केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता एवं न्यायमूर्ति विजय विश्नोई |
| मामला | रेहाना खान बनाम रिजवान सिद्दीकी (Rehana Khan v. Rizwan Siddhiquee) |
| विवाद का समय | 2013 से 2026 (11 वर्षों से विभिन्न मंचों पर लंबित) |
| कोर्ट का आदेश | दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए दोनों पक्षों पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना। |
Professional Misconduct: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अभिनेत्री और एक वकील के बीच 11 साल से चले आ रहे विवाद को लेकर दोनों पक्षों को कड़ी फटकार लगाई है [रेहाना खान बनाम रिजवान सिद्दीकी]। न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI), बॉम्बे उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में इतने वर्षों तक मुकदमेबाजी जारी रखने के लिए दोनों पक्षों की अपीलों को खारिज कर दिया और अदालत का कीमती समय बर्बाद करने के लिए अभिनेत्री रेहाना खान और अधिवक्ता रिजवान सिद्दीकी—दोनों पर ₹5-5 लाख का जुर्माना (Cost) लगाया।
यह रही पीठ की कड़ी टिप्पणी
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की:
“कभी-कभी कहा जाता है कि मुकदमे में पक्षकार पहले से ही सच्चाई जानते हैं, और वास्तव में अदालत ही परीक्षण के दौर से गुजर रही होती है। यह अवलोकन बेहद गंभीर है और वर्तमान मामला दर्शाता है कि क्यों। हमारे सामने दो ऐसे वादकारी हैं, जिनमें से प्रत्येक जीत की उम्मीद के साथ इस अदालत में आया है, लेकिन किसी ने भी अदालत के सामने पूरी सच्चाई और ईमानदारी से बात नहीं रखी है।””
पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों ने 11 वर्षों तक बार काउंसिल, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का समय बर्बाद किया, जो समय अन्य जरूरतमंद वादकारियों का था।
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आदेश से नाम हटाने की मांग खारिज: ‘दुनिया को जानने दो’
खुली अदालत में फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद, एक वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि आदेश से दोनों पक्षों के नाम हटा (Redact) दिए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए सख्त लहजे में कहा:
“क्यों? यह किस तरह का अनुरोध है? नाम हटाने की कोई आवश्यकता नहीं है। दुनिया को जानने दो। यहां कुछ भी छुपाने जैसा नहीं है। वे दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर खुलकर आपस में लड़ते रहे हैं और अब आप चाहते हैं कि उनके नाम हटा दिए जाएं?”
11 साल पुराने विवाद की पृष्ठभूमि
- 2013-2014 की घटनाएं: अभिनेत्री रेहाना खान ने 2013 में एक पारिवारिक विवाद में मुंबई के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया और रिजवान सिद्दीकी को अपना वकील नियुक्त किया। जुलाई 2014 में सिद्दीकी के कार्यालय से संबंधित पुलिस अधिकारी को एक कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसे खान ने अनाधिकृत बताया, जबकि सिद्दीकी का दावा था कि यह खान के निर्देशों पर ही भेजा गया था।
- एफआईआर और मीडिया तमाशा: बाद में खान ने पुलिस अधिकारी पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें सिद्दीकी पर भी अधिकारी के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया गया। इसके बाद दोनों पक्षों ने मीडिया में बयानबाजी की। वकील सिद्दीकी ने टीवी चैनलों पर इंटरव्यू देकर गोपनीय बातचीत और संदेशों को सार्वजनिक कर दिया।
- बार काउंसिल की कार्रवाई (अगस्त 2025): बीसीआई की अनुशासन समिति ने सिद्दीकी को बिना अधिकार के नोटिस भेजने, मुवक्किल की गोपनीय जानकारी टीवी पर उजागर करने और अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए पेशेवर कदाचार (Professional Misconduct) का दोषी ठहराया। समिति ने उनका वकालत का लाइसेंस 2 साल के लिए निलंबित किया तथा उन पर कुल ₹5 लाख का जुर्माना (₹3 लाख खान को और ₹2 लाख वेलफेयर फंड में) लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट में दोनों की अपीलें और अदालत के निष्कर्ष
दोनों पक्ष इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। खान ने सिद्दीकी का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने और ₹2 करोड़ के मुआवजे की मांग की थी, जबकि सिद्दीकी अपने निलंबन को पूरी तरह रद्द कराना चाहते थे।
- वकील के आचरण पर न्यायालय का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने सिद्दीकी की दलील को खारिज करते हुए कहा कि केवल टीवी पर मुवक्किल की गोपनीय बातें उजागर करना ही कदाचार साबित करने के लिए पर्याप्त है। अदालत ने कहा:“एक वकील का कर्तव्य इस बात पर निर्भर नहीं करता कि मुवक्किल उसके साथ हमेशा अच्छा व्यवहार करे। कोई भी वकील विश्वास में प्राप्त जानकारी का उपयोग अपने मुवक्किल के खिलाफ नहीं कर सकता, भले ही वह बाद में उसकी विरोधी ही क्यों न बन गई हो। झूठे आरोप लगने पर वकील के पास जांच एजेंसी से संपर्क करने या मानहानि का केस करने जैसे कानूनी उपाय मौजूद हैं, न कि टीवी पर जाकर विशेषाधिकार प्राप्त बातचीत को सार्वजनिक करना।”
- अभिनेत्री के आचरण पर टिप्पणी: न्यायालय ने पाया कि अभिनेत्री भी पूरी तरह निष्पक्ष और ईमानदार नहीं रही हैं। रिकॉर्ड से पता चलता है कि उन्होंने अपने वकील के साथ मिलकर पुलिस अधिकारी को फंसाने की योजना बनाई थी। उन्होंने खुद भी मीडिया में जाकर बयान दिए थे और जिस पुलिस अधिकारी पर उन्होंने आरोप लगाए थे, उसे 2015 में ही ट्रायल कोर्ट बरी कर चुका था, जिसे उन्होंने कभी चुनौती नहीं दी।
फैसले के मुख्य बिंदु और सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां
- नाम छिपाने (Redaction) की मांग खारिज
- फैसला सुनाए जाने के बाद जब वकील ने आदेश से पक्षों का नाम छिपाने या हटाने (Redact) की प्रार्थना की, तो पीठ ने साफ इनकार कर दिया।
- अदालत ने टिप्पणी की: “क्यों? यह किस तरह का अनुरोध है? इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं है। दुनिया को पता चलना चाहिए। यहाँ कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है। वे सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुलकर लड़ रहे हैं और अब आप चाहते हैं कि उनका नाम हटा दिया जाए?”
- अदालत के साथ धोखाधड़ी और अधूरा सच
- पीठ ने कहा: “कहा जाता है कि सुनवाई में पक्षकार पहले से ही सच जानते हैं और केवल जज की परीक्षा होती है। यह मामला इसका सटीक उदाहरण है। हमारे सामने दो ऐसे मुवक्किल हैं जो अदालत से राहत की उम्मीद में आए हैं, लेकिन दोनों में से कोई भी इसके प्रति ईमानदार नहीं रहा है।”
- वकील के पेशेवर दुराचार (Professional Misconduct) पर रुख
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने वकील रिजवान सिद्दीकी को क्लाइंट की गोपनीयता (Client Privilege) भंग करने, टीवी इंटरव्यू में जानकारी सार्वजनिक करने और विवादित नोटिस भेजने पर 2 साल के लिए निलंबित किया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कोई वकील अपने क्लाइंट के खिलाफ टीवी पर जाकर गोपनीय जानकारी का खुलासा नहीं कर सकता। अगर क्लाइंट वकील पर आरोप लगाता है, तो वकील के पास मानहानि (Defamation) या जांच एजेंसियों के सामने पक्ष रखने के कानूनी रास्ते होते हैं, न कि मीडिया में जाकर जवाब देना।
- अभिनेत्री की भूमिका और कठोर सजा की मांग खारिज
- अभिनेत्री द्वारा वकील को स्थायी रूप से बर्खास्त करने और ₹2 करोड़ के मुआवजे की मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
- कोर्ट ने पाया कि अभिनेत्री ने खुद मीडिया के सामने बयान दिए थे और पुलिस अधिकारी के खिलाफ बनाए गए मामले में उनकी अपनी भूमिका भी पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी।
अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की अपीलों को पूरी तरह खारिज करते हुए बार काउंसिल के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। साथ ही, अदालत ने रेहाना खान और अधिवक्ता रिजवान सिद्दीकी दोनों को चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (SCLSC) के पास ₹5-5 लाख की जुर्माना राशि जमा करने का निर्देश दिया।

