मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति डी. एन. राय |
| मुख्य आरोपी अधिकारी | राजदीपसिंह नाकुम (DCP, सूरत) |
| मामला | पुलिस हिरासत/अभिरक्षा में सार्वजनिक रूप से मारपीट और हथकड़ी लगाकर घुमाना (Suo Motu PIL) |
| कोर्ट का आदेश | निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी का तत्काल स्थानांतरण किया जाए। |
Cop’s Transfer Over Torture: गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने सूरत में आरोपियों को सरेआम पीटने और हथकड़ी लगाकर घुमाने (Public Parading) के मामले में राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल (Chief Justice Sunita Agarwal) और न्यायमूर्ति डी. एन. राय (Justice D N Ray) की पीठ सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu PIL) लेते हुए सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कहा कि जब तक संबंधित वरिष्ठ IPS अधिकारी (DCP राजदीपसिंह नाकुम) का ट्रांसफर नहीं किया जाता, तब तक इस मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश
- जांच की निष्पक्षता के लिए ट्रांसफर जरूरी:“कम से कम आपको उन्हें स्थानांतरित (Transfer) करना ही होगा। यदि वह अधिकारी वहीं तैनात रहेगा तो अन्य पुलिसकर्मी जो उस घटना के समय मौजूद थे, गवाही देने या सच बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे। एक निष्पक्ष जांच के लिए उनका वहां से हटना अनिवार्य है।”
- घटना से इनकार संभव नहीं:
- सरकारी वकील द्वारा जांच रिपोर्ट का इंतजार करने के अनुरोध पर पीठ ने कहा कि घटना सार्वजनिक स्थान पर हुई है और सभी ने इसके वीडियो देखे हैं। घटना घटने से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए अधिकारी का ट्रांसफर प्राथमिक और न्यूनतम कदम है।
मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- घटना: एडवोकेट उत्कर्ष दवे द्वारा मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र के अनुसार, सूरत के DCP राजदीपसिंह नाकुम और 15-20 पुलिसकर्मियों का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें हथकड़ी लगे आरोपियों को सार्वजनिक सड़कों पर घुमाया जा रहा था, उनके बाल खींचकर लाठियों और थप्पड़ों से पिटाई की जा रही थी।
- संवैधानिक उल्लंघन: याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 तथा डी. के. बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों का घोर उल्लंघन बताया गया।
- गुजरात पुलिस का सर्कुलर: वरिष्ठ अधिवक्ता मेघा जानी ने 12 मई 2024 के गुजरात पुलिस सर्कुलर का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी भी आरोपी को सार्वजनिक रूप से घुमाना, बैठक लगवाएं, घुटनों के बल चलाना, थप्पड़ या लाठी मारना या सार्वजनिक रूप से अपमानित करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
आगे की कार्रवाई
राज्य सरकार के प्रतिनिधि ने अदालत को आश्वासन दिया कि हाई कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों और निर्देशों के आधार पर उचित कदम उठाए जाएंगे तथा अगली सुनवाई (अगले शुक्रवार) तक अपडेट प्रस्तुत किया जाएगा।

