Tone & Tenor With Advocates: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने न्यायिक शिष्टाचार और बार (Bar) एवं बेंच (Bench) के बीच संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है।
मामले का सारांश (Quick Highlights)
| विवरण | तथ्य |
| संबंधित न्यायालय | मुंसिफ कोर्ट, कटरा (ट्रायल कोर्ट)। |
| हाई कोर्ट की बेंच | जस्टिस राहुल भारती। |
| मुख्य विषय | बार और बेंच के बीच न्यायिक शिष्टाचार। |
| कोर्ट की टिप्पणी | जजों को वकीलों के प्रति अपनी भाषा और तेवर संयमित रखने चाहिए। |
| समाधान | मामले को समयबद्ध (30 मई तक) निपटाने का आदेश। |
कटरा के मुंसिफ जज को नसीहत दी गई
जस्टिस राहुल भारती की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायिक गरिमा का एक गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) पहलू यह है कि अदालत बार के साथ शिष्टता से पेश आए। कोर्ट ने कटरा के एक मुंसिफ जज को नसीहत देते हुए कहा कि न्यायाधीशों को वकीलों, विशेषकर वरिष्ठ वकीलों के साथ बात करते समय और आदेश लिखते समय अपने सुर (Tone) और व्यवहार (Tenor) में शालीनता और संयम बरतना चाहिए। यह मामला एक सिविल सूट से जुड़ा है जिसमें याचिकाकर्ताओं ने जमीन के विवाद को लेकर ‘अस्थायी निषेधाज्ञा’ (Temporary Injunction) की मांग की थी।
मामला क्या था?
- विलंब: याचिकाकर्ताओं का अंतरिम स्टे (Status Quo) का आवेदन अक्टूबर 2023 से लंबित था।
- विवादित आदेश: 4 अप्रैल, 2026 को मुंसिफ कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के बहस करने के अधिकार को यह कहते हुए बंद कर दिया कि उनके वकील समय पर उपस्थित नहीं हुए।
- जज का रवैया: हाई कोर्ट ने पाया कि मुंसिफ जज ने दोपहर 1:00 बजे ही अपना धैर्य खो दिया और आदेश पारित कर दिया, जबकि कोर्ट का समय शाम 4:30 बजे तक होता है। विशेषकर तब, जब वकील दूसरे शहर (Outstation) से आ रहे थे।
हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
- जस्टिस राहुल भारती ने अपने आदेश में न्यायाधीशों के आचरण पर गंभीर मार्गदर्शन दिया।
- न्यायिक गरिमा (Judicial Grace): “न्यायिक आचरण की मर्यादा और बार के प्रति संयमित व्यवहार न्यायिक गरिमा का एक ऐसा पहलू है जिससे समझौता नहीं किया जा सकता।”
- वरिष्ठता का सम्मान: कोर्ट ने कहा कि जब वरिष्ठ वकील, जिनके पास दशकों का अनुभव और अदालत व मुवक्किल के प्रति जिम्मेदारी का भाव है, वे पक्ष रख रहे हों, तो जज को अपने व्यवहार में अधिक शालीन होना चाहिए।
- आदेश में झलकता गुस्सा: बेंच ने कहा कि जज का मानसिक स्तर—चाहे वह उत्तेजित हो या संतुलित—उनके द्वारा पारित आदेश की भाषा (Text) से साफ झलक जाता है। जज को अपने आदेशों में ‘अति-गंभीर’ या ‘उग्र’ होने से बचना चाहिए।
समय से पहले थकान पर सवाल
हाई कोर्ट ने मुंसिफ जज द्वारा 1:00 बजे ही सुनवाई बंद करने पर हैरानी जताई। जज को दोपहर 1:00 बजे ही थकने (Exhausted) की कोई आवश्यकता नहीं थी, जबकि अदालत का समय 4:30 बजे तक था। उन्हें याचिकाकर्ता के वकील का इंतजार करना चाहिए था। कोर्ट ने माना कि जल्दबाजी में कार्यवाही बंद करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
हाई कोर्ट के निर्देश
- हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए मुंसिफ कोर्ट, कटरा को निर्देश दिए।
- डेडलाइन: अस्थायी निषेधाज्ञा (Temporary Injunction) के आवेदन पर 30 मई, 2026 तक अनिवार्य रूप से फैसला सुनाया जाए।
- प्राथमिकता: पहले मूल वाद और लिखित बयानों के आधार पर स्टे के आवेदन का निपटारा करें, उसके बाद ही अन्य तकनीकी आवेदनों (जैसे Order VIII Rule 9 के तहत जवाब दाखिल करना) पर विचार करें।
न्यायपालिका और बार का समन्वय
यह फैसला याद दिलाता है कि न्याय केवल आदेश पारित करने का नाम नहीं है, बल्कि वह प्रक्रिया भी उतनी ही गरिमापूर्ण होनी चाहिए। वकील और जज न्याय प्रणाली के दो पहिए हैं, और आपसी सम्मान ही इस प्रणाली की साख को बनाए रखता है।

