Sunday, June 28, 2026
HomeSupreme CourtSC News: जयकवाड़ी बांध का विरोध करनेवाले पर क्यों बिफरी कोर्ट, हर...

SC News: जयकवाड़ी बांध का विरोध करनेवाले पर क्यों बिफरी कोर्ट, हर चीज का विरोध करेंगे तो देश कैसे प्रगति करेगा…

SC News:सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के जयकवाड़ी बांध के विरोध करनेवालों से कहा, यदि हर परियोजना का विरोध किया जाएगा, तो देश कैसे प्रगति करेगा?

आपको किसने लगाया किसने फंड की…

न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने एनजीओ कहार समाज पंचायत समिति की नीयत पर भी सवाल उठाते हुए पूछा, आपको किसने लगाया और किसने फंडिंग की? पर्यावरण संरक्षण में आपका अब तक का अनुभव क्या है? दरअसल, जयकवाड़ी बांध पर एक नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना का एनजीओ की ओर से विरोध किया गया। शीर्ष कोर्ट ने एनजीओ को जमकर फटकार लगाई। यह बांध एक पक्षी अभयारण्य और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है।

एक सौर ऊर्जा परियोजना से भी आपको समस्या है…

पीठ ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा 9 सितंबर 2024 को दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली एनजीओ की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि एनजीटी ने मामले की सही तरीके से समीक्षा की थी और उसमें हस्तक्षेप करने की कोई जरूरत नहीं है। आप किसी भी परियोजना को आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं। अगर हर परियोजना का विरोध किया जाएगा, तो देश कैसे प्रगति करेगा? यहां तक कि एक सौर ऊर्जा परियोजना से भी आपको समस्या है।

नवीकरणीय ऊर्जा और ईंधन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए…

एनजीओ के वकील ने दलील दी कि यह इलाका एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र है और यह परियोजना जैव विविधता को नुकसान पहुंचाएगी। इस पर पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह कंपनी, जो टेंडर हार गई थी, उसने एनजीओ को फंडिंग की है और अब वह “निरर्थक मुकदमेबाजी” में लिप्त होकर परियोजना को रोकने की कोशिश कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनजीटी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से सही तरीके से जवाब मांगा था, जिसने 12 जुलाई 2017 की अधिसूचना प्रस्तुत कर स्पष्ट किया कि नवीकरणीय ऊर्जा और ईंधन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

एनजीटी ने भी याचिका खारिज की थी

9 सितंबर 2024 को, एनजीटी की पश्चिमी क्षेत्र पीठ ने एनजीओ की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि यह यह साबित नहीं कर सका कि पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधि को प्रतिबंधित करने वाला कोई कानून है। ट्रिब्यूनल ने यह भी उल्लेख किया कि थीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (पूर्व में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड), जो कि राष्ट्रीय तापीय विद्युत निगम (NTPC) और महाराष्ट्र सरकार के विद्युत मंत्रालय के स्वामित्व में है, ने जयकवाड़ी बांध पर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए एक टेंडर जारी किया था। यह बांध गोदावरी नदी पर, संभाजी नगर जिले के पैठण तालुका में जयकवाड़ी गांव के निकट स्थित है।

एनजीटी ने मामले को लेकर दिया था निष्कर्ष

एनजीटी ने उल्लेख किया कि नाथ सागर जलाशय जयकवाड़ी बांध द्वारा निर्मित एक जलाशय है, जो गोदावरी और प्रवरा नदियों से पोषित होता है। यह 55 किलोमीटर लंबा और 27 किलोमीटर चौड़ा है और 350 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। एनजीओ ने यह भी तर्क दिया कि जयकवाड़ी बांध के कारण कुल जलमग्न क्षेत्र लगभग 36,000 हेक्टेयर (89,000 एकड़) था और इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। इसलिए, पर्यावरण मानकों और जैव विविधता संरक्षण की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए बांध पर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, एनजीटी ने इन तर्कों को ठुकराते हुए कहा कि एनजीओ यह साबित नहीं कर सका कि इस तरह की परियोजना पर कोई कानूनी प्रतिबंध है।

एनजीओ ने यह की थी मांग

  • THDC इंडिया लिमिटेड को बांध पर प्रस्तावित “फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट” को रद्द करने के निर्देश दिए जाएं।
  • जलजीवों को नुकसान: एनजीओ का कहना था कि यह परियोजना जलाशय में जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाएगी और क्षेत्र की जैव विविधता को स्थायी क्षति हो सकती है।
  • पक्षी अभयारण्य को खतरा: यह परियोजना घोषित पक्षी अभयारण्य के लिए कई समस्याएँ पैदा कर सकती है।
  • पीने और कृषि के लिए जल संकट: बांध का पानी पीने और कृषि उपयोग के लिए भी जाता है, जिससे इस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
broken clouds
42.5 ° C
42.5 °
42.5 °
25 %
1.1kmh
67 %
Sun
42 °
Mon
44 °
Tue
40 °
Wed
30 °
Thu
32 °

Recent Comments