Friday, September 25, 2026
HomeScam NoseWhatsApp Hearing: ईडी छापों के दौरान शीर्ष IAS और स्टाफ को बंधक...

WhatsApp Hearing: ईडी छापों के दौरान शीर्ष IAS और स्टाफ को बंधक बनाकर रखने का आरोप; जानिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की रात 10 बजे व्हाट्सएप पर सुनवाई

हाईकोर्ट का आपातकालीन आदेश

  1. पंजाब सरकार का गंभीर आरोप: पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने कोर्ट को बताया कि ED मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के नाम पर पिछले दो दिनों से GMADA दफ्तर में छापेमारी कर रही थी। 22 सितंबर से आईएएस अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके घर जाने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें बंधक बनाकर रखा गया।
  2. हाईकोर्ट का त्वरित निर्देश (रात 10:42 बजे पारित आदेश):
    • वारंट ऑफिसर की नियुक्ति: हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को तुरंत एक वारंट ऑफिसर नियुक्त करने का आदेश दिया जो रात में ही GMADA परिसर और विकास गर्ग के कार्यालय का दौरा करे।
    • स्थिति का जायजा और रिपोर्ट: वारंट ऑफिसर को निर्देश दिया गया कि वे अधिकारियों की हिरासत की जांच करें और यह भी देखें कि क्या इन अधिकारियों या GMADA के खिलाफ कोई मूल अपराध (Predicate Offence) दर्ज है या नहीं।
    • महिला कर्मचारियों की रिहाई: आदेश दिया गया कि यदि कोई महिला कर्मचारी वहां अवैध रूप से रुकी हुई पाई जाती है तो उसे तुरंत जाने दिया जाए।
    • चंडीगढ़ पुलिस को सुरक्षा निर्देश: चंडीगढ़ पुलिस को निर्देश दिया गया कि वह वारंट ऑफिसर को पूर्ण सुरक्षा और सहायता प्रदान करे।
  3. तड़के 2:50 बजे दफ्तर में एंट्री: आदेश जारी होने के बाद वारंट ऑफिसर रात 2:50 बजे GMADA परिसर पहुंचे और तड़के 5:45 बजे वहां से बाहर निकले। वे आज दोपहर 2 बजे तक हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) द्वारा ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के दफ्तर में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की जा रही छापेमारी के दौरान पंजाब कैडर के शीर्ष आईएएस अधिकारियों और अन्य अधिकारियों को कथित रूप से ‘अवैध रूप से बंधक’ (Illegal Confinement) बनाए जाने के मामले में बुधवार रात असाधारण न्यायिक सक्रियता दिखाई।

न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ की एकल पीठ ने पंजाब सरकार द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर यह आपातकालीन सुनवाई की। राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि ईडी ने आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव आईएएस विकास गर्ग (IAS Vikas Garg), गमाडा के मुख्य प्रशासक आईएएस संदीप ऋषि (IAS Sandeep Reshi) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को 22 सितंबर 2026 से लगातार कार्यालय परिसर के भीतर बंधक बना रखा है और उन्हें घर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। अदालत ने रात 10:00 बजे व्हाट्सएप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आपातकालीन सुनवाई की और रात 10:42 बजे आदेश पारित करते हुए मौके पर तुरंत ‘वारंट ऑफिसर’ (Warrant Officer) नियुक्त कर भेजने का निर्देश दिया।

आपातकालीन सुनवाई और उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्देश

1. वारंट ऑफिसर की तत्काल नियुक्ति और परिसर का निरीक्षण

  • सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह तुरंत एक वारंट ऑफिसर नियुक्त करे जो गमाडा परिसर और प्रमुख सचिव (आवास एवं शहरी विकास विभाग) विकास गर्ग के कार्यालय का मौके पर जाकर निरीक्षण करे।
  • तथ्यात्मक जांच का दायरा: वारंट ऑफिसर को निर्देश दिया गया कि वह परिसर की समग्र स्थिति की जांच करे, जिसमें यह तथ्य भी शामिल है कि क्या गमाडा के अधिकारियों या स्वयं संगठन के खिलाफ कोई मूल अपराध (Predicate Offence / FIR) दर्ज है या नहीं।

