मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- आश्रम के संचालन पर सवाल: कोर्ट ने पाया कि इस बात की कोई स्पष्टता नहीं है कि वर्तमान में इस आश्रम को कौन चला रहा है और इसके संचालन के लिए धन (Funds) कहां से आ रहा है। पीठ ने कहा कि आश्रम के कामकाज की गहन जांच की जाएगी।
- सामान आश्रम में, महिला गायब: कोर्ट में मौजूद आश्रम की दो अनुयायियों ने दावा किया कि महिला अब वहां नहीं रह रही है, लेकिन उसका सारा सामान और बैग अभी भी आश्रम में ही रखा हुआ है।
- नशीली दवाएं देने का आरोप: पीड़िता के माता-पिता ने बताया कि वीडियो कॉल के दौरान उनकी बेटी बहुत कमजोर दिख रही थी और उसके मसूड़े काले पड़ चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उसे जबरन ड्रग्स दिए जा रहे हैं और उसकी मेडिकल जांच की मांग की।
- संस्थापक की मृत्यु का खुलासा: याचिका में संस्थापक वीरेंद्र देव दीक्षित को भगोड़ा बताया गया था, हालांकि सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने कोर्ट को सूचित किया कि संस्थापक की मृत्यु हो चुकी है।
- 100 से अधिक युवतियां अमानवीय स्थिति में: 2017 और 2022 की जांच रिपोर्टों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया गया कि आश्रम की विभिन्न शाखाओं में लगभग 100 लड़कियों को जानवर जैसी स्थितियों में बिना किसी गोपनीयता (Privacy) के रखा गया था।
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने रोहिणी स्थित विवादित ‘आध्यात्मिक विश्वविद्यालय’ (Adhyatmik Vidhyalya) आश्रम से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई एक महिला के मामले में दिल्ली पुलिस को गुमशुदगी का मामला दर्ज कर त्वरित जांच करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने 24 अगस्त को आदेश पारित करते हुए आश्रम के वर्तमान प्रबंधन और उसकी फंडिंग के स्रोतों की भी व्यापक जांच कराने की बात कही। लापता महिला के माता-पिता ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को आश्रम में अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया और उसे जबरन नशीले पदार्थ (Drugs) दिए गए [डुम्पाला मीनावती व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य]।
उच्च न्यायालय के प्रमुख निर्देश
पीठ ने आश्रम की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा: “हमारा यह मानना है कि इस आश्रम के मामलों और इसे जिस तरह से संचालित किया जा रहा है, उसकी गहन जांच और पड़ताल की आवश्यकता है।”
अदालत ने पुलिस जांच के संबंध में निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
- गुमशुदगी का मामला दर्ज करना: दिल्ली पुलिस को लापता महिला की तलाश के लिए तुरंत मामला दर्ज कर व्यापक जांच शुरू करने का आदेश दिया गया।
- SHO की व्यक्तिगत उपस्थिति: संबंधित पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी (SHO) को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।
Missing Women In Delhi: माता-पिता के गंभीर आरोप और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं
याचिकाकर्ता माता-पिता ने अदालत के समक्ष गंभीर विवरण प्रस्तुत किए:
- वीडियो कॉल और शारीरिक स्थिति: आश्रम के संस्थापक वीरेंद्र देव दीक्षित ने शुरू में वीडियो कॉल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। लगातार दबाव के बाद हुई एक वीडियो कॉल में माता-पिता ने पाया कि उनकी बेटी के मसूड़े काले पड़ चुके थे और वह अत्यधिक कमजोर व कुपोषित नजर आ रही थी।
- जबरन नशा देने का आरोप: परिजनों ने आरोप लगाया कि आश्रम में युवतियों को बंधक बनाकर नियंत्रित करने के लिए जबरन ड्रग्स दिए जाते हैं। उन्होंने बेटी की बरामदगी के बाद सरकारी अस्पताल में मेडिकल जांच कराने की मांग की।
- सामान आश्रम में, महिला लापता: अदालत में मौजूद आश्रम के दो अनुयायियों ने दावा किया कि महिला अब आश्रम में नहीं रह रही है, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि उसका सारा सामान और बैग अब भी आश्रम परिसर में ही रखा हुआ है।
संस्थापक की मृत्यु और आश्रम का विवादित इतिहास
- संस्थापक की मौत की पुष्टि: सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को सूचित किया कि फरार चल रहे आश्रम के मुख्य संस्थापक वीरेंद्र देव दीक्षित की मृत्यु हो चुकी है।
- 2017 व 2022 की जांच रिपोर्ट: वर्ष 2017 और 2022 में उच्च न्यायालय द्वारा गठित उच्चाधिकार समिति ने आश्रम में अमानवीय स्थितियों का खुलासा किया था। रिपोर्ट में पाया गया था कि करीब 100 लड़कियों को बिना किसी निजता के जानवरों जैसी परिस्थितियों में रखा गया था, जिनमें नाबालिग लड़कियां भी शामिल थीं।
- मई 2023 में CBI जांच: अदालत के आदेश पर मई 2023 में सीबीआई जांच शुरू की गई थी, लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अब तक आश्रम के अवैध संस्थागत ढांचे पर पूरी तरह लगाम नहीं लगाई जा सकी है।
अदालत का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली पुलिस को तुरंत मामला दर्ज करने का आदेश देते हुए कहा: “हमारी राय है कि इस आश्रम के मामलों और जिस तरह से इसे चलाया जा रहा है, उसकी जांच की जानी आवश्यक है। पुलिस तुरंत लापता महिला की तलाश के लिए जांच शुरू करे और संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारी (SHO) अगली सुनवाई पर जांच के नतीजे के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित रहें।”
31 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को तय की है, जिसमें पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट और आश्रम के वित्तीय स्रोतों व वर्तमान संचालकों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)
| विवरण | विवरण जानकारी |
| केस शीर्षक | डुम्पाला मीनावती एवं अन्य बनाम भारत संघ व अन्य (Dumpala Meenavathi & Anr. v. Union of India & Ors.) |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| पीठ (Bench) | मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया |
| संबंधित आश्रम | आध्यात्मिक विश्वविद्यालय (रोहिणी, दिल्ली) |
| आश्रम का संस्थापक | वीरेंद्र देव दीक्षित (CBI के अनुसार अब मृत) |
| अदालत का निर्देश | एफआईआर दर्ज कर पुलिस को जांच करने और थाना प्रभारी (SHO) को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का आदेश। |
| अगली सुनवाई | 31 अगस्त 2026 |

