मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- योग्यता में बदलाव: पहले इस पद के लिए उम्मीदवारों के पास केवल मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर (Master’s in Psychology) होना पर्याप्त था। 4 अगस्त को जारी नई अधिसूचना में मनोविज्ञान में परास्नातक के साथ-साथ कानून में स्नातक (Bachelor’s in Law) की डिग्री भी अनिवार्य कर दी गई।
- याचिकाकर्ताओं की आपत्ति: याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि ऐसे उम्मीदवार शायद ही मिलेंगे जिन्होंने मनोविज्ञान और कानून दोनों की पढ़ाई की हो, क्योंकि केवल कानून स्नातक सीधे मनोविज्ञान में मास्टर डिग्री नहीं कर सकता। इसके अलावा, काउंसलिंग पद के लिए कानून की डिग्री जोड़ने का कोई तार्किक आधार (Rationale) नहीं है।
- अदालत का नोटिस: न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा की एकल पीठ ने HCLSC को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति (HCLSC) में जनरल काउंसलरों की नियुक्ति के लिए कानून की डिग्री (LL.B.) को अनिवार्य योग्यता बनाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है [अपूर्वा बांचता एवं अन्य बनाम उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति]।
मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ताओं के तर्क
जनरल काउंसलरों को वैवाहिक विवादों, महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े संवेदनशील मामलों में पक्षकारों की काउंसलिंग के लिए अनुबंध (Contract Basis) के आधार पर नियुक्त किया जाता है।
- मौजूदा अनुबंध कर्मियों पर संकट: याचिका वर्ष 2024 से अनुबंध पर काम कर रहे तीन जनरल काउंसलरों द्वारा दायर की गई है। उनका कहना है कि उनके पास केवल मनोविज्ञान में मास्टर डिग्री है, जिसके कारण नए पात्रता मानदंड लागू होने से उनका रोजगार प्रभावित होगा।
- शैक्षणिक व्यावहारिक सीमाएं: याचिका में कहा गया है कि सामान्य शैक्षणिक व्यवस्था में एक साथ दोनों क्षेत्रों की योग्यताएं हासिल करना अव्यावहारिक है। मनोवैज्ञानिक परामर्श देना एक अलग विशेषज्ञता का क्षेत्र है, जिसमें कानूनी डिग्री थोपना अनुचित है।
अदालती आदेश और अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया: यदि कोई जवाब हो, तो वह याचिकाकर्ताओं के वकील को अग्रिम प्रति सौंपते हुए अगली सुनवाई की तारीख से पहले दाखिल किया जाए।
General Counsellors: विवाद का कारण और याचिकाकर्ताओं के तर्क
- पात्रता नियमों में अचानक बदलाव:
- पहले HCLSC में काउंसलर पद के लिए केवल साइकोलॉजी (Psychology) में मास्टर्स डिग्री होना आवश्यक था।
- 4 अगस्त को जारी नए भर्ती विज्ञापन में कमेटी ने पात्रता शर्तों को बदलते हुए साइकोलॉजी में मास्टर्स के साथ-साथ कानून में स्नातक (LL.B.) की अनिवार्यता भी जोड़ दी।
- व्यावहारिक कठिनाई और शैक्षणिक विरोधाभास:
- 2024 से कार्यरत काउंसलरों की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि भारत में शैक्षणिक व्यवस्था के अनुसार ऐसा व्यक्ति मिलना अत्यंत दुर्लभ है जिसके पास साइकोलॉजी में मास्टर्स और कानून में बैचलर दोनों डिग्रियां हों।
- उन्होंने कहा कि कानून में ग्रेजुएशन (LL.B.) करने के बाद कोई सीधे मनोविज्ञान (Psychology) में MA नहीं कर सकता, क्योंकि अधिकांश विश्वविद्यालयों में इसके लिए स्नातक स्तर पर साइकोलॉजी होना अनिवार्य है।
- काउंसलिंग के कार्य में LL.B. की आवश्यकता पर सवाल:
- याचिका में कहा गया कि काउंसलरों का मुख्य कार्य वैवाहिक विवादों (Matrimonial Disputes), महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के मामलों में पक्षों की मध्यस्थता व मानसिक काउंसलिंग करना है। इसके लिए मनोवैज्ञानिक समझ अधिक महत्वपूर्ण है, न कि कानूनी डिग्री।
कानूनी प्रतिनिधित्व
- याचिकाकर्ताओं की ओर से: अधिवक्ता गगनदीप कुमार तिवारी और देवी लाल उपस्थित हुए।
- प्रतिवादी (HCLSC) की ओर से: अधिवक्ता अर्जुन शुक्ला ने पक्ष रखा।
General Counsellors: केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab & Haryana High Court) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा (Justice Sudeepti Sharma) |
| याचिकाकर्ता | अपूर्वा बंचटा और अन्य (कार्यरत काउंसलर) |
| प्रतिवादी | हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (HCLSC) |
| मुख्य मुद्दा | काउंसलर पद के लिए मनोविज्ञान में MA के साथ LL.B. की अनिवार्यता की वैधता। |

