Monday, August 17, 2026
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Suicide Case: डांटना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं होता…सुप्रीम कोर्ट का छात्र पिटाई पर बड़ी टिप्पणी

Suicide Case: सुप्रीम कोर्ट ने एक छात्र की आत्महत्या के मामले में आरोपी शिक्षक को बरी कर दिया है।

मद्रास हाईकोर्ट का आदेश रद्द

जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा कि कोई सामान्य व्यक्ति यह नहीं सोच सकता कि डांटने से कोई छात्र आत्महत्या कर लेगा। कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में बरी करने से इनकार कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि किसी को डांटना आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा नहीं माना जा सकता। आरोपी स्कूल और हॉस्टल का प्रभारी था। उसने एक छात्र की शिकायत पर मृतक छात्र को डांटा था। इसके बाद छात्र ने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी थी।

यह मामला हस्तक्षेप के लायक: कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि यह मामला हस्तक्षेप के लायक है। बेंच ने कहा, जैसा कि अपीलकर्ता ने सही कहा है, कोई सामान्य व्यक्ति यह कल्पना नहीं कर सकता कि एक छात्र की शिकायत पर डांटने से इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी ने जो डांट लगाई थी, वह सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए थी कि शिकायत पर ध्यान दिया जाए और जरूरी सुधार किए जाएं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई इरादा (मेंस रिया) साबित नहीं होता। आरोपी की ओर से वकील ने कहा कि उसने एक अभिभावक की तरह छात्र को समझाया था ताकि वह दोबारा गलती न करे और हॉस्टल में शांति बनी रहे। आरोपी ने यह भी कहा कि उसका छात्र से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं था।

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