Monday, August 24, 2026
HomeLaw Firms & Assoc.Adjournment Reforms: अदालतों में तारीख पर तारीख (स्थगन) सुधारों पर हाईकोर्ट ने...

Adjournment Reforms: अदालतों में तारीख पर तारीख (स्थगन) सुधारों पर हाईकोर्ट ने बंद की PIL: रजिस्ट्री की अधिसूचना से चिंताओं का समाधान

मुख्य बिंदु (Key Indicators)

  • अधिकतम 2 तारीखों (Adjournments) की सीमा: हाईकोर्ट द्वारा जारी अधिसूचना में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 346(2) का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत किसी भी पक्ष को ट्रायल के दौरान 2 से अधिक बार तारीख/स्थगन नहीं दिया जा सकता।
  • डिजिटल हस्ताक्षर व ई-आदेश: मार्च 2026 की अधिसूचना में e-Hastakshar ऐप के माध्यम से अदालती आदेशों पर तुरंत डिजिटल हस्ताक्षर करने और डेली ऑर्डर शीट (Order Sheets) को ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा: औपचारिक गवाहों और पुलिस अधिकारियों को, जिनकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति दी गई है।
  • याचिकाकर्ता की मांग स्वीकार: एडवोकेट रीतम सिंह ने 2024 में यह PIL दायर कर तर्क दिया था कि निचली अदालतों में नियमित रूप से बेवजह की तारीखें दी जाती हैं, जिससे मुकदमों में अत्यधिक देरी होती है। रजिस्ट्री द्वारा नए नियम लागू किए जाने पर याचिकाकर्ता ने स्वयं याचिका बंद करने का अनुरोध किया।

गुवाहाटी: गौहाटी उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ अदालतों (Trial Courts) में बार-बार सुनवाई टालने (Adjournments) पर रोक लगाने और अदालती रिकॉर्ड के अनिवार्य डिजिटल अपलोड की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को निस्तारित करते हुए बंद कर दिया है। अदालत ने नोट किया कि उच्च न्यायालय रजिस्ट्री द्वारा जारी प्रशासनिक अधिसूचना में याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दों और सुधारों को पहले ही शामिल कर लिया गया है।

न्यायमूर्ति माइकल ज़ोथानखुमा और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने 10 अगस्त को यह आदेश पारित किया।

उच्च न्यायालय का आदेश

पीठ ने याचिकाकर्ता की सहमति दर्ज करते हुए अपने आदेश में कहा: “याचिकाकर्ता (व्यक्तिगत रूप से उपस्थित) ने प्रस्तुत किया कि गौहाटी उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी अधिसूचना संख्या 21 (दिनांक 23.03.2026) के आलोक में, इस जनहित याचिका में निर्णय के लिए अब कुछ भी शेष नहीं बचा है। तदनुसार, यह जनहित याचिका बंद की जाती है।”

जनहित याचिका की मुख्य मांगें

असम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ता रीतम सिंह ने वर्ष 2024 में यह जनहित याचिका दायर की थी। उनकी मुख्य मांगें थीं:

  • तारीखों की सख्त सीमा: अधीनस्थ अदालतों में बिना ठोस आधार के नियमित रूप से सुनवाई टालने की प्रथा पर रोक लगाई जाए और इसे सीपीसी (CPC) व सीआरपीसी (CrPC) के नियमों के अनुसार अत्यंत दुर्लभ परिस्थितियों तक सीमित किया जाए।
  • हर्जाना और अनुशासनात्मक नियम: अनुचित स्थगन मांगने वाले वकीलों पर हर्जाना (Costs) लगाया जाए और स्थगन प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ नियम बनाए जाएं।
  • पारदर्शिता और डिजिटल अपलोड: उच्च न्यायालय की तर्ज पर अधीनस्थ अदालतों के लिए एक समान तिथि-आवंटन प्रणाली लागू हो और मुकदमों की दैनिक ऑर्डर शीट (Order Sheets) को ऑनलाइन अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए।

Also Read; Decide a Case: चाहे सॉलिसिटर जनरल हों, एएसजी हों या जूनियर वकील—हमारा आदेश वही रहेगा: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की स्थगन की मांग, पढ़ें टिप्पणी

नए आपराधिक कानून (BNSS) और मार्च 2026 की अधिसूचना

उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा 23 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना में नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए, जिससे याचिका की अधिकांश मांगें पूरी हो गईं:

  • अधिकतम 2 स्थगन की सीमा (धारा 346(2) BNSS): अधिसूचना में जोर दिया गया कि ट्रायल कोर्ट बीएनएसएस की धारा 346(2) का कड़ाई से पालन करें। इसके अनुसार, जब तक सभी गवाहों की गवाही पूरी नहीं हो जाती, तब तक मुकदमा दिन-प्रतिदिन (Day-to-day) चलेगा। यदि परिस्थितियां किसी पक्ष के नियंत्रण से बाहर हैं, तो लिखित कारण दर्ज करके ही अधिकतम दो बार स्थगन (Adjournment) दिया जा सकता है।
  • ई-हस्ताक्षर और त्वरित डिजिटल ऑर्डर: ‘ई-हस्ताक्षर’ (e-Hastakshar) एप्लिकेशन के माध्यम से न्यायिक आदेशों के डिजिटल हस्ताक्षर और ई-समन जारी करने के प्रावधानों को लागू करने का निर्देश दिया गया, जिससे दैनिक आदेश तुरंत ऑनलाइन उपलब्ध हो सकें।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC): औपचारिक गवाहों और पुलिस अधिकारियों की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराने की व्यवस्था दी गई, जिससे उनकी अनुपस्थिति के कारण सुनवाई न टले।

हाईकोर्ट का निर्णय

न्यायमूर्ति माइकल ज़ोथनखुमा और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की पीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा: “याचिकाकर्ता (स्वयं उपस्थित) का निवेदन है कि रजिस्ट्रार जनरल, गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा जारी अधिसूचना संख्या 21 (दिनांक 23.03.2026) के आलोक में, इस जनहित याचिका (PIL) में अब निर्णय के लिए कुछ भी शेष नहीं बचा है। तदनुसार, यह जनहित याचिका बंद (Closed) की जाती है।”

अंतिम निष्कर्ष

चूंकि उच्च न्यायालय प्रशासन की आधिकारिक अधिसूचना ने अधीनस्थ अदालतों में अनावश्यक तारीखों पर रोक लगाने और डिजिटल पारदर्शिता लाने से जुड़े सभी प्रमुख सुधारात्मक उपायों को लागू कर दिया था, इसलिए उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका को अंतिम रूप से बंद कर दिया।

एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)

विवरणविवरण जानकारी
केस/याचिकारीतम सिंह (याचिकाकर्ता-व्यक्तिगत) बनाम गुवाहाटी हाईकोर्ट एवं अन्य
संबंधित अदालतगुवाहाटी उच्च न्यायालय (Gauhati High Court)
पीठ (Bench)न्यायमूर्ति माइकल ज़ोथनखुमा और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी
मुख्य कानून/नियमभारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 346(2) और हाईकोर्ट अधिसूचना
अदालत का निर्णयमांगें प्रशासनिक स्तर पर पूरी होने के कारण PIL बंद (Closed)।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
31 ° C
31 °
31 °
74 %
6.2kmh
99 %
Mon
31 °
Tue
34 °
Wed
34 °
Thu
32 °
Fri
34 °

Recent Comments