केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी (Justice Subhash Vidyarthi) |
| मामला | छोटकाऊ उर्फ अलाउद्दीन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 4 अन्य (Criminal Revision) |
| आरोप | बीएनएस की धारा 109 (हत्या का प्रयास) और आर्म्स एक्ट |
| मुख्य आदेश | कथित एनकाउंटर की कहानी की CBI जांच का निर्देश; ट्रायल कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज अर्जी खारिज करने के आदेश पर रोक। |
| अगली सुनवाई | 23 नवंबर 2026 |
Half Encounter: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण के एक मामले में आरोपी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर कथित गोलीबारी और जवाबी एनकाउंटर में आरोपी के पैरों में गोली लगने की घटना की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने का आदेश दिया है [छोटकऊ उर्फ अलाउद्दीन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं 4 अन्य]।
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया पुलिस की एफआईआर में बताई गई कहानी झूठी प्रतीत होती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि पुलिस सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस आरोपी को पहले एक अन्य मामले में बरी करते समय की गई टिप्पणियों से चिढ़ी हुई थी। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अभियुक्तों के पैरों में गोली मारे जाने के बार-बार सामने आने वाले मामलों पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि पुलिस की प्राथमिक कहानी प्रथम दृष्टया झूठी और मनगढ़ंत प्रतीत होती है।
पीठ और मामले की पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने 13 अगस्त को छोटकऊ उर्फ अलाउद्दीन की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (Criminal Revision) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। छोटकऊ ने एक 7 वर्षीय बच्ची के कथित अपहरण के मामले के बाद हुए पुलिस एनकाउंटर में दर्ज एफआईआर (भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 – हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25) में अपनी डिस्चार्ज अर्जी खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। मई 2025 में हुई इस कथित मुठभेड़ में पुलिस की गोली लगने से छोटकऊ के दोनों पैरों में चोट आई थी।
अदालत के कड़े सवाल और विसंगतियां
उच्च न्यायालय ने पुलिस की प्राथमिकी (FIR) में दर्ज घटनाक्रम पर गंभीर संदेह जताते हुए कई बिंदुओं को रेखांकित किया।
- 23 हथियारबंद पुलिसकर्मियों का डर: अदालत ने कहा कि यह बेहद अजीब है कि केवल एक देसी कट्टा और दो कारतूस रखने वाले व्यक्ति से 13 पुलिसकर्मियों और 10 स्वाट (SWAT) कमांडो सहित कुल 23 हथियारबंद जवान डर गए और अतिरिक्त मदद मांगने लगे।
- एक ही गाड़ी में 13 पुलिसकर्मी: एफआईआर के अनुसार, तत्कालीन एसएचओ अश्विनी कुमार दुबे 12 अन्य पुलिसकर्मियों के साथ एक ही सरकारी वाहन में गश्त कर रहे थे। अदालत ने सवाल उठाया कि किसी जीप या एसयूवी में 13 लोगों का बैठना न तो व्यावहारिक है और न ही कानूनी रूप से संभव। एक ही गाड़ी में सवार होकर पुलिस टीम तीन अलग-अलग दिशाओं में कैसे बंट सकती है?
- एसएचओ की निशानेबाजी की क्षमता की जांच: अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि तत्कालीन एसएचओ अश्विनी कुमार दुबे की शूटिंग क्षमता का परीक्षण किया जाए कि क्या वे रात के अंधेरे में केवल हथियार लोड होने की आवाज सुनकर 15 मीटर की दूरी से 9 एमएम सर्विस पिस्टल से सटीक निशाना लगाकर दोनों पैरों में गोली मार सकते हैं?
