पृष्ठभूमि और विवाद
- विवादित बयान: मई 2025 में रिपब्लिक टीवी पर एक डिबेट शो के दौरान अमित मालवीय ने कथित तौर पर बयान दिया था कि तुर्की स्थित ‘इस्तांबुल कांग्रेस सेंटर’ (Istanbul Congress Centre) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का एक कार्यालय था।
- शिकायत व प्राथमिकी: इस बयान के बाद इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के लीगल सेल प्रमुख श्रीकांत स्वरूप बी.एन. की शिकायत पर अर्नब गोस्वामी और अमित मालवीय के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी।
- अंतरिम राहत: याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख कर एफआईआर को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और निराधार बताया था। मई