केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना (Justice M. Nagaprasanna) |
| आरोपी | नवीन जी (Naveen G) |
| धाराएँ | आत्महत्या के लिए उकसाना (Abetment of Suicide – Sec 108 BNS / Sec 306 IPC) एवं स्टॉकिंग |
| फैसला | एफआईआर/चार्जशीट रद्द करने से इनकार; आपराधिक मुकदमा जारी रहेगा। |
Abetment of Suicide: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक नर्सिंग छात्रा का लगातार पीछा (Stalking) करने, एकतरफा संबंध का दबाव बनाने और उसके वैवाहिक प्रस्तावों को बार-बार तुड़वाने के आरोपी शादीशुदा व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment of Suicide) का मामला रद्द करने से इनकार कर दिया है [नवीन जी बनाम कर्नाटक राज्य]।
न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप बताते हैं कि पीड़िता को इस कदर मजबूर और अलग-थलग (Cornered) कर दिया गया था कि उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था।
मुख्य कानूनी बिंदु
- अभियोजन को आधारहीन नहीं माना जा सकता: न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने 18 अगस्त को फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत आरोपी को दोषी नहीं ठहरा रही है, लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मुकदमे को शुरू में ही रद्द नहीं किया जा सकता।
- पहली आत्महत्या की कोशिश के बाद भी प्रताड़ना: अदालत ने इस बात को बेहद गंभीर माना कि पीड़िता द्वारा 5 जुलाई 2025 को आत्महत्या के पहले प्रयास और बुजुर्गों के हस्तक्षेप के बावजूद आरोपी ने अपनी हरकतों को जारी रखा, जिसके चलते 29 जुलाई 2025 को पीड़िता ने जान दे दी।
- मानसिक उत्पीड़न और प्रतिष्ठा को ठेस: शादी के संभावित वर पक्षों (Prospective Grooms) को झूठे संबंध का दावा करके रिश्ते तुड़वाना पीड़िता की सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक शांति को नष्ट करने वाला कृत्य था।
मामले की पृष्ठभूमि और आरोप
- शिकायतकर्ता का पक्ष: शिकायत मृतका की मां द्वारा दर्ज कराई गई थी। याचिकाकर्ता नवीन दो बच्चों का पिता और शादीशुदा व्यक्ति है। आरोप है कि मृतका द्वारा लगातार मना किए जाने के बावजूद आरोपी उसका पीछा करता था, उसके कार्यस्थल पर पहुंच जाता था और उस पर शादी का दबाव बनाता था।
- तस्वीरों का दुरुपयोग और रिश्ते तुड़वाना: आरोपी जबरन पीड़िता को धर्मस्थल ले गया और उसकी तस्वीरें खींच लीं। जब भी पीड़िता के लिए शादी के रिश्ते आते, आरोपी उन संभावित दूल्हों से संपर्क कर दावा करता कि उसका पीड़िता के साथ प्रेम संबंध है, जिसके कारण शादी की बातचीत बार-बार टूट जाती थी।
- पूर्व का समझौता और दोबारा उत्पीड़न: पीड़िता ने 5 जुलाई 2025 को भी आत्महत्या का प्रयास किया था। उस समय परिवार के बुजुर्गों के हस्तक्षेप और आरोपी द्वारा भविष्य में परेशान न करने के वादे के बाद दर्ज शिकायत वापस ले ली गई थी। लेकिन आरोपी ने कुछ ही हफ्तों बाद दोबारा प्रताड़ना शुरू कर दी, जिससे तंग आकर छात्रा ने 29 जुलाई 2025 को आत्महत्या कर ली।
उच्च न्यायालय के मुख्य निष्कर्ष
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने याचिका खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा: शिकायत और आरोप पत्र को समग्र रूप से पढ़ने पर प्रथम दृष्टया यह साफ दिखता है कि मृतका को लगातार एक कोने में धकेला गया—उसके इनकार को नजरअंदाज किया गया, उसकी निजता पर हमला हुआ, कार्यस्थल पर पीछा किया गया, शादी के प्रस्तावों को जानबूझकर तुड़वाया गया और यह डर पैदा किया गया कि उसे स्वतंत्र जीवन नहीं जीने दिया जाएगा।
न्यायालय ने आगे रेखांकित किया: एक युवती का जीवन असमय समाप्त हो गया। यदि ये आरोप मुकदमे के दौरान साबित होते हैं, तो आत्महत्या का पहला प्रयास अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। वह एक स्पष्ट चेतावनी थी। आरोप है कि उस चेतावनी के बावजूद याचिकाकर्ता ने वही आचरण जारी रखा जिसने मृतका को पहले भी कगार पर ला खड़ा किया था।
मामला और हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
- पीड़िता को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप
- शिकायत के अनुसार, आरोपी दो बच्चों का पिता और शादीशुदा व्यक्ति है। पीड़िता (नर्सिंग छात्रा) द्वारा लगातार मना किए जाने के बावजूद आरोपी उसका पीछा करता था, कार्यस्थल पर पहुंच जाता था और धमकाता था।
- आरोपी ने पीड़िता के भावी ससुराल वालों से संपर्क कर रिश्ते तुड़वाए, जिससे समाज में पीड़िता की प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुंचा।
- पहली आत्महत्या की कोशिश के बाद भी उत्पीड़न जारी रखा
- कोर्ट ने विशेष रूप से ध्यान दिया कि पीड़िता ने 5 जुलाई 2025 को भी आत्महत्या की कोशिश की थी। तब बुजुर्गों के हस्तक्षेप और आरोपी द्वारा प्रताड़ित न करने के वादे के बाद मामला वापस ले लिया गया था।
- इसके बावजूद आरोपी ने अपनी हरकतों को नहीं रोका और 29 जुलाई 2025 को पीड़िता ने आखिरकार दम तोड़ दिया।
- हाईकोर्ट का कड़ा रुख
- न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने कहा: “अदालत आज आरोपी को दोषी नहीं ठहरा रही है, लेकिन वह अभियोजन (Prosecution) को आधारहीन मानकर मामले को रद्द भी नहीं कर सकती। एक युवा महिला का जीवन असामयिक समाप्त हो गया। आरोपी का आचरण ऐसा था जिसने पीड़िता को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और उसके स्वतंत्र जीवन जीने के अधिकार में हस्तक्षेप किया।”
- कोर्ट ने कहा कि पहली आत्महत्या की कोशिश आरोपी के लिए एक स्पष्ट चेतावनी थी, फिर भी उसने उत्पीड़न जारी रखा।
कानूनी प्रतिनिधित्व
- याचिकाकर्ता की ओर से: अधिवक्ता लक्ष्मीकांत के. उपस्थित हुए।
- राज्य सरकार की ओर से: हाईकोर्ट गवर्नमेंट प्लीडर रश्मि पटेल ने पक्ष रखा।
- शिकायतकर्ता की ओर से: अधिवक्ता रक्षा कीर्तना पेश हुईं।

