सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश (Key Directions)
- 1. पेंडिंग चालान वाले वाहनों को ज़ब्त (Impound) करने का निर्देश:अदालत ने कहा कि पुलिस का केवल लाखों ई-चालान जारी करना काफी नहीं है जब तक कि उस जुर्माने की वसूली सुनिश्चित न हो। कोर्ट ने रैंडम चेकिंग करके चालान न भरने वाली गाड़ियों को मौके पर ही ज़ब्त करने के आदेश दिए हैं।
- 2. परिवहन (Parivahan) पोर्टल की सेवाएं पूरी तरह फ्रीज:बकाया चालान जमा न करने तक वाहन मालिकों को निम्नलिखित सेवाओं से वंचित किया जाएगा:
- RC सेवाएं बंद: रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) का नवीनीकरण (Renewal) और डुप्लीकेट RC जारी करना बंद होगा।
- मालिकाना हक स्थानांतरण (Ownership Transfer): पेंडिंग चालान रहने तक गाड़ी बेचना या नाम ट्रांसफर करना ब्लॉक रहेगा।
- फिटनेस और PUC सर्टिफिकेट पर रोक: फिटनेस प्रमाण पत्र और पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट जारी करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
- ब्लैकलिस्टिंग: बकाया चालान वाले वाहनों को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
- 3. ड्राइविंग लाइसेंस (DL) का निलंबन:बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूअल पर रोक लगाई जाएगी और सक्रिय लाइसेंस को निलंबित (Suspend) करने के कदम उठाए जाएंगे।
- 4. AI आधारित इलेक्ट्रॉनिक निगरानी (AI-Based Enforcement):राज्यों और NHAI को निर्देश दिया गया है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR) की धारा 167A(3) के तहत AI-सक्षम कैमरे और सेंसर लगाए जाएं जो 12 श्रेणियों के नियमों के उल्लंघन को स्वचालित रूप से पकड़कर ई-चालान जारी कर सकें।
- 5. मासिक सार्वजनिक डैशबोर्ड (Monthly Public Dashboard):सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को एक ऑनलाइन पब्लिक डैशबोर्ड बनाने का निर्देश दिया गया है जो हर महीने अपडेट होगा। इसमें राज्यों और नेशनल हाईवे कॉरिडोर के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस उपकरणों की स्थिति और जारी चालानों का ब्योरा प्रदर्शित किया जाएगा।
नई दिल्ली: देश भर में यातायात नियमों के उल्लंघन, सड़क सुरक्षा मानकों की अनदेखी और इलेक्ट्रॉनिक चालान (e-Challan) जारी होने के बाद भी ₹23,000 करोड़ से अधिक के भारी-भरकम जुर्माने के बकाए पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कठोर व दंडात्मक निर्देश जारी किए हैं।
शीर्ष अदालत ने दो-टूक टिप्पणी की कि पुलिस द्वारा लाखों ई-चालान जारी करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता यदि अधिकारी उन जुर्मानों की प्रभावी वसूली सुनिश्चित न कर सकें। अदालत ने निर्देश दिया कि जब तक बकाया जुर्माना पूरी तरह चुकता न हो जाए, तब तक ऐसे वाहनों की ‘वाहन/परिवहन पोर्टल’ पर सभी ऑनलाइन सेवाएं तुरंत फ्रीज (Freeze) कर दी जाएं, वाहन का स्वामित्व अंतरण (Ownership Transfer), आरसी नवीनीकरण, डुप्लीकेट आरसी और फिटनेस प्रमाण पत्र रोक दिया जाए, तथा किसी भी केंद्र को ऐसे वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) जारी करने की अनुमति न दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (States/UTs) को आदेश दिया है कि वे बकाया ई-चालान वाले वाहनों की रैंडम चेकिंग कर उन्हें मौके पर ही जब्त (Impound) करने की सख्त कार्रवाई करें।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख विधिक निर्देश एवं न्यायिक टिप्पणियां
1. ‘लाखों ई-चालान काटने का क्या फायदा जब वसूली ही नहीं हो रही?’
