Sunday, August 30, 2026
HomeConsumer NewsCourt On FDA Action-I: सरकारी छुट्टी के दिन सुनवाई का नोटिस देना...

Court On FDA Action-I: सरकारी छुट्टी के दिन सुनवाई का नोटिस देना कहां तक उचित?: सिप्ला का दवा लाइसेंस रद्द करने पर FDA को फटकार

बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियां

  • प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: न्यायमूर्ति गौतम अंखाड ने FDA की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि प्राकृतिक न्याय के नियमों के उल्लंघन को देखते हुए उनका यह आदेश कैसे टिक सकता है?
  • सरकारी छुट्टी पर नोटिस: पीठ ने FDA से कहा कि जब न्याय होना ही नहीं, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए, तो छुट्टी के दिन ऑफिस बंद होने के बावजूद सुनवाई की तारीख देना निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया कैसे हो सकती है?
  • आदेश वापस और नई समय-सीमा: हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद राज्य सरकार के वकील ने आदेश वापस लेने का बयान दिया। कोर्ट ने FDA को निर्देश दिया कि जब तक कोई बहुत बड़ी आपातस्थिति न हो, सार्वजनिक छुट्टियों पर सुनवाई न की जाए। FDA अब 4 सितंबर 2026 से पहले सिप्ला को नया नोटिस जारी कर कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगा।

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 29 अगस्त 2026 को प्रमुख फार्मास्युटिकल कंपनी ‘सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड’ (Cipla Pharma & Life Sciences Limited) के थोक दवा बिक्री लाइसेंस को मनमाने और जल्दबाजी में रद्द करने के लिए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) को कड़ी फटकार लगाई है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अनखड़ की खंडपीठ ने नियामक संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों की अनदेखी कर छुट्टियां वाले दिन आनन-फानन में सुनवाई करना और लाइसेंस रद्द करना पूरी तरह अनुचित व तानाशाहीपूर्ण (High-handed) है। अदालत के सख्त रुख के बाद राज्य सरकार के वकील ने लाइसेंस निरस्तीकरण के आदेश को तुरंत वापस लेने की सहमति दी।

उच्च न्यायालय की प्रमुख तल्ख टिप्पणियां

छुट्टी के दिन सुनवाई रखने और कार्यालय बंद होने पर अदालत ने कहा: “26 अगस्त को राज्य में सरकारी अवकाश था और आपका कार्यालय खुला नहीं था, फिर भी आपने उसी दिन सुनवाई का नोटिस थमा दिया। यह कैसे उचित, निष्पक्ष और पारदर्शी हो सकता है? हम आपसे बार-बार यही कह रहे हैं—आप सराहनीय काम कर रहे हैं, लेकिन अपनी सीमाओं से बाहर (Overboard) जाकर काम कर रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।”

प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन पर पीठ ने रेखांकित किया: “जैसा कि अक्सर कहा जाता है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। हमें दिखाइए कि आपने उन्हें सुनवाई के लिए पर्याप्त समय कब दिया? आपने गलत प्रक्रिया अपनाई है। प्राकृतिक न्याय के सीधे उल्लंघन के मद्देनजर आपका यह आदेश कानूनी रूप से कैसे टिक सकता है?”

Also Read; Court On FDA Action: क्या आप खुद को लॉर्ड समझते हैं?; MCA के 5 भोजनालयों का लाइसेंस सस्पेंड करने पर FDA अधिकारी को फटकारा, यह पढ़ें

