Sunday, October 4, 2026
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Rules Of Retirement: एक ही नीति के तहत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु अलग नहीं हो सकती; दैनिक वेतनभोगी पढ़ें

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठकार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया एवं न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल
याचिकाकर्तामध्य प्रदेश राज्य सरकार (शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन द्वारा प्रतिनिधित्व)
मूल प्रतिवादीप्रीतम प्रसाद दुबे (दैनिक वेतनभोगी से स्थायी हुए कर्मचारी)
मुख्य आदेशराज्य की पुनर्विचार याचिका खारिज; एक ही नीति के तहत आने वाले Class III और Class IV कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष ही रहेगी।

Rules Of Retirement: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (High Court of Madhya Pradesh) ने राज्य सरकार द्वारा दायर उस पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को खारिज कर दिया है, जिसमें दैनिक वेतनभोगी से स्थायी हुए कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया (Justice Vivek Rusia) और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल (Justice Pradeep Mittal) की पीठ ने माना कि राज्य सरकार के पास एक ही नीति के तहत स्थायी दर्जा (Sthai Karmi) पाने वाले तृतीय श्रेणी (Class III) और चतुर्थ श्रेणी (Class IV) के कर्मचारियों के बीच सेवानिवृत्ति की आयु में भेदभाव करने का कोई उचित औचित्य नहीं है।

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Rules Of Retirement: अदालत की मुख्य टिप्पणी और निष्कर्ष

  • पुनर्विचार याचिका (Review) के नाम पर पुनः सुनवाई अनुमेय नहीं:“यह पुनर्विचार याचिका उन विभिन्न आधारों पर दायर की गई है जिन्हें पहले ही रिट याचिका के जवाब में लिया जा चुका था; इसलिए पुनर्विचार याचिका की आड़ में रिट अपील की पुनः सुनवाई की अनुमति नहीं दी जा सकती।”
  • नीति में समान दर्जा, तो आयु में भेदभाव क्यों:
    • पीठ ने 15 मई 2026 के अपने पूर्व आदेश को दोहराते हुए कहा कि 07 अक्टूबर 2016 की नीति के तहत दैनिक वेतनभोगी से स्थायी कर्मी बने Class III और Class IV कर्मचारियों के वेतन व सेवा शर्तों में कोई अंतर नहीं है। इसलिए दोनों श्रेणियों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु भी अलग-अलग नहीं हो सकती।

Rules Of Retirement: मामले की पृष्ठभूमि और राज्य सरकार के तर्क

  1. मूल मामला (प्रीतम प्रसाद दुबे): प्रतिवादी प्रीतम प्रसाद दुबे को शुरुआत में दैनिक वेतनभोगी ‘टाइम कीपर/स्थल सहायक’ के रूप में नियुक्त किया गया था और बाद में उन्हें कुशल कार्यकर्ता के रूप में स्थायी दर्जा (Sthai Karmi) दिया गया। उन्होंने म.प्र. शासकीय सेवक अधिवार्षिकी आयु अधिनियम (Rule 56) में संशोधन के तहत सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष के बजाय 62 वर्ष किए जाने की मांग की थी।
  2. राज्य सरकार का तर्क और पूर्व उदाहरण की अस्वीकृति: राज्य सरकार ने ‘स्टेट ऑफ एमपी बनाम रामजीलाल प्रजापति’ मामले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि Class III कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष ही निर्धारित है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस मिसाल को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उस समय 2016 की स्थायी कर्मी नीति विचारधीन नहीं थी।
  3. 2019 का संशोधन: अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि राज्य सरकार ने खुद 2019 में दैनिक वेतनभोगी Class III पदों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी थी, जिससे 2017 के उस परिपत्र (Circular) का प्रभाव स्वतः समाप्त हो गया जिस पर राज्य सरकार अपना बचाव कर रही थी।

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