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SRN HOSPITAL: स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल अस्पताल नहीं, शवगृह बन गया…इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

SRN HOSPITAL: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, प्रयागराज का स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल अब अस्पताल नहीं, बल्कि शवगृह बन गया है।

माफिया के दलाल मरीजों को खींचकर प्राइवेट अस्पतालों में ले जा रहे

कोर्ट ने प्रयागराज की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि शहर में मेडिकल माफिया का बोलबाला है। यह अस्पताल दयनीय स्थिति में है और यहां गरीब व लाचार मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा। मेडिकल माफिया के दलाल मरीजों को खींचकर प्राइवेट अस्पतालों में ले जा रहे हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 मई की तारीख तय की है।

न सुविधा व न ही ओपीडी में डॉक्टर

न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल कॉलेज से जुड़े इस अस्पताल में न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही ओपीडी में डॉक्टर मौजूद रहते हैं। कोर्ट ने दो अमीकस क्यूरी (न्याय मित्र) की रिपोर्ट के आधार पर यह टिप्पणी की, जिन्होंने अस्पताल का निरीक्षण किया था।

कोर्ट ने दिए सुधार के निर्देश

कोर्ट ने SRN अस्पताल की स्थिति सुधारने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (चिकित्सा स्वास्थ्य) को आदेश दिया कि वे इस आदेश की जानकारी राज्य सरकार को दें और इसे मुख्य सचिव तथा आवश्यकता होने पर मुख्यमंत्री तक पहुंचाएं।

महाकुंभ के दौरान भी नहीं थी पर्याप्त व्यवस्था

कोर्ट ने कहा कि जनवरी-फरवरी 2025 में प्रयागराज में महाकुंभ हुआ था, जिसमें राज्य सरकार के अनुसार 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। SRN अस्पताल मेला क्षेत्र से सिर्फ एक किलोमीटर दूर है, लेकिन शहर की मेडिकल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। भगवान की कृपा थी कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, वरना इलाज की कोई व्यवस्था नहीं थी।

मेडिकल माफिया और अस्पताल स्टाफ की मिलीभगत

कोर्ट ने कहा कि SRN अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की निजी मेडिकल माफिया से मिलीभगत है, जिससे अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। राज्य और जिला प्रशासन प्रयागराज के नागरिकों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं देने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

अन्य शहरों से तुलना में प्रयागराज पिछड़ा

कोर्ट ने कहा कि प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य द्वारा दाखिल हलफनामे से पता चलता है कि लखनऊ, कानपुर और गोरखपुर जैसे शहरों में 2000 से ज्यादा बेड वाले अस्पताल हैं, जबकि प्रयागराज में सिर्फ 1750 बेड की व्यवस्था है। यह स्थिति तब है जब दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला प्रयागराज में होता है।

जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी

कोर्ट ने प्रयागराज के सांसदों और विधायकों पर भी नाराजगी जताई। कहा कि उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में प्रयागराज से मंत्री हैं, लेकिन उन्होंने मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल की बिगड़ती हालत पर कोई ध्यान नहीं दिया।

प्राइवेट प्रैक्टिस पर निगरानी के निर्देश

कोर्ट ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वे एक टीम बनाएं, जो मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, रीडर और लेक्चरर की निजी प्रैक्टिस पर निगरानी रखे।

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