Sunday, October 4, 2026
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Consecutive Sentences: पेपर लीक मामले में संपत्ति जब्ती और लगातार सजा की मांग…आरोपियों पर एक सजा खत्म हो तब चले दूसरे धारा की तय सजा

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति आलोक अराधे (Bar and Bench)
याचिकाकर्ताएडवोकेट और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय
मुख्य मांगेंPMLA/Benami Act के तहत संपत्ति जब्त करना, लगातार सजा का प्रावधान, विधि आयोग द्वारा समीक्षा।
अगली तारीख25 सितंबर 2026

Consecutive Sentences: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने परीक्षा पेपर लीक के मामलों में शामिल अपराधियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने और उन्हें लगातार (Consecutive) सजा देने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा (Justice PS Narasimha) और न्यायमूर्ति आलोक अराधे (Justice Alok Aradhe) की पीठ ने यह आदेश अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ एवं अन्य (Ashwini Kumar Upadhyay v. Union of India & Ors.) मामले में दिया है।

Consecutive Sentences: याचिका की मुख्य मांगें और तर्क

  • संपत्तियों का आकलन एवं जब्ती
    • याचिका में मांग की गई है कि पेपर लीक में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल आरोपियों और उनके परिजनों की पूरी संपत्ति का आकलन किया जाए।
    • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act), धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम और ब्लैक मनी एक्ट के तहत उनकी चल-अचल संपत्तियों को जब्त (Confiscate) किया जाए।
  • सजा लगातार चले (Consecutive Sentences)
    • पेपर लीक के दोषियों को मिलने वाली सजाएं एक साथ (Concurrent) चलने के बजाय एक के बाद एक (Consecutive) चलनी चाहिए ताकि ऐसे अपराधों पर कड़ा अंकुश लग सके।
  • मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
    • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक के कारण अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को भारी वित्तीय नुकसान, नौकरी व शिक्षा के अवसरों की हानि और गंभीर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

Consecutive Sentences: सुनवाई के दौरान हुआ घटनाक्रम

  • पहला प्रार्थना पत्र (Prayer A) वापस लिया
    • सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कोर्ट को सूचित किया कि वे याचिका की पहली मांग (पेपर लीक मामलों की समयबद्ध जांच के लिए ‘स्टैंडर्ड क्वेश्चनयर’ और विशेष जांच प्रक्रिया बनाना) पर जोर नहीं दे रहे हैं।
    • उन्होंने बताया कि संसद द्वारा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किए जाने के बाद कानूनी ढांचा मजबूत हो चुका है, इसलिए बाकी मांगों पर विचार किया जाए।
  • विधि आयोग की रिपोर्ट का विकल्प
    • वैकल्पिक तौर पर याचिका में विधि आयोग (Law Commission of India) को अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं का अध्ययन करने और 3 महीने के भीतर पेपर लीक से निपटने के सुझावों पर एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है।
  • अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को तय की गई है।

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