याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलीलें और आरोप
- शांतिपूर्ण विरोध के मौलिक अधिकार का हनन (Main Petition):
- मेनका गुरुस्वामी ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान चार पूर्व मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने और उनके आवासों से उठाए जाने को चुनौती दी है।
- उन्होंने दलील दी कि प्रिवेंटिव डिटेंशन का इस्तेमाल राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्रियों और संवैधानिक पदों पर रहे नेताओं के शांतिपूर्ण विरोध करने के मौलिक अधिकार (Right to Peaceful Protest) को दबाने के लिए नहीं किया जा सकता।
- अदालत के आदेश की अवमानना (Contempt Petition):
- एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और DMRC की अध्यक्ष डी. थारा के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है।
- याचिका में आरोप लगाया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर को ही स्पष्ट निर्देश दिया था कि प्रदर्शनों के नाम पर सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद न किया जाए, बल्कि नियंत्रित ढंग से चलाया जाए। इसके बावजूद शनिवार को दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद रखकर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की गई।
रविवार की सुनवाई का महत्व
सुप्रीम कोर्ट द्वारा छुट्टी के दिन (रविवार) विशेष सुनवाई आयोजित करना मामले की गंभीरता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के प्रति अदालत की संवेदनशीलता को दर्शाता है। जस्टिस बागची और जस्टिस मोहना की पीठ रविवार सुबह दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगी।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा शनिवार को आहूत विरोध-प्रदर्शनों, चार पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित शीर्ष विपक्षी नेताओं की एहतियातन हिरासत (Preventive Detention), संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) व 19(1)(b) के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार, तथा 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सार्वजनिक परिवहन को पूर्णतः बंद न करने के स्पष्ट आदेश के बावजूद दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के चलते दायर आपराधिक अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने असाधारण तत्परता दिखाई है।
शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन को देखते हुए रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को विशेष सुनवाई (Special Sunday Sitting) आयोजित करने का निर्णय लिया है। सर्वोच्च न्यायालय की दो-सदस्यीय विशेष पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं, रविवार को इस अति-संवेदनशील मामले पर तत्काल सुनवाई करेगी।
दोहरी न्यायिक चुनौतियां: मुख्य याचिका और अवमानना अर्जी
शीर्ष अदालत के समक्ष दो अलग-अलग अर्जियां एक साथ विचारार्थ प्रस्तुत की गई हैं:
1. विपक्षी नेताओं की हिरासत के खिलाफ वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की याचिका
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने शनिवार को दिल्ली पुलिस द्वारा की गई व्यापक धरपकड़ के खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- याचिका के मुख्य आधार:
- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान चार पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित विभिन्न विपक्षी नेताओं और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
- नेताओं को सड़कों से उठाने के साथ-साथ कई विपक्षी नेताओं को उनके सरकारी/निजी आवासों से ही एहतियातन हिरासत में ले लिया गया।
- याचिका में दलील दी गई कि निवारक निरोध (Preventive Detention) की असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक असंतोष और विरोध-प्रदर्शन के मौलिक अधिकार को कुचलने के लिए नहीं किया जा सकता, विशेषकर ऐसे नेताओं के खिलाफ जो संवैधानिक रूप से राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
2. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर अवमानना याचिका (Contempt of Court)
- अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना याचिका दायर की है।
- अवमानना का आधार:
- सुप्रीम कोर्ट की तीन-सदस्यीय पीठ ने 9 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट आदेश दिया था कि प्रदर्शनों के नाम पर दिल्ली आने वाली रेलगाड़ियों और मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद (Completely Stop) नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें नियंत्रित/विनियमित तरीके से चालू रखा जाए।
- इसके बावजूद, शनिवार को दिल्ली पुलिस और DMRC ने विरोध-प्रदर्शनों को रोकने के लिए कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को पूरी तरह बंद रखा, जिससे आम नागरिकों और यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
- कथित अवमाननाकर्ता (Contemnors):
- गोविंद मोहन — केंद्रीय गृह सचिव (Union Home Secretary)
- अनुराग कुमार — दिल्ली पुलिस आयुक्त (Delhi Police Commissioner)
- डी. थारा — अध्यक्ष, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC Chairperson)
विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
- संविधान का अनुच्छेद 21 एवं रविवार को विशेष सिटिंग की नजीर:
- भारतीय न्यायशास्त्र में व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सुनील बत्रा, मेनका गांधी, और अर्नब गोस्वामी मामलों में स्थापित किया गया है कि जहां अवैध हिरासत या मौलिक अधिकारों के हनन का प्रश्न हो, वहां अदालतें अवकाश के दिनों या मध्यरात्रि में भी विशेष पीठ बैठाकर न्यायिक उपचार प्रदान करने के लिए बाध्य हैं।
- निवारक निरोध (Preventive Detention) की वैधानिक सीमाएं:
- सर्वोच्च न्यायालय ने अनीता ठाकुर बनाम जम्मू-कश्मीर राज्य (2016) और शाहीन बाग फैसले (2020) में व्यवस्था दी है कि राज्य कानून-व्यवस्था के नाम पर शांतिपूर्ण विरोध को अपराध की तरह नहीं देख सकता। निवारक निरोध का उपयोग केवल सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) के गंभीर खतरे को टालने के लिए एक अपवाद स्वरूप किया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक असहमति को दबाने के प्रशासनिक औजार के रूप में।
- न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(b) व धारा 12:
- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक आदेशों की जानबूझकर अवज्ञा (Wilful Disobedience) सिविल अवमानना का स्पष्ट मामला बनाती है। प्रशासन को दिए गए विशिष्ट निर्देशों की अनदेखी कर मेट्रो स्टेशनों को बंद रखना प्रथम दृष्टया अदालती प्राधिकार की अवज्ञा माना जाएगा।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: *डॉ. मेनका गुरुस्वामी बनाम भारत संघ व अन्य [रिट याचिका (आपराधिक)] संयुक्त रूप से पठित शैलेंद्र मणि त्रिपाठी बनाम गोविंद मोहन व अन्य [अवमानना याचिका]
- विशेष पीठ: न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना (खंडपीठ)
- विशेष सुनवाई की तिथि: रविवार, 11 अक्टूबर 2026
- याचिकाकर्ता एवं विधिक प्रतिनिधि:
- वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद डॉ. मेनका गुरुस्वामी (स्वयं)
- अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी (अवमानना याचिकाकर्ता)
- प्रतिवादी/विपक्षी पक्षकार:
- दिल्ली पुलिस, केंद्रीय गृह मंत्रालय, DMRC
- व्यक्तिगत रूप से: केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार, डीएमआरसी चेयरपर्सन डी. थारा
- प्रासंगिक कानून एवं संवैधानिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 19(1)(b) (शांतिपूर्ण सभा), अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) एवं अनुच्छेद 32
- न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 की धाराएं 2(b) एवं 12
- दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की निवारक धाराएं
- वर्तमान स्थिति: सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने अर्जियों को तत्काल संज्ञान में लेते हुए रविवार को विशेष सिटिंग अधिसूचित की; दोनों मामलों पर कल सुबह विस्तृत सुनवाई होगी।
Sunday Hearing: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| विशेष पीठ | जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना |
| सुनवाई की तिथि | रविवार, 11 अक्टूबर 2026 (विशेष सत्र) |
| याचिकाकर्ता | वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी (नेताओं की हिरासत के खिलाफ) और एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी (अवमानना याचिका) |
| मुख्य बिंदु | शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19), नेताओं की नज़रबंदी और 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट आदेश के बावजूद मेट्रो स्टेशनों का बंद रहना। |

