Friday, August 14, 2026
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TRAINS-SAFETY: हर यात्रियों को यह खबर पढ़ना जरूरी…लंबी दूरी की ट्रेनों में हों वंदे भारत जैसी सुरक्षा घोषणाएं

TRAINS-SAFETY: बॉम्बे हाई कोर्ट ने रेलवे अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा है कि सभी लंबी दूरी की ट्रेनों में ‘वंदे भारत’ की तर्ज पर सार्वजनिक सुरक्षा घोषणाएं (Safety Announcements) शुरू की जानी चाहिए।

जस्टिस जितेंद्र जैन की एकल पीठ ने यह सुझाव देते हुए यात्रियों को चलती ट्रेन से उतरने या चढ़ने की कोशिश न करने की भी सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि यात्रियों को यह स्पष्ट पता होना चाहिए कि ट्रेन किन स्टेशनों पर रुकेगी और किन पर नहीं। अदालत ने रोहिदास कुमावत नामक एक व्यक्ति को ₹80,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया, जो लगभग एक दशक पहले जलगांव रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन से उतरने की कोशिश में घायल हो गया था।

अदालत का फैसला: ₹80,000 मुआवजे का आदेश

  • रेलवे का तर्क: रेलवे ट्रिब्यूनल ने 2018 में यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया था कि यह “स्वयं पहुंचाई गई चोट” (Self-inflicted injury) का मामला था।
  • हाई कोर्ट का रुख: कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को पलटते हुए कहा कि यात्री ने जानबूझकर खुद को चोट नहीं पहुंचाई, बल्कि घबराहट (Panic) में वह जलगांव स्टेशन पर उतरने की कोशिश करने लगा क्योंकि उसे लगा था कि वहां ट्रेन रुकेगी।

प्रमुख टिप्पणियां: मानसिक संतुलन की परीक्षा

  • अदालत ने रेल यात्रा के दौरान मानवीय व्यवहार और सुरक्षा व्यवस्था पर कुछ बुनियादी सवाल उठाए।
  • घोषणाओं की कमी: लोकल ट्रेनों में डिस्प्ले बोर्ड और घोषणाएं होती हैं, लेकिन लंबी दूरी की ट्रेनों में प्लेटफॉर्म पर या ट्रेन के अंदर यह जानकारी अक्सर नहीं मिलती कि अगला स्टॉप क्या है।
  • घबराहट में फैसला: “जब किसी व्यक्ति को अचानक पता चलता है कि ट्रेन उसके स्टेशन पर नहीं रुक रही है, तो वह घबराहट में चलती ट्रेन से उतरने की कोशिश करता है। उस समय उसका मानसिक संतुलन दांव पर होता है।”
  • यात्रियों को सलाह: यदि ट्रेन आपके स्टेशन पर नहीं रुकती है, तो चलती ट्रेन से कूदने के बजाय अगले स्टेशन तक प्रतीक्षा करें और वहां आवश्यक जुर्माना भरें। यह आपके और आपके परिवार के हित में है।

वंदे भारत मॉडल अपनाने का सुझाव

  • हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए रेलवे को अपनी पुरानी ट्रेनों में भी आधुनिक तकनीक अपनानी चाहिए।
  • घोषणा प्रणाली: जैसे वंदे भारत ट्रेनों में हर स्टेशन और सुरक्षा नियमों की घोषणा होती है, वैसा ही सिस्टम साधारण लंबी दूरी की ट्रेनों में भी हो।
  • पारदर्शिता: यात्रियों को पता होना चाहिए कि ट्रेन किस स्टेशन को स्किप (Skip) करने वाली है।

मामले का सारांश

रोहिदास कुमावत मनमाड से जलगांव के लिए गुवाहाटी एक्सप्रेस में सवार थे। उन्हें लगा कि जलगांव एक महत्वपूर्ण स्टेशन है तो ट्रेन वहां जरूर रुकेगी। जब ट्रेन वहां से गुजरने लगी, तो उतरने की कोशिश में वे गिर गए और उनके सिर व पैरों में गंभीर चोटें आईं। हाई कोर्ट ने उन्हें ‘सच्चा यात्री’ (Bona fide passenger) मानते हुए 12 सप्ताह के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

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