- एनकाउंटर का ‘पैटर्न’: अदालत ने कड़े शब्दों में टिप्पणी की:“अदालत आए दिन देख रही है कि जब भी पुलिस किसी व्यक्ति को पकड़ती है, तो अक्सर एक नई एफआईआर दर्ज हो जाती है जिसमें आरोप लगाया जाता है कि आरोपी ने पुलिस टीम पर अंधाधुंध गोलीबारी की। सामान्यतः किसी भी पुलिसकर्मी की वर्दी तक को एक छर्रा भी नहीं छूता और वे पूरी तरह सुरक्षित बच जाते हैं। वहीं पुलिस की चलाई एक गोली सीधे आरोपी के घुटने या उसके नीचे जाकर लगती है।”
पूर्व के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और पुलिस का कथित रोष
अदालत ने पाया कि मुठभेड़ में शामिल सभी 23 पुलिसकर्मियों को छोटकऊ से कथित ‘स्वीकारोक्ति’ निकलवाने और इस ‘अच्छे कार्य’ के लिए पुरस्कृत किया गया था।
पीठ ने आशंका जताई कि पुलिस की नाराजगी का कारण सुप्रीम कोर्ट द्वारा छोटकऊ को वर्ष 2012 के एक अन्य मामले (6 वर्षीय बच्ची से बलात्कार और हत्या) में बरी किया जाना हो सकता है। सितंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस जांच में गंभीर खामियां पाते हुए उसे बरी कर दिया था और कहा था कि अभियोजन पक्ष ने खराब जांच करके पीड़िता के परिवार और बिना सबूत फंसाकर आरोपी—दोनों के साथ अन्याय किया है।
हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणियां और मुख्य निष्कर्ष
- ’23 सशस्त्र पुलिसकर्मी एक कट्टे से डर गए’:
- हाईकोर्ट ने इस बात पर गहरा अचरज जताया कि 13 पुलिसकर्मियों की टीम और 10 सदस्यों की SWAT टीम (कुल 23 सशस्त्र जवान) केवल एक देशी कट्टे और दो कारतूस लिए व्यक्ति से घबरा गए और बैकअप मंगवाया।
- पीठ ने कहा: “यह अजीब बात है कि 23 सशस्त्र पुलिसकर्मी एक कट्टे से डर गए… पुलिस का दावा है कि आरोपी ने अंधाधुंध फायरिंग की, लेकिन किसी पुलिसकर्मी की वर्दी तक को खरोंच नहीं आई, जबकि पुलिस की गोली सीधे आरोपी के घुटने या उसके नीचे जा लगती है।”
- एसएचओ की शूटिंग क्षमता और दावों की जांच:
- कोर्ट ने सीबीआई को इकौना (Ikauna) पुलिस स्टेशन के तत्कालीन एसएचओ अश्विनी कुमार दुबे की शूटिंग क्षमता का परीक्षण करने का निर्देश दिया।
- अदालत ने सवाल उठाया कि क्या कोई अधिकारी रात के अंधेरे में केवल हथियार लोड होने की आवाज सुनकर 15 मीटर की दूरी से 9mm सर्विस पिस्टल से सटीक निशाने साधकर आरोपी के दोनों पैरों में गोली मार सकता है?
- गाड़ी में 13 पुलिसकर्मियों के बैठने की विसंगति:
- एफआईआर में दावा किया गया था कि 13 पुलिसकर्मी एक ही सरकारी वाहन में गश्त कर रहे थे।
- कोर्ट ने कहा कि जब तक वाहन कोई मिनी बस न हो, सामान्य जीप या एसयूवी में कानूनी और भौतिक रूप से 13 पुलिसकर्मियों का बैठना संभव नहीं है।
- सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले से पुलिस की रंजिश:
- आरोपी छोटकाऊ उर्फ अलाउद्दीन को 2012 के एक बलात्कार और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2022 में बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने तब पुलिस की खराब जांच पर सख्त फटकार लगाई थी।
- हाईकोर्ट ने माना कि इसी बात से पुलिस में नाराजगी थी और एनकाउंटर के बाद सभी 23 पुलिसकर्मियों को “इनाम” भी दिया गया था।
उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश
उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि एसएचओ ने एफआईआर और अदालत के समक्ष सही तथ्य पेश नहीं किए हैं और कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है।
- सीबीआई जांच: मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई को एफआईआर के सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच करने का निर्देश दिया गया है।
- कार्रवाई पर रोक: श्रावस्ती के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा 2 जुलाई को छोटकऊ की डिस्चार्ज अर्जी खारिज करने के आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी गई है।
- अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को तय की गई है।
कानूनी प्रतिनिधित्व
- याचिकाकर्ता (छोटकऊ) की ओर से: अधिवक्ता नदीम मुर्तजा, उत्कर्ष श्रीवास्तव, प्रशस्त पुरी, निहारिका श्रीवास्तव और पार्थ आनंद पेश हुए।
- राज्य सरकार की ओर से: अपर शासकीय अधिवक्ता (AGA) जी. डी. भट्ट ने पक्ष रखा।