मामले की पृष्ठभूमि और विवाद

  • पुणे वेयरहाउस का महत्व: सिप्ला ने पुणे के वाडकी स्थित अपने प्राथमिक वितरण केंद्र के लाइसेंस रद्द होने के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। कंपनी ने दलील दी कि यह डिस्ट्रीब्यूशन हब लगभग 180 प्रमुख ग्राहकों को सेवाएं देता है और पूरे महाराष्ट्र में प्रतिमाह 4,30,000 से अधिक दवाइयों की यूनिट्स का वितरण करता है।
  • विवाद की वजह: एफडीए ने जून और अगस्त में वाडकी केंद्र का निरीक्षण किया था और ‘रिएक्टिन प्लस’ (Reactin Plus) नामक दवा की पैकेजिंग और आर्टवर्क में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए 13 अगस्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
  • जल्दबाजी में कार्रवाई: सिप्ला ने 25 अगस्त को विस्तृत जवाब दाखिल किया। एफडीए ने कंपनी को अगले ही दिन 26 अगस्त (जो कि सरकारी अवकाश था) व्यक्तिगत सुनवाई के लिए तलब कर लिया। जब कंपनी का कर्मचारी केवल सुनवाई स्थगित (Adjournment) करने का लिखित आवेदन देने पहुंचा, तो एफडीए ने सीधे लाइसेंस रद्द करने का अंतिम आदेश थमा दिया।
  • सप्लाई नेटवर्क पर असर: सिप्ला के पुणे गोदाम से महीने में लगभग 4,30,000 दवा इकाइयां वितरित की जाती हैं और इससे महाराष्ट्र भर के लगभग 180 ग्राहक/सप्लायर जुड़े हुए हैं।
  • छुट्टी के दिन सुनवाई: 13 अगस्त को कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद सिप्ला ने 25 अगस्त को जवाब दिया। FDA ने कंपनी को 26 अगस्त को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया, जो कि राज्य में सरकारी छुट्टी (State Holiday) का दिन था।
  • एकतरफा आदेश: जब सिप्ला का एक कर्मचारी केवल सुनवाई स्थगित करने की लिखित अर्जी देने FDA कार्यालय पहुंचा, तो अधिकारियों ने बिना सुनवाई का मौका दिए सीधे लाइसेंस रद्द करने का अंतिम आदेश थमा दिया।

अदालत का रुख और एफडीए का फैसला

सुनवाई के दौरान अदालत की नाराजगी को देखते हुए:

  • आदेश वापस लिया गया: सरकारी वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि एफडीए लाइसेंस रद्द करने के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले रहा है।
  • नया नोटिस जारी होगा: प्राधिकरण 4 सितंबर से पहले कंपनी को नियमों के तहत एक नया और उचित नोटिस जारी करेगा।
  • सार्वजनिक अवकाश पर सुनवाई न करने की हिदायत: हाईकोर्ट ने विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक कोई बहुत बड़ी आपात स्थिति न हो, तब तक सार्वजनिक अवकाश (Public Holidays) पर ऐसी किसी भी सुनवाई का आयोजन न किया जाए।

हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणी

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे ने सुनवाई के दौरान कहा: “सुनवाई का नोटिस 26 अगस्त को एक सरकारी छुट्टी के दिन दिया गया जब आपका अपना कार्यालय ही नहीं खुला था। यह कैसे उचित, निष्पक्ष और पारदर्शी है? आप सराहनीय काम कर रहे हैं, लेकिन अपनी सीमाओं से बाहर जाकर काम कर रहे हैं। और यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है। आपने गलत प्रक्रिया अपनाई है और मनमाने ढंग से कार्रवाई की है।”

विधिक प्रतिनिधित्व

  • सिप्ला फार्मा की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा और अधिवक्ता रंजीत सांगले।
  • महाराष्ट्र एफडीए की ओर से: सरकारी वकील पी. पी. काकड़े।

Court On FDA Action-I: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Order)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court)
पीठासीन पीठकार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे एवं न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखाड
याचिकाकर्तासिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज (Cipla Pharma and Life Sciences)
केस शीर्षकCipla Pharma and Life Sciences v. State of Maharashtra & Ors.
अदालत का फैसलाFDA ने लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस लिया; कंपनी को नया नोटिस देने का अवसर।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
30 ° C
30 °
30 °
84 %
0kmh
100 %
Sun
36 °
Mon
30 °
Tue
32 °
Wed
29 °
Thu
27 °

Recent Comments