Elevator Operator: मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति आलोक अराधे |
| पक्षकार | M/s OTIS Elevator Company (India) Ltd बनाम रश्मि हांडा एवं अन्य |
| मुआवजा राशि | ₹3,01,48,195 (9% वार्षिक ब्याज के साथ) |
| अंतिम निर्णय | OTIS (70%), MES (25%) और RAW (5%) की संयुक्त जिम्मेदारी बरकरार; निष्पादन (Execution) प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश। |
Elevator Operator: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने एक ऐतिहासिक फैसले में माना है कि एलिवेटर (लिफ्ट) के निर्माता (Manufacturers), ऑपरेटर (Operators) और मालिक (Owners) लिफ्ट में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए संयुक्त और पृथक रूप से (Jointly and Severally) जिम्मेदार हैं।
कोर्ट ने कहा कि आधुनिक शहरी जीवन में लिफ्ट एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है, इसलिए इसका संचालन और रखरखाव करने वालों का कर्तव्य “कॉमन कैरियर्स” (Common Carriers – जैसे सार्वजनिक परिवहन प्रदाता) की तरह ‘उच्चतम स्तर की सतर्कता’ (Heightened Duty of Care) बरतने का है।
न्यायालय ने लिफ्ट निर्माण एवं रखरखाव कंपनी M/s OTIS Elevator Company (India) Ltd की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के फैसले को चुनौती दी गई थी। NCDRC ने 2003 में हुए एक घातक लिफ्ट हादसे में वरिष्ठ RAW अधिकारी की मौत के लिए OTIS, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) को दोषी ठहराया था।
Elevator Operator:अदालत के मुख्य कानूनी सिद्धांत (Key Legal Principles)
- उपभोक्ताओं पर जवाबदेही तय करने का बोझ नहीं:
- दुर्घटना का शिकार हुए उपभोक्ताओं या पीड़ितों पर यह साबित करने की जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती कि संयुक्त दोषियों (Joint Tortfeasors) में से किसकी कितनी गलती थी।
- कोर्ट पहली बार में पीड़ित की क्षति का आकलन कर तुरंत मुआवजा दिलाएगा, और बाद में दोषियों के संविदात्मक संबंधों के आधार पर उनकी देयता (Liability) का अनुपात तय करेगा।
- उच्चतम सतर्कता का दायरा (Heightened Duty of Care):“जो पक्ष किसी ऐसी मशीन के व्यापक रखरखाव (Comprehensive Maintenance) का जिम्मा लेता है, जो एक वाहन की प्रकृति की है, उसका अपने उपयोगकर्ताओं के प्रति उच्चतम स्तर का देखभाल/सुरक्षा कर्तव्य बनता है।”
Elevator Operator: हादसा और NCDRC का मुआवजा आदेश
- घटना (2003): 20 मार्च 2003 को एक बैठक के बाद 13 लोगों को ले जा रही लिफ्ट के नीचे आते समय तकनीकी खराबी के कारण वरिष्ठ RAW अधिकारी की गर्दन कुचलने से मृत्यु हो गई थी।
- NCDRC का निर्णय: 2014 में NCDRC ने मृतक अधिकारी की पत्नी (रश्मि हांडा) और दो बच्चों को ₹3,01,48,195 (3.01 करोड़ रुपये) का मुआवजा 9% वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था।
- देयता का विभाजन (Apportionment of Liability)
- OTIS: 70% जिम्मेदारी (मुख्य दोषी – बार-बार शिकायतों के बावजूद लिफ्ट ठीक न करने और स्टेबलाइजर न लगाने के कारण)।
- MES: 25% जिम्मेदारी (निगरानी और रखरखाव रजिस्टर न रखने के कारण)।
- RAW: 5% जिम्मेदारी।
Elevator Operator:सुप्रीम कोर्ट ने OTIS को मुख्य दोषी क्यों माना?
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा (Justice P S Narasimha) और न्यायमूर्ति आलोक अराधे (Justice Alok Aradhe) की पीठ ने OTIS के मुख्य तर्कों को खारिज करते हुए 70% की जिम्मेदारी बरकरार रखी:
- लगातार खराबी का रिकॉर्ड: दुर्घटना से ठीक पहले (अप्रैल से अगस्त 2002) MES ने OTIS को ‘लिफ्ट नंबर 6’ के बार-बार बंद होने और असामान्य आवाज की लिखित शिकायतें भेजी थीं। इसके बावजूद OTIS ने खराबी को दूर नहीं किया।
- मैनुअल ब्रेक रिलीज (Brake Release Key) का तर्क खारिज: OTIS ने तर्क दिया था कि MES कर्मचारियों द्वारा मैन्युअल रूप से ब्रेक रिलीज करने के कारण हादसा हुआ। कोर्ट ने कहा कि ब्रेक रिलीज करने की नौबत ही इसलिए आई क्योंकि OTIS द्वारा खराबी न सुधारने के कारण लिफ्ट बीच में अटक गई थी।
- प्रशिक्षण का अभाव: केवल लिफ्ट में चेतावनी वाले स्टिकर चिपका देने से कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। OTIS यह साबित करने में विफल रही कि उसने आपातकालीन स्थिति में बचाव के लिए RAW या MES कर्मचारियों को कोई प्रशिक्षण दिया था।

