Thursday, October 15, 2026
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Interim Maintenance: ₹1.7 करोड़ का होम लोन; घटी हुई सैलरी और शिक्षित पत्नी के बावजूद ₹2 लाख प्रति माह भरण-पोषण, कोर्ट का आदेश पढ़ें

कोर्ट का रुख और मुख्य निष्कर्ष (Key Legal Takeaways)

  • पुरानी कमाई और पद (Earning Capacity): कोर्ट ने पाया कि पति का पद कंपनी में वही बना हुआ है, जबकि उसका पिछला टैक्स रिकॉर्ड काफी अधिक था—आकलन वर्ष 2023-24 में लगभग ₹2 करोड़ और 2024-25 में ₹2.9 करोड़। कोर्ट ने माना कि अचानक सैलरी में भारी गिरावट का स्पष्टीकरण असंतोषजनक है और भरण-पोषण व्यक्ति की ‘कमाई की क्षमता’ (Earning Capacity) पर तय होता है।
  • बच्चों की स्कूल फीस पर्याप्त नहीं: जज पूनम कंवर ने स्पष्ट किया कि बच्चों के बोर्डिंग स्कूल की फीस देना एक अलग बात है, लेकिन उनके दैनिक खर्चों और पत्नी के जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए अलग से गुजारा भत्ता देना जरूरी है।
  • शिक्षित पत्नी को इनकार नहीं: कोर्ट और कानूनी विशेषज्ञों (करंजावाला एंड कंपनी की पार्टनर मनमीत कौर) के अनुसार, पत्नी का केवल ‘शिक्षित होना’ या ‘कमाने की क्षमता रखना’ उसे भरण-पोषण से वंचित करने का आधार नहीं है, जब तक कि वह वास्तव में कार्यरत और कमा न रही हो।
  • अंतरिम चरण में आरोपों की सीमा: पत्नी की संपत्ति छिपाने या विदेश यात्रा के दावों को कोर्ट ने अंतरिम चरण (Interim Stage) में बिना ठोस सबूतों के स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

गुरुग्राम: गुरुग्राम की एक फैमिली कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े भरण-पोषण (Maintenance) के एक महत्वपूर्ण मामले में व्यवस्था दी है कि केवल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में आय में अचानक गिरावट दर्शाने और भारी होम लोन देनदारियों का हवाला देकर पति गुजारा भत्ते की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।

प्रिंसिपल जज पूनम कंवर की अदालत ने पति के पिछले वर्षों के आयकर रिटर्न, संगठन में उसके वरिष्ठ पद और उसकी वास्तविक उपार्जन क्षमता (Earning Capacity) को आधार बनाते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने डेलॉइट (Deloitte) के एक वरिष्ठ कार्यकारी (Senior Executive) को अपनी अलग रह रही पत्नी और बच्चों के लिए ₹2 लाख प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

  • शादी और मांग: दंपति की शादी 12 जुलाई 2005 को लखनऊ में हुई थी और उनके जुड़वां बच्चे हैं। पत्नी ने शुरुआत में अपने और बच्चों के लिए ₹4 लाख प्रतिमाह भरण-पोषण और ₹7.5 लाख मुकदमे के खर्च की मांग की थी।
  • सैलरी में भारी गिरावट का दावा: पति ने तर्क दिया कि उसकी वार्षिक इनहैंड सैलरी घटकर लगभग ₹36 लाख रह गई है। उसने ₹1.7 करोड़ के होम लोन की किस्तें, माता-पिता की जिम्मेदारी और बच्चों के बोर्डिंग स्कूल की ₹19.2 लाख सालाना फीस का हवाला दिया।
  • शिक्षित पत्नी और विदेश यात्रा का आरोप: पति ने दावा किया कि पत्नी उच्च शिक्षित है और कमाने में सक्षम है। साथ ही आरोप लगाया कि पत्नी के पास PPF, FD जैसी अघोषित संपत्तियां हैं और वह जॉर्जिया जैसी जगह विदेश यात्राएं कर चुकी है।

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कोर्ट द्वारा ₹2 लाख भरण-पोषण तय करने के मुख्य आधार

1. आय में अचानक गिरावट पर अविश्वास अदालत ने पाया कि पति ने असेसमेंट ईयर 2023-24 में लगभग ₹2 करोड़ और 2024-25 में लगभग ₹2.9 करोड़ की आय घोषित की थी। चूंकि वह उसी कंपनी में उसी वरिष्ठ पद पर कार्यरत रहा, इसलिए आय में अचानक आई भारी गिरावट का उसका स्पष्टीकरण अदालत को संतोषजनक नहीं लगा। अदालत ने केवल चालू वर्ष के ITR के बजाय उसकी ऐतिहासिक कमाई और पद को आधार बनाया।

2. स्कूल फीस के अलावा भी होते हैं भरण-पोषण के खर्च अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों की केवल स्कूल फीस भर देने से पिता के सभी वित्तीय दायित्व समाप्त नहीं हो जाते। बच्चों के दैनिक जीवन, परवरिश और पत्नी के व्यक्तिगत भरण-पोषण का आकलन अलग से किया जाना अनिवार्य है।

3. शिक्षित होना भरण-पोषण से इनकार का आधार नहीं पति की इस दलील को अंतरिम स्तर पर खारिज कर दिया गया कि पत्नी पढ़ी-लिखी है और पूर्व में विदेश यात्राएं (जैसे जॉर्जिया यात्रा) कर चुकी है। अदालत ने स्थापित कानून के तहत माना कि केवल डिग्री होना या कमाने की क्षमता होना वास्तविक रोजगार या नियमित आय का प्रमाण नहीं है।

फैसले का कानूनी संदेश

  1. ITR ही अंतिम सत्य नहीं: यदि पद और कंपनी वही है और अचानक ITR में आय घटती है, तो अदालतें पिछली कमाई और क्षमता को आधार बनाएंगी।
  2. सक्षमता बनाम वास्तविक आय: पत्नी अगर काम नहीं कर रही है, तो केवल उसकी डिग्री के आधार पर पति अपनी जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकता।
  3. आरोप साबित करना जरूरी: किसी भी अघोषित संपत्ति या फिजूलखर्ची के दावों को अंतरिम सुनवाई में सीधे आधार नहीं बनाया जा सकता, जब तक कि उसका पुख्ता सबूत न हो।

कोर्ट का अंतिम आदेश

  • मासिक भरण-पोषण: पति को हर महीने की 10 तारीख तक ₹2,00,000 का भुगतान करना होगा।
  • शिक्षा खर्च: बच्चों के स्कूल की फीस का भुगतान अलग से जारी रहेगा।
  • मुकदमा खर्च: पति को मुकदमे के खर्च के रूप में पत्नी को एकमुश्त ₹50,000 देने का निर्देश दिया गया।

Interim Maintenance: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतफैमिली कोर्ट, गुरुग्राम (Gurugram Family Court)
पीठासीन न्यायाधीशप्रधान न्यायाधीश पूनम कंवर (Principal Judge Poonam Kanwar)
मामला/पक्षकारसीनियर कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव (पति) बनाम पत्नी
कोर्ट का अंतिम आदेश₹2 लाख/माह भरण-पोषण + बच्चों की स्कूल फीस + ₹50,000 मुकदमा खर्च
मुख्य कानूनी सिद्धांतकेवल नवीनतम ITR से कमाई तय नहीं होती; शिक्षित होने मात्र से पत्नी का गुजारा भत्ता रद्द नहीं हो सकता।
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