मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| अपीलीय प्राधिकरण | Income Tax Appellate Tribunal (ITAT), Mumbai Bench |
| संबंधित प्रावधान | आयकर अधिनियम की धारा 147 (Reopening) एवं धारा 69 |
| मुख्य विवाद | फ्लैट खरीद में ₹20 लाख के कथित अनधिकृत नकद (On-Money) भुगतान का मामला। |
| अंतिम निर्णय | प्रक्रियात्मक चूक (साक्ष्य न देना व जिरह का मौका न देना) के कारण ₹20 लाख का टैक्स एडिशन रद्द। |
Purchase By Cash: आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) की मुंबई पीठ ने एक करदाता की आय में 20 लाख रुपये की नकद ‘ऑन-मनी’ (On-Money) आय जोड़ने के विभाग के फैसले को रद्द कर दिया है।
ट्रिब्यूनल ने माना कि आयकर विभाग करदाता के खिलाफ इस्तेमाल की गई सामग्री (इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य व बयान) प्रदान करने में विफल रहा और उसने गवाह से जिरह (Cross-Examination) का वास्तविक व प्रभावी अवसर नहीं दिया।
Purchase By Cash: प्रक्रियात्मक खामियां और ट्रिब्यूनल का निष्कर्ष
- जिरह का समन सुनवाई की तारीख के बाद भेजा गया
- विभाग ने गवाह से जिरह के लिए 14 दिसंबर 2018 की तारीख तय की थी। हालांकि, स्पीड पोस्ट ट्रैकिंग से पता चला कि समन ही 15 दिसंबर को बुक किया गया था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि सुनवाई की तारीख बीत जाने के बाद भेजा गया पत्र जिरह का वैध अवसर नहीं माना जा सकता।
- प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन
- करदाता को न तो इंडियाबुल्स (Indiabulls Group) के सीएफओ (CFO) का धारा 132(4) के तहत दर्ज बयान दिया गया और न ही वह इलेक्ट्रॉनिक डेटा साझा किया गया जिसके आधार पर आयकर विभाग ने दावा किया था।
- साबित करने का दायित्व विभाग पर
- ITAT ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि करदाता को बिल्डर से यह लिखवाकर लाना होगा कि उसने कोई नकद भुगतान नहीं किया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि धारा 69 के तहत कोई भी जोड़ (Addition) करने से पहले विभाग को ठोस साक्ष्यों के जरिए यह साबित करना होगा कि नकद भुगतान वास्तव में हुआ था।
Purchase By Cash: मामले की पृष्ठभूमि
- मूल आकलन: मुंबई निवासी करदाता ने आकलन वर्ष (AY) 2011-12 के लिए 1.22 करोड़ रुपये की आय घोषित करते हुए रिटर्न दाखिल किया था, जिसका आकलन 2013 में पूरा हुआ था।
- 2016 की छापेमारी: इंडियाबुल्स समूह पर हुई छापेमारी के दौरान सीएफओ ने ऑन-मनी प्राप्त करने की बात स्वीकार की थी। इसके आधार पर अधिकारी ने दावा किया कि करदाता ने फ्लैट की खरीद मूल्य (5.33 करोड़ रुपये) के अलावा 20 लाख रुपये नकद दिए थे।
- करदाता का रुख: करदाता ने नकद भुगतान से इनकार करते हुए विभाग से जिरह की लिखित मांग की थी। प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण मामला अपीलीय अधिकरण तक पहुंचा।
Purchase By Cash: भविष्य के मामलों के लिए टेकअवे (Takeaways)
कर विशेषज्ञों के अनुसार, धारा 69 के तहत ‘ऑन-मनी’ भुगतानों को कोर्ट में बनाए रखने के लिए आयकर विभाग को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:
- विशिष्ट साक्ष्य प्रदान करना: केवल यह बताना कि साक्ष्य मौजूद हैं पर्याप्त नहीं है; जब्त डायरी, खाता या इलेक्ट्रॉनिक प्रविष्टियों की प्रति करदाता को सौंपनी होगी।
- समय पर जिरह का अवसर: जिरह के लिए करदाता को पर्याप्त समय (Lead Time) मिलना चाहिए।
- साक्ष्य की स्पष्ट श्रृंखला (Evidentiary Chain): विभाग को जेनेरिक डेटा के बजाय स्पष्ट कैश ट्रेल, अनकही बैंक निकासी या व्यक्तिगत स्तर की ठोस कड़ियों से भुगतान साबित करना होगा।