2. महिला अधिकारियों की तत्काल रिहाई का निर्देश

  • अदालत ने वारंट ऑफिसर को स्पष्ट अधिकार दिया कि यदि परिसर में कोई भी महिला अधिकारी या कर्मचारी अवैध रूप से रोकी या बंधक पाई जाती है, तो उचित समझे जाने पर उसे तत्काल प्रभाव से रिहा कराया जाए।
  • वारंट ऑफिसर को आज (24 सितंबर 2026) दोपहर 2:00 बजे तक अपनी विस्तृत सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट उच्च न्यायालय के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया।

3. चंडीगढ़ पुलिस को सुरक्षा और समन्वय के निर्देश

  • उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ पुलिस को आदेश दिया कि वह वारंट ऑफिसर को आदेश के सुचारू अनुपालन हेतु पर्याप्त सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए।
  • आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अदालत का आदेश रात 10:42 बजे जारी होने के बाद वारंट ऑफिसर देर रात 2:50 बजे गमाडा परिसर में दाखिल हुए और सुबह 5:45 बजे तक निरीक्षण पूरा कर बाहर निकले।

Also Read; Condition In Bribery: वैध शुल्क से इतर सरकारी काम के लिए मांगा गया कोई भी पैसा रिश्वत ही माना जाएगा; ‘अतिरिक्त शुल्क’ शब्द का उपयोग यहां समझें

पंजाब सरकार के विधिक आरोप एवं दलीलें

  • 48 घंटे से बंधक बनाए रखने का आरोप: पंजाब राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी और अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) फेरी सोफत ने पीठ के समक्ष दलील दी कि ईडी की छापेमारी पिछले दो दिनों से जारी थी। अधिकारियों और कर्मचारियों को 22 सितंबर से न तो बाहर जाने दिया गया और न ही अपने परिजनों से मिलने या घर जाने की अनुमति दी गई, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता का खुला हनन है।
  • तलाशी और जब्ती बनाम अवैध हिरासत: राज्य सरकार ने तर्क दिया कि धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 17 के तहत ईडी को परिसरों की तलाशी और जब्ती (Search and Seizure) की शक्ति प्राप्त है, परंतु तलाशी की आड़ में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को बिना औपचारिक गिरफ्तारी या कानूनी प्रक्रिया के दिनों तक दफ्तर में कैद रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार का घोर उल्लंघन है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: पंजाब राज्य बनाम भारत संघ एवं अन्य [बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) – पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय]
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • पंजाब राज्य की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी (सहयोगी: अतिरिक्त महाधिवक्ता फेरी सोफत)
    • प्रतिवादी: भारत संघ, प्रवर्तन निदेशालय (ED)
  • प्रासंगिक कानून एवं धाराएं:
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 226 (बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट क्षेत्राधिकार) एवं अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण)
    • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 100 / पूर्ववर्ती CrPC धारा 97 एवं 98 (अनुचित रूप से बंद किए गए व्यक्तियों की खोज और रिहाई हेतु वारंट)
    • धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 17 (तलाशी व जब्ती) एवं धारा 19 (गिरफ्तारी की शर्तें)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
    • सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन (सुप्रीम कोर्ट) — ‘संवैधानिक न्यायालयों का दायित्व है कि वे गैर-कानूनी परिरोध या हिरासत की सूचना मिलते ही व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा हेतु असाधारण शक्तियों का प्रयोग करें।’
    • प्रवर्तन निदेशालय बनाम पंकज बंसल (2023, सुप्रीम कोर्ट) — ‘ईडी की शक्तियां बेलगाम नहीं हैं; जांच एजेंसियों को निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों के दायरे में रहकर ही काम करना होगा।’
  • पीठ: न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय)
  • सुनवाई समय: रात 10:00 बजे (व्हाट्सएप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग); आदेश पारित: रात 10:42 बजे

WhatsApp Hearing: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतपंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (P&H High Court)
एकल पीठ न्यायाधीशन्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ (Justice Sanjay Vashisht)
याचिकाकर्तापंजाब सरकार (State of Punjab v. Union of India & Ors.)
आरोपी एजेंसीप्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED)
प्रभावित अधिकारीIAS विकास गर्ग (प्रमुख सचिव), IAS संदीप ऋषि और GMADA के अन्य वरिष्ठ अधिकारी
हाईकोर्ट का त्वरित कदमवारंट ऑफिसर नियुक्त कर GMADA दफ्तर की रात 2:50 बजे भौतिक जांच कराई गई
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
23.1 ° C
23.1 °
23.1 °
94 %
10kmh
100 %
Fri
27 °
Sat
30 °
Sun
32 °
Mon
31 °
Tue
33 °

Recent Comments