाइलें हवा में उड़ाने और चीफ जस्टिस (CJI) को सरेआम गाली देने वाले लखनऊ यूनिवर्सिटी के दो लॉ स्टूडेंट्स को दिल्ली पुलिस ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। सुप्रीम कोर्ट के भीतर अनुशासन और मर्यादा को तार-तार करने वाली एक बेहद शर्मनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है। 10 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम नंबर 13 में हुए भारी हंगामे और बदतमीजी के मामले में तिलक मार्ग थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के दो छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत ने दोनों आरोपियों को दो दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

आरोपियों की पहचान: कौन हैं कोर्ट रूम में हंगामा करने वाले छात्र?

दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है।

प्रबल प्रताप सिंह (24 वर्ष): यह लखनऊ यूनिवर्सिटी में एलएलबी (LLB) थर्ड ईयर (तीसरे वर्ष) का छात्र है। यही इस पूरे ड्रामे का मुख्य सूत्रधार था और ‘इंसाफ’ के नाम पर कोर्ट रूम में गालियां दे रहा था।

चंदर भान (23 वर्ष): यह इसी यूनिवर्सिटी में एलएलबी सेकंड ईयर (दूसरे वर्ष) का छात्र है, जो इस साजिश और हुड़दंग में प्रबल के साथ शामिल था।

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कोर्ट रूम लाइव: मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट, मैं तुम्हें ऑर्डर देता हूं…

यह पूरी घटना 10 जुलाई को जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने घटी। प्रबल प्रताप सिंह, इलाहाबाद हाई कोर्ट के अप्रैल 2026 के एक फैसले के खिलाफ खुद अपनी पैरवी (Petitioner-in-Person) करने सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। जैसे ही मामले की सुनवाई शुरू हुई, कानूनी दलीलें देने के बजाय प्रबल ने जजों को बेहद अपमानजनक लहजे में संबोधित करते हुए कहा, “मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट (न्यायिक नौकर), मैं तुम्हें ऑर्डर देता हूँ कि तुम लखनऊ के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश जारी करो।” इस दुस्साहस और असामान्य भाषा को सुनकर हैरान जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने पूछा, “तुम मुझे ऑर्डर दे रहे हो? तुम हमें ऑर्डर दे रहे हो?” इस पर प्रबल ने अकड़ते हुए जवाब दिया, “मेरी तरफ से बस इतना ही। सब कुछ रिकॉर्ड पर है।” और इसके तुरंत बाद उसने अपने हाथ में पकड़ी केस फाइल और कागजात हवा में उछाल दिए।

सीजेआई को दी गाली, पुलिस रिमांड पर भेजे गए

जब सुरक्षाकर्मियों ने प्रबल को काबू करने और कोर्ट रूम से बाहर निकालने की कोशिश की, तो वह हिंसक हो उठा। उसने सुरक्षाकर्मियों के काम में बाधा डाली और कोर्ट रूम से बाहर ले जाए जाते समय देश के चीफ जस्टिस (CJI) को लेकर बेहद भद्दी और आपत्तिजनक गालियां दीं। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

‘मेंटल ड्रामा’ फ्लॉप: डॉक्टरों ने घोषित किया मानसिक रूप से स्वस्थ

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने दोनों छात्रों को हिरासत में ले लिया। कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों आरोपियों का दिल्ली के प्रसिद्ध मानसिक स्वास्थ्य संस्थान इहाबास (IHBAS) में मेडिकल और मनोवैज्ञानिक परीक्षण करवाया गया।

रिपोर्ट में क्या आया?: डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद दोनों लॉ स्टूडेंट्स को मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ (Mentally Sound) घोषित कर दिया। यानी यह साफ हो गया कि यह हरकत किसी मानसिक बीमारी का नतीजा नहीं, बल्कि जानबूझकर कोर्ट को नीचा दिखाने की कोशिश थी।

आपत्तिजनक पर्चे बरामद: पुलिस ने आरोपियों के पास से कई ऐसे पर्चे (Pamphlets) बरामद किए हैं, जिनमें अदालतों और जजों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अभद्र भाषा लिखी हुई थी।

कोर्ट का बड़ा दिल, पर पुलिस का कड़ा एक्शन

दिलचस्प बात यह है कि 10 जुलाई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ता की स्थिति को देखते हुए दरियादिली दिखाई थी और अपने आदेश में लिखा था कि वे इस छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक (कंटेंप्ट) कार्रवाई नहीं करना चाहते। अदालत ने मामले की मेरिट को देखते हुए हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा स्टाफ की शिकायत और सरकारी काम में बाधा डालने के कारण दिल्ली पुलिस ने आपराधिक केस दर्ज कर इन्हें दबोच लिया।

केस शीट: सुप्रीम कोर्ट हुड़दंग एवं लॉ छात्र गिरफ्तारी समीक्षा (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांविधिक स्थिति और वर्तमान अदालती रिकॉर्ड
घटना की तारीख10 जुलाई 2026 (सुनवाई के दौरान)
संबंधित थानातिलक मार्ग पुलिस स्टेशन, नई दिल्ली
संबंधित सुप्रीम कोर्ट बेंचजस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे
मुख्य आरोपीप्रबल प्रताप सिंह (LLB 3rd Year) व चंदर भान (LLB 2nd Year)
विश्वविद्यालयलखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University)
मेडिकल रिपोर्ट (IHBAS)मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य पाए गए।
वर्तमान स्थितिदिल्ली की अदालत द्वारा दोनों आरोपी 2 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेजे गए।

यह रही अदालत की टिप्पणी

भले ही सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने बड़ा दिल दिखाते हुए इन पर अवमानना की कार्रवाई नहीं की, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करके बिल्कुल सही संदेश दिया है। इहाबास की रिपोर्ट ने इनके ‘विक्टिम कार्ड’ या मानसिक अस्वस्थता के संभावित बहाने की भी हवा निकाल दी है। लॉ के इन छात्रों को अब समझ आ गया होगा कि कोर्ट रूम में फाइलें फेंकने की असली कानूनी कीमत क्या होती है।

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