Saturday, August 15, 2026
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AI-JUDGEMENTS: AI-जनरेटेड फर्जी फैसलों को सुप्रीम कोर्ट ने दिया नाम-हैलुसिनेशन…जानिए इसे वेक-अप कॉल क्यों कहा, पढ़ें

AI-JUDGEMENTS: सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों और याचिकाकर्ताओं द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए ऐसे अदालती फैसलों का हवाला देने पर गहरी चिंता जताई है, जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं हैं।

जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि यह चलन न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर की अदालतों में तेजी से बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी कानूनी बिरादरी के लिए एक वेक-अप कॉल है। तकनीक शोध में मदद तो कर सकती है, लेकिन वह एक वकील के विवेक और मूल कानूनी दस्तावेजों की जगह नहीं ले सकती। हैलुसिनेशन (AI द्वारा गलत जानकारी को सच की तरह पेश करना) कानूनी दुनिया के लिए एक बड़ा जोखिम बन गया है। कोर्ट ने इसे एक वैश्विक “खतरा” (Menace) करार दिया है।

मामला क्या था? (बॉम्बे हाई कोर्ट का संदर्भ)

  • सुप्रीम कोर्ट एक कंपनी के निदेशक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा की गई कुछ सख्त टिप्पणियों को हटाने (Expunge) की मांग की गई थी।
  • ChatGPT का उपयोग: हाई कोर्ट ने पाया था कि प्रतिवादी ने फरवरी और अप्रैल 2025 में जो लिखित दलीलें पेश कीं, वे ChatGPT जैसे AI टूल से तैयार की गई थीं।
  • पकड़े जाने के संकेत: हाई कोर्ट ने नोट किया कि दलीलों में ‘ग्रीन-बॉक्स टिक-मार्क’, खास तरह के ‘बुलेट पॉइंट्स’ और बार-बार दोहराए गए शब्द स्पष्ट कर रहे थे कि यह काम AI का है।

फर्जी केस का हवाला: ज्योति बनाम एलीगेंट एसोसिएट्स

  • सबसे गंभीर बात तब सामने आई जब दलीलों में एक केस का हवाला दिया गया— “ज्योति पत्नी दिनेश तुलसियानी बनाम एलीगेंट एसोसिएट्स”।
  • सच्चाई: हाई कोर्ट और उसके लॉ क्लर्कों ने इस केस को खोजने की बहुत कोशिश की, लेकिन पूरे कानूनी इतिहास में इस नाम का कोई फैसला मौजूद नहीं था।
  • नतीजा: कोर्ट ने कहा कि इस फर्जी संदर्भ के कारण अदालत का कीमती समय बर्बाद हुआ।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संदेश: सावधानी जरूरी

शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट की टिप्पणियों को हटाते हुए भी सच्चाई स्वीकार की। कहा, यह खतरा अब सभी अदालतों में व्याप्त है। हर किसी को इसके प्रति सावधान रहने की जरूरत है। वास्तव में, यह अदालत पहले से ही इस मामले पर न्यायिक पक्ष से विचार कर रही है। अदालत ने AI के उपयोग को लेकर कुछ बुनियादी दिशा-निर्देशों की ओर संकेत किया।

AI और कानूनी शोध (Research) की सीमाएं

क्या करें?क्या न करें?
अनुसंधान (Research): AI का उपयोग कानूनी शोध में सहायता के लिए किया जा सकता है।अंधविश्वास: AI द्वारा दिए गए संदर्भों (Citations) पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
क्रॉस-वेरिफिकेशन: जनरेट की गई सामग्री और केस लॉ का मूल स्रोतों से मिलान करना वकील की जिम्मेदारी है।फर्जी दस्तावेज: बिना जांचे किसी भी ‘काल्पनिक’ फैसले को अदालत के समक्ष पेश न करें।
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