सर्वोच्च अदालत ने सड़क सुरक्षा निगरानी मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासन की निष्क्रियता पर तल्ख टिप्पणी दर्ज की: “अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को केवल ई-चालान जारी करते रहना ही पर्याप्त नहीं है। पुलिस ऐसे हजारों और लाखों ई-चालान जारी कर सकती है, परंतु मूल प्रश्न यह है कि उन ई-चालानों के माध्यम से लगाया गया जुर्माना वसूला कैसे जाए? हम यह निर्देश देते हैं कि वाहनों की रैंडम चेकिंग (Random Checking) की जाए और यदि यह पाया जाता है कि जारी किए गए ई-चालान का भुगतान नहीं किया गया है या उसका पालन नहीं हुआ है, तो उस वाहन को तुरंत जब्त (Impound) करने के आवश्यक कदम उठाए जाएं।”
2. ₹23,000 करोड़ से अधिक का जुर्माना बकाया (आधिकारिक आंकड़े):
सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में लाया गया कि देश भर में जारी किए गए ई-चालानों के तहत कुल ₹49,194.05 करोड़ की वसूली की जानी थी, जिसमें से अब तक मात्र ₹26,175.05 करोड़ की ही वसूली हो सकी है। यानी देश भर में लगभग ₹23,019 करोड़ का भारी-भरकम ट्रैफिक जुर्माना अभी भी अनसुलझा और बकाया पड़ा है।
3. मौजूदा अदालती वसूली तंत्र की विफलता:
अदालत ने रेखांकित किया कि ई-चालानों को वसूली के लिए क्षेत्राधिकार वाली मजिस्ट्रेट अदालत (Jurisdictional Court) में भेजने की पारंपरिक कानूनी व्यवस्था इतने विशाल पैमाने पर लंबित चालानों को देखते हुए पूरी तरह अपर्याप्त और अक्षम साबित हुई है, इसलिए कड़े प्रशासनिक उपाय आवश्यक हैं।
4. अधिकारियों को सख्त चेतावनी: “हम अनिश्चितकाल तक निर्देश जारी करते रह सकते हैं, परंतु यदि ये सभी निर्देश केवल कागजों पर ही सिमटे रहेंगे और अंततः जमीनी स्तर पर लागू नहीं किए जाएंगे, तो एक दिन हमें ऐसी सख्त कार्रवाई करनी पड़ सकती है जो अधिकारियों को कतई पसंद नहीं आएगी।”
डिफॉल्टर वाहनों पर लगाए गए कड़े प्रतिबंध (सर्वोच्च अदालत का आदेश)
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक वाहन मालिक द्वारा लंबित चालान की पूरी राशि का भुगतान नहीं कर दिया जाता, तब तक निम्नलिखित दंडात्मक उपाय तुरंत लागू होंगे:
| श्रेणी / सेवा | अदालती रोक एवं विधिक कार्रवाई |
| रैंडम चेकिंग में जब्ती (Impounding) | सड़क पर जांच के दौरान बकाया चालान पाए जाने पर वाहन को तुरंत जब्त/कब्जे में लिया जाएगा। |
| परिवहन पोर्टल पर ऑनलाइन सेवाएं | वाहन से जुड़ी सभी डिजिटल सेवाएं तत्काल प्रभाव से पूरी तरह फ्रीज (Freeze) रहेंगी। |
| आरसी (RC) नवीनीकरण व डुप्लीकेट | पंजीकरण प्रमाण पत्र के नवीनीकरण, डुप्लीकेट आरसी जारी करने या पते में बदलाव पर पूर्ण प्रतिबंध। |
| स्वामित्व अंतरण (Ownership Transfer) | वाहन को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने या ट्रांसफर करने पर रोक (वाहन बिक्री अवरुद्ध होगी)। |
| फिटनेस व ब्लैकलिस्टिंग | बकाया क्लीयर होने तक फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं दिया जाएगा और पोर्टल पर वाहन को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। |
| प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) पर रोक | किसी भी प्रदूषण जांच केंद्र (PUC Center) को ऐसे वाहन के लिए पीयूसी जारी करने की अनुमति नहीं होगी। |
| ड्राइविंग लाइसेंस (DL) का निलंबन | बार-बार उल्लंघन (Multiple Violations) करने वाले चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक और मौजूदा लाइसेंस को निलंबित करने की कार्रवाई। |
अदालत के अन्य महत्वपूर्ण नीतिगत एवं तकनीकी निर्देश
1. एआई-आधारित इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन (AI-Enabled Electronic Enforcement):
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और अन्य सड़क स्वामित्व वाली एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि वे सुनिश्चित करें कि स्थापित इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणालियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युक्त हों।
- यह सिस्टम केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 के नियम 167A(3) के तहत निर्दिष्ट सभी 12 श्रेणियों के उल्लंघनों (जैसे ओवर-स्पीडिंग, रेड लाइट जंप, सीटबेल्ट/हेलमेट न लगाना, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल उपयोग आदि) को स्वतः पहचानने और ई-चालान बनाने में सक्षम हों।
2. राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा प्रणाली और डेटा एकीकरण (Interoperable Integration):
- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के 28 अक्टूबर 2025 के एसओपी (SOP) के क्रियान्वयन के तहत एनसीआरबी के अक्टूबर 2023 के कॉन्सेप्ट पेपर की सिफारिशों को शामिल करने का निर्देश दिया गया।
- इसके तहत मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A को सुदृढ़ करते हुए ‘राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा प्रणाली’ (National Road Safety System) स्थापित करने तथा VAHAN-4, SARATHI, e-Challan, e-DAR, IRAD और राज्य/केंद्रीय ट्रैफिक कंट्रोल रूम के बीच रीयल-टाइम डेटा साझाकरण के लिए अंतर-प्रचालनीय एकीकरण (Interoperable Integration) अनिवार्य किया गया।
3. मासिक सार्वजनिक ऑनलाइन डैशबोर्ड (Public Online Dashboard):
- पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए MoRTH को एक सार्वजनिक पोर्टल/डैशबोर्ड स्थापित करने का निर्देश दिया गया।
- यह डैशबोर्ड राज्यवार और राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर-वार जानकारी देगा कि:
- कितने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चालू हालत में हैं।
- किन श्रेणियों के उल्लंघनों की निगरानी की जा रही है।
- पकड़े गए उल्लंघनों के मुकाबले कितने ई-चालान जनरेट हुए।
- इस डैशबोर्ड को प्रति माह कम से कम एक बार अपडेट किया जाएगा और वार्षिक आंकड़े MoRTH की आधिकारिक “Road Accidents in India” रिपोर्ट का हिस्सा बनेंगे।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: डॉ. एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ व अन्य [रिट याचिका (सिविल) संख्या 295/2012 – भारत का सर्वोच्च न्यायालय] (2026 LiveLaw (SC) 1007)
- पीठ: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन
- आदेश की तिथि: 28 सितंबर 2026
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988):
- धारा 136A (राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और शहरी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और प्रवर्तन)
- धारा 206 एवं 207 (दस्तावेजों को जब्त करने तथा बिना परमिट/लाइसेंस/अनदेखी वाले वाहनों को जब्त व निरुद्ध करने की पुलिस शक्ति)
- धारा 190(2) एवं सुसंगत दंडात्मक प्रावधान
- केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 (CMVR, 1989):
- नियम 167A (इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और ई-चालान जारी करने की तकनीकी प्रक्रिया व 12 अपराध श्रेणियां)
- संशोधित नियम 21(25) (एक वर्ष के भीतर 5 या अधिक बार मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन करने पर सार्वजनिक उपद्रव/खतरे के रूप में लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई)
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 21 (सड़क सुरक्षा और सुरक्षित आवागमन का अधिकार जीवन के मौलिक अधिकार का अंग) तथा अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय हेतु असाधारण दिशानिर्देश)
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988):
- संबद्ध ऐतिहासिक न्यायिक नजीरें:
- एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ (2014 & 2018, सुप्रीम कोर्ट) — ‘सड़क सुरक्षा कानूनों को महज कागजों पर लागू नहीं छोड़ा जा सकता; शीर्ष अदालत की न्यायमूर्ति राधाकृष्णन समिति के माध्यम से सतत निगरानी।’
- एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (सुप्रीम कोर्ट) — ‘प्रदूषण फैलाने वाले और मोटर वाहन मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध लगाना राज्य का अनिवार्य विधिक दायित्व है।’
- वर्तमान स्थिति: सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और MoRTH को रैंडम चेकिंग में वाहन जब्ती, ऑनलाइन सेवाओं को फ्रीज करने, एआई निगरानी लागू करने और मासिक डैशबोर्ड संचालित करने का बाध्यकारी निर्देश।
E-Challan:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन |
| मुख्य मुद्दा | देश में लाखों लंबित ई-चालान और अनसुनी की जा रही जुर्माना वसूली |
| बकाया राशि | कुल जारी चालान: ₹49,194.05 करोड़ | बकाया/लंबित राशि: लगभग ₹23,019 करोड़ |
| प्रमुख आदेश | वाहनों की ज़ब्ती, परिवहन पोर्टल पर सेवाएं फ्रीज, ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन |

