Friday, September 25, 2026
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Young Advocate: AIBE पास किए बिना वकालत करना अवैध; बार काउंसिल 2021 के बाद नामांकित ऐसे वकीलों की पहचान कर सूची प्रकाशित करे और जिला अदालतों को भेजे

हाईकोर्ट का मुख्य आदेश और निर्देश

  1. 2021 के बाद की सूची का अपडेशन: कोर्ट ने 19 अगस्त को पहले ही 2010 से 2021 के बीच नामांकित उन 1,157 वकीलों की सूची प्रकाशित करने का निर्देश दिया था जिन्होंने AIBE पास नहीं किया। अब कोर्ट ने भविष्य के मामलों और 2021 के बाद के चूककर्ताओं के लिए आदेश दिया:“भविष्य में ऐसी घटनाओं के प्रभाव को देखते हुए, बार काउंसिल ऑफ केरल 2021 के बाद से ऐसे अधिवक्ताओं की सूची आठ सप्ताह के भीतर अपडेट करेगी और नियमित रूप से इसकी समीक्षा करेगी।” — केरल हाईकोर्ट
  2. बिना AIBE वकीलों के वकालतनामा पर रोक: रजिस्ट्री और जिला अदालतों को कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे किसी भी वकील द्वारा दायर किए गए वकालतनामा (Vakalatnama) को स्वीकार या पंजीकृत न करें जिन्होंने AIBE पास नहीं किया है।
  3. CoP प्राप्त करने की छूट: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन वकीलों ने इस बीच AIBE की परीक्षा पास कर ली है, वे बार काउंसिल के समक्ष अपने प्रैक्टिस सर्टिफिकेट (Certificate of Practice) के लिए आवेदन कर सकते हैं और उनका नाम सूची से हटा दिया जाएगा।
  4. जिला न्यायपालिका को भेजी जाएगी सूची: अंतिम सूची प्रकाशित कर रजिस्ट्रार (जिला न्यायपालिका) को भेजी जाएगी, जो इसे केरल की सभी जिला अदालतों और बार एसोसिएशनों में कार्रवाई के लिए प्रसारित करेंगे।

मामले की पृष्ठभूमि: जनहित याचिका (PIL) कैसे दायर हुई?

यह याचिका एक आम नागरिक अमरनाथ जोशी सुरेंधिरन द्वारा दायर की गई थी। एक पारिवारिक अदालत (Family Court) में अपने वैवाहिक विवाद के दौरान याचिकाकर्ता को पता चला कि दूसरी ओर से पेश हो रहे वकील ने AIBE पास ही नहीं किया है और उसके पास वैध CoP नहीं है। इसके बाद उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत जानकारी निकाली और पाया कि सैकड़ों लोग बिना परीक्षा पास किए प्रैक्टिस कर रहे हैं, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की।

कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय बार परीक्षा (All India Bar Examination – AIBE) उत्तीर्ण किए बिना और वैध ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ (Certificate of Practice – CoP) प्राप्त किए बिना अदालतों में अनधिकृत रूप से वकालत करने के मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ केरल (Bar Council of Kerala – BCK) को निर्देश दिया है कि वह वर्ष 2021 के बाद नामांकित ऐसे सभी अधिवक्ताओं की पहचान करे जिन्होंने AIBE परीक्षा पास नहीं की है, और 8 सप्ताह के भीतर उनकी आधिकारिक सूची तैयार कर सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करे।

केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने अमरनाथ जोशी सुरेन्द्रन द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) का निस्तारण करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल को अपने रिकॉर्ड का नियमित पुनरीक्षण (Periodic Review) जारी रखना होगा ताकि कानूनी पेशे की वैधानिक मर्यादा और पक्षकारों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

उच्च न्यायालय के प्रमुख अवलोकन एवं विस्तृत निर्देश

1. 2021 के बाद के मामलों की पहचान और 8 सप्ताह की समय-सीमा बार काउंसिल ऑफ केरल द्वारा 19 अगस्त के पूर्व आदेश के अनुपालन में दाखिल हलफनामे पर विचार करने के बाद खंडपीठ ने भविष्य के जोखिमों को रेखांकित करते हुए निर्देश दिया: “यदि भविष्य में ऐसी घटनाएं घटित होती हैं, और वर्ष 2021 के बाद उत्पन्न होने वाले मामलों के संबंध में भी उत्पन्न होने वाले गंभीर परिणामों को ध्यान में रखते हुए, बार काउंसिल ऑफ केरल आज से आठ सप्ताह के भीतर 2021 के बाद के ऐसे अधिवक्ताओं की सूची को अद्यतन (Update) करेगी और यह समीक्षा लगातार जारी रखेगी कि क्या अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) उत्तीर्ण करने में कोई चूक या डिफ़ॉल्ट हुई है।”

2. जिला न्यायपालिका और अदालती रजिस्ट्रियों को सूची भेजने का आदेश

  • खंडपीठ ने बार काउंसिल को निर्देश दिया कि वह 2021 के बाद की अद्यतन सूची को प्रकाशित करे और उसे रजिस्ट्रार (जिला न्यायपालिका) को सौंपे।
  • इसके बाद रजिस्ट्रार उक्त सूची को केरल के सभी जिला न्यायाधीशों को अग्रेषित करेंगे ताकि संबंधित जिला अदालतें, अधीनस्थ न्यायालय और न्यायाधिकरण ऐसे वकीलों द्वारा वकालतनामा पेश किए जाने पर रोक लगाने हेतु तत्काल आवश्यक प्रशासनिक कदम उठा सकें।

3. परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके वकीलों के लिए स्पष्टीकरण

  • उच्च न्यायालय ने साथ ही यह स्पष्ट किया कि जिन अधिवक्ताओं ने इस बीच AIBE परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है, वे बार काउंसिल के समक्ष अपने आवश्यक प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर नियमानुसार ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ (Certificate of Practice – CoP) जारी करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे अधिवक्ताओं को वैध CoP प्राप्त होते ही पुनः नियमित वकालत का अधिकार प्राप्त होगा।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं 19 अगस्त का ऐतिहासिक पूर्व आदेश

  • पारिवारिक विवाद से हुआ खुलासा: याचिकाकर्ता अमरनाथ जोशी सुरेन्द्रन ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अदालत को बताया कि जब वे एक पारिवारिक अदालत (Family Court) में अपने वैवाहिक विवाद की पैरवी कर रहे थे, तब उन्हें पता चला कि विपक्षी पक्षकार की ओर से पेश वकील ने न तो AIBE परीक्षा उत्तीर्ण की थी और न ही उनके पास वैध CoP था।
  • RTI से खुलासा: याचिकाकर्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत बार काउंसिल ऑफ केरल से विवरण मांगा, जिसमें बड़े पैमाने पर अधिवक्ताओं द्वारा बिना परीक्षा पास किए वकालत जारी रखने का सनसनीखेज खुलासा हुआ।
  • 19 अगस्त 2026 का सख्त आदेश (1,157 वकीलों पर कार्रवाई):
    • पूर्व की सुनवाई में उच्च न्यायालय ने पाया था कि वर्ष 2010 से 2021 के बीच राज्य बार काउंसिल में नामांकित 1,157 अधिवक्ताओं ने AIBE परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी।
    • अदालत ने बार काउंसिल को इन सभी 1,157 वकीलों के नाम सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करने का आदेश दिया था।
    • साथ ही, सभी अदालती रजिस्ट्रियों को निर्देश दिया गया था कि वे उन मुकदमों या मामलों को पंजीकृत (Register) न करें जिनमें इन डिफ़ॉल्टर अधिवक्ताओं ने वकालतनामा दाखिल किया हो।

विधिक महत्व एवं कानूनी ढांचा

  • अधिवक्ता अधिनियम और बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स: बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य बार काउंसिल में अनंतिम नामांकन (Provisional Enrolment) प्राप्त करने के बाद संबंधित वकील को दो वर्ष के भीतर AIBE परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होता है। यदि निर्धारित समय में परीक्षा पास नहीं की जाती है, तो नामांकन स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है और अदालत में उपस्थित होने, बहस करने या वकालतनामा दाखिल करने का विधिक अधिकार समाप्त हो जाता है।
  • मुवक्किलों के अधिकारों का संरक्षण: अदालत ने रेखांकित किया कि अप्रशिक्षित या अपात्र वकीलों द्वारा मुकदमों की पैरवी करना वादकारियों (Litigants) के साथ गंभीर अन्याय है और यह न्याय प्रशासन की गुणवत्ता पर सीधा आघात करता है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: अमरनाथ जोशी सुरेन्द्रन बनाम सचिव, बार काउंसिल ऑफ केरल एवं अन्य [W.P.(C) / PIL – केरल उच्च न्यायालय]
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ता: अमरनाथ जोशी सुरेन्द्रन (व्यक्तिगत रूप से उपस्थित)
    • केरल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (KeLSA) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष मैथ्यू (निर्देशन: अधिवक्ता शिंटो मैथ्यू अब्राहम)
    • बार काउंसिल ऑफ केरल (BCK) की ओर से: अधिवक्ता पी. रामकृष्णन
    • बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की ओर से: अधिवक्ता रजित
    • केरल राज्य की ओर से: वरिष्ठ सरकारी प्लीडर बीजू मीनात्तूर
  • प्रासंगिक कानून एवं सांविधिक नियम:
    • अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) की धारा 24, 29, 30 एवं धारा 35
    • बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया (सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015
    • ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन रूल्स
  • संबद्ध ऐतिहासिक न्यायिक नजीरें:
    • बार काउंसिल ऑफ इंडिया बनाम बोनी एफओआई (2023, सुप्रीम कोर्ट 5-जज संविधान पीठ) — ‘सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा वकालत शुरू करने से पहले या बाद में AIBE परीक्षा आयोजित करने की वैधानिक शक्ति को वैध ठहराया; CoP के बिना नियमित वकालत का कोई अधिकार नहीं है।’
  • पीठ: मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. (केरल उच्च न्यायालय)
  • निर्णय स्थिति: याचिका निस्तारित (Disposed of) – बार काउंसिल ऑफ केरल को 8 सप्ताह के भीतर 2021 के बाद की सूची प्रकाशित कर जिला अदालतों को तामील कराने का आदेश।

Young Advocate: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतकेरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court)
पीठ के न्यायाधीशमुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन एवं न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम.
याचिकाकर्ताअमरनाथ जोशी सुरेंधिरन (In Person)
संबंधित मामलाAmarnath Joshi Surendiran v. Secretary, Bar Council of Kerala & Ors. (PIL)
पूर्व का निर्देश2010 से 2021 के बीच नामांकित 1,157 वकीलों की सूची जारी करना जिन्होंने AIBE पास नहीं किया था
नया निर्देश2021 के बाद के मामलों की पहचान कर 8 सप्ताह में सूची अपडेट करना और जिला अदालतों को भेजना
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