बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियां
- ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें’: हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाइयां आनुपातिक (Proportionate) होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा, “मच्छर को मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें… हमने आपसे कहा था कि अपनी कार्रवाइयों को नाप-तौल कर करें।”
- अवमानना की चेतावनी: जजों ने कहा कि यदि अदालती आदेशों के पालन न करने पर 1,000 अवमानना याचिकाएं दायर होती हैं, तो उनमें से 500 सरकार की अवज्ञा के कारण होती हैं। पीठ ने पूछा कि सहायक आयुक्त के खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए?
- सुधार को प्रोत्साहन मिले, तालाबंदी नहीं: कोर्ट ने जोर देकर कहा कि नियमन का उद्देश्य अनुपालन को प्रोत्साहित करना होना चाहिए, न कि तुरंत काम ठप कर देना।
मुंबई: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित क्लब परिसर के पांच प्रमुख भोजनालयों के फूड लाइसेंस को यांत्रिक (Mechanical) तरीके से निलंबित रखने पर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने अधिकारी की कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अवमानना (Contempt) की कार्यवाही शुरू करने की चेतावनी दी, जिसके बाद एफडीए ने निलंबन का आदेश वापस ले लिया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अनखड़ की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक प्राधिकारियों को “मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल” (Don’t kill a mosquito with a sword) नहीं करना चाहिए और कार्रवाई में आनुपातिकता (Proportionality) व विवेक का इस्तेमाल होना चाहिए।
उच्च न्यायालय की प्रमुख तल्ख टिप्पणियां
1. बिना दिमाग लगाए आदेश पारित करने पर फटकार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे ने एफडीए के असिस्टेंट कमिश्नर के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा: “अधिकारी ने अपने विवेक (Mind) का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? हमने आपसे व्यावहारिक (Pragmatic) दृष्टिकोण अपनाने को कहा था, न कि रूढ़िवादी (Pedantic)। आपके आदेश से लगता है कि आपको इस अदालत के आदेशों से कोई समस्या है। आप हमारे आदेशों का पालन क्यों नहीं कर सकते? हम असिस्टेंट कमिश्नर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू करें?”
2. हड़बड़ी और शक्ति के दुरुपयोग पर टिप्पणी अदालत ने अधिकारी की जल्दबाजी पर नाराजगी जताते हुए कहा: “इतनी जल्दबाजी क्यों? आप न हमारे आदेश पढ़ते हैं, न कानून पढ़ते हैं, न अपने नियम पढ़ते हैं। बस आप सीधे गोली चला देते हैं! क्या आप खुद को लॉर्ड (Lord) समझते हैं कि कुछ भी कर सकते हैं? हमने पहले भी कहा था—मच्छर मारने के लिए तलवार मत चलाइए।”
3. कारण बताने की अनिवार्यता और अवमानना का अंबार पीठ ने रेखांकित किया कि किसी भी प्रशासनिक आदेश में कारण (Reasons) दर्ज होना अनिवार्य है: “जब हम मामलों की सुनवाई करते हैं, तो कारण बताते हैं। यदि कारण बताना हाईकोर्ट के जजों पर लागू होता है, तो यह एफडीए के असिस्टेंट कमिश्नर पर भी लागू होता है। यदि अदालत में 1,000 अवमानना याचिकाएं दायर होती हैं, तो उनमें से 500 सरकार द्वारा अदालती आदेशों की अवज्ञा के कारण होती हैं।”
मामले की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
- 21 अगस्त का निलंबन: एफडीए ने बीकेसी स्थित शरद पवार इंडोर क्रिकेट अकादमी एवं रिक्रिएशन सेंटर में संचालित पांच आउटलेट्स—परमिट रूम, ओरिएंटल स्विंग, क्लबवे एंड पेस्ट्री काउंटर, मेडिटेरेनियन और पवेलियन—का लाइसेंस शुरुआती निरीक्षण के तुरंत बाद निलंबित कर दिया था।
- पुनः निरीक्षण में सब सही मिला: 25 अगस्त को हाईकोर्ट के निर्देश पर जब 29 अगस्त को दोबारा निरीक्षण रिपोर्ट पेश की गई, तो पाया गया कि सभी मानकों का अनुपालन पूरी तरह सही था।
- अधिकारी की मनमानी: इसके बावजूद एफडीए के असिस्टेंट कमिश्नर ने कानूनी प्रावधानों और अदालत के निर्देशों की अनदेखी करते हुए बिना कोई ठोस कारण बताए निलंबन बरकरार रखने का यांत्रिक आदेश जारी कर दिया।
- मानकों का पालन: 29 अगस्त को प्रस्तुत री-इंस्पेक्शन रिपोर्ट में पाया गया कि रेस्टोरेंट ने स्वच्छता के सभी मानकों का अनुपालन (Exemplary Compliance) किया था।
- बिना कारण का यांत्रिक आदेश: इसके बावजूद, FDA के सहायक आयुक्त (Assistant Commissioner) ने बिना विवेक का इस्तेमाल किए और बिना कोई स्पष्ट कारण दिए निलंबन बरकरार रखने का यांत्रिक आदेश पारित कर दिया।
एफडीए ने वापस लिया आदेश
जब खंडपीठ ने अधिकारी के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की चेतावनी दी, तो एफडीए का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सरकारी वकील प्रियभूषण काकडे ने अधिकारियों से परामर्श के बाद पीठ को सूचित किया कि एफडीए 21 अगस्त के लाइसेंस निलंबन आदेश को वापस ले रहा है और लाइसेंस बहाल कर दिए गए हैं।
अदालत के अन्य निर्देश और सुझाव
- नया नोटिस और अनुबंध की समीक्षा: अदालत ने एफडीए को निर्देश दिया कि वह यदि आवश्यक हो तो नया नोटिस जारी करे तथा एमसीए और उसके रियायतग्राही (Shirke Industries) के अनुबंधात्मक संबंधों का विधायी ढांचे के तहत मूल्यांकन करे।
- रेस्तरां के लिए पब्लिक फीडबैक वेबसाइट: सुनवाई के अंत में पीठ ने सुझाव दिया कि पश्चिमी देशों की तर्ज पर प्रमुख भोजनालयों के लिए समर्पित वेब पेज या सोशल मीडिया हैंडल अनिवार्य किए जाएं, ताकि आम नागरिक भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर पारदर्शी समीक्षा (Reviews) अपलोड कर सकें।
हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणी
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे ने सुनवाई के दौरान कहा: “आप लोगों को इतनी जल्दबाजी क्यों है? क्या आपको हाई कोर्ट के आदेशों से कोई समस्या है? आप हमारा आदेश नहीं समझते, न ही कानून या अपने नियमों को पढ़ते हैं, बस गोली चला देते हैं! क्या आप सोचते हैं कि आप कोई भगवान हैं और कुछ भी कर सकते हैं? जब हाईकोर्ट के जजों को फैसले में कारण बताने पड़ते हैं, तो यह बात FDA के सहायक आयुक्त पर भी निश्चित रूप से लागू होती है।”
Court On FDA Action: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Order)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) |
| पीठासीन पीठ | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे एवं न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखाड |
| याचिकाकर्ता | मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (Mumbai Cricket Association) |
| केस शीर्षक | Mumbai Cricket Association v. State of Maharashtra & Ors. |
| अदालत का फैसला | FDA द्वारा 5 रेस्टोरेंट के लाइसेंस का निलंबन रद्द; अवमानना की चेतावनी के बाद आदेश वापस लिया गया। |

