मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति आलोक अराधे |
| याचिकाकर्ता | FAIMA (ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन) और UDF |
| मूल मुद्दा | NTA में सुधार हेतु के. राधाकृष्णन और नंदन नीलेकणी समितियों की सिफारिशों का कार्यान्वयन। |
| प्रमुख निर्देश | केंद्र सरकार को NTA के संस्थागत पुनर्गठन की प्रगति और समय-सीमा पर 3 सप्ताह में हलफनामा पेश करने का आदेश। |
NEET-UG-I: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने National Testing Agency (NTA) के पुनर्गठन और संस्थागत मजबूती पर चिंता व्यक्त की है। NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र लीक के बाद NTA में संरचनात्मक सुधारों की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार से इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणी समिति की सिफारिशों को लागू करने के संबंध में हलफनामा मांगा है।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा (Justice PS Narasimha) और न्यायमूर्ति आलोक अराधे (Justice Alok Aradhe) की पीठ ने माना कि केवल व्यक्तिगत परीक्षाओं के लिए सुरक्षा तंत्र बनाना काफी नहीं है, जब तक कि NTA को एक स्थायी और तकनीक-सक्षम निकाय के रूप में स्थापित न किया जाए।
NEET-UG: अदालत की मुख्य टिप्पणियां और चिंताएं
- UPSC जैसा संस्थागत अनुभव (Institutional Memory):“UPSC का उदाहरण लीजिए। एक लंबी अवधि में लगातार परीक्षाएं आयोजित करते हुए उसने संस्थागत अनुभव और विशेषज्ञता हासिल की है। परीक्षा आयोजित करने वाले निकाय को खुद को अपडेट करना चाहिए और एक जीवंत संस्था बनना चाहिए।”
- व्यक्तियों पर निर्भरता बनाम संस्थागत ढांचा:
- जस्टिस नरसिम्हा ने जोर देकर कहा कि संस्थागत स्मृति (Institutional Memory) व्यक्तियों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यदि अनुभवी अधिकारी स्थानांतरित हो जाते हैं, तो अनुभव समाप्त हो जाता है। इसलिए एक ऐसा ढांचा होना चाहिए जहां अनुभव अगली पीढ़ियों तक प्रवाहित हो।
- सॉवरेन डेटाबेस और साइबर सुरक्षा:
- कोर्ट ने NTA के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या NTA के पास अपना ‘सॉवरेन डेटाबेस’ (Sovereign Database) है जहां परीक्षा का डेटा सुरक्षित रखा जा सके।
NEET-UG: सुनवाई के मुख्य अंश और केंद्र का रुख
- सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता का पक्ष:
- सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि सरकार ने राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को पूर्ण रूप से (In toto) स्वीकार कर लिया है।
- उन्होंने प्रश्नपत्र निर्माण, सीआईएफएस (CISF) सुरक्षा, जीपीएस ट्रेसिंग वाले कंटेनर और स्ट्रॉन्ग रूम की व्यवस्था को ‘फ़ूलप्रूफ़’ बताया, हालांकि स्वीकार किया कि मानवीय हस्तक्षेप से चूक की गुंजाइश बनी रहती है।
- SG ने कोर्ट को बताया कि मुख्य वित्त अधिकारी (CFO), प्रौद्योगिकी अधिकारी और जनरल मैनेजर जैसे प्रमुख पदों के लिए विज्ञापन जारी किए जा चुके हैं और भर्ती प्रक्रिया जारी है।
- 16 वर्टिकल्स (Verticals) और मैनपावर पर सवाल:
- पीठ ने पूछा कि समिति द्वारा अनुशंसित 16 वर्टिकल्स (जैसे केंद्रीय नेटवर्क संचालन, सूचना सुरक्षा और उम्मीदवार अनुभव) के लिए कितने अधिकारियों की नियुक्ति हो चुकी है और क्या NTA के पास अपना स्वतंत्र परिसर है।
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि NTA को आवश्यक बुनियादी ढांचे, जनशक्ति और तकनीकी क्षमताओं के साथ संस्थागत रूप देने की आवश्यकता है।
निर्देश:
- शिक्षा मंत्रालय के सचिव को 3 सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है, जिसमें राधाकृष्णन और नंदन नीलेकणी समितियों की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों और उनके लिए एक संभावित समय सीमा (Timeline) का ब्योरा देना होगा।

