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SHELTER HOMES RELOCATION: दिल्ली में बेघर लोगों के पुनर्वास की कोई जगह नहीं बची… यह रही NALSA की रिपोर्ट

SHELTER HOMES RELOCATION: DMRC के निर्माण कार्य के चलते शेल्टर होम्स के स्थानांतरण पर रिपोर्ट पेश किया गया।

शहरी बेघरों को वैकल्पिक जगहों पर शिफ्ट करने का मामला

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि दिल्ली में शहरी बेघरों को वैकल्पिक जगहों पर शिफ्ट करने की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि जिन शेल्टर होम्स को पुनर्वास स्थल के रूप में प्रस्तावित किया गया था, वे पहले से ही अधिकतम क्षमता तक भरे हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच

सुप्रीम कोर्ट ने 29 अगस्त को NALSA को निर्देश दिया था कि वह DMRC के निर्माण कार्य के कारण प्रभावित हो रहे शेल्टर होम्स की स्थिति की जांच कर रिपोर्ट दे। इसके बाद NALSA ने दिल्ली के आठ शेल्टर होम्स — सराय काले खां और आनंद विहार क्षेत्रों में स्थित का निरीक्षण किया।

रिपोर्ट में क्या कहा गया

रिपोर्ट के मुताबिक, “वैकल्पिक साइटों पर पुनर्वास संभव नहीं है, क्योंकि शेल्टर होम्स पहले से ही पूरी तरह भरे हुए हैं। यदि किसी भी दिन ये शेल्टर अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुँच जाते हैं, तो किसी नए व्यक्ति के लिए बिस्तर या जगह नहीं बचेगी।” NALSA ने यह भी कहा कि रोजगार और बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखे बिना लोगों को नई जगहों पर भेजना अनुचित होगा, क्योंकि कई वयस्क अपने मौजूदा शेल्टर के पास काम करते हैं और बच्चों के स्कूल भी वहीं हैं।

लोग खुद भी नहीं चाहते शिफ्ट होना

रिपोर्ट में कहा गया कि कई निवासियों ने नई साइटों पर जाने से इनकार किया है। NALSA के अनुसार, परिवारों को एक साथ रखने की व्यवस्था जरूरी है, क्योंकि कई परिवारों में दो से छह सदस्य हैं।

किन जगहों को बताया गया अनुपयुक्त

NALSA ने बताया कि हनुमान मंडी और यमुना बाजार के शेल्टर होम्स बरसात के मौसम में जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या से जूझते हैं, जिससे वहाँ रहना “अस्वास्थ्यकर और असुरक्षित” हो जाता है। वहीं कश्मीरी गेट और मोटिया खान के शेल्टरों को “पूरी तरह अनुपयुक्त” बताया गया है। “इन जगहों पर शौचालय बंद हैं, परिसर गंदे हैं, सीवेज जमा है, सुरक्षा और CCTV की व्यवस्था नहीं है।”

मामला क्या है?

यह मामला साल 2003 की जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ई.आर. कुमार ने दिल्ली में बेघरों के शेल्टर बंद किए जाने का मुद्दा उठाया था। वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया था कि मेट्रो निर्माण के चलते 1000 से ज्यादा लोग बेघर हो सकते हैं। दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) ने मेट्रो कार्य के लिए इन शेल्टरों को अस्थायी रूप से हटाने की अनुमति दी है और वैकल्पिक साइटें सुझाई हैं — लेकिन NALSA की रिपोर्ट के अनुसार, इन साइटों पर जगह ही नहीं है।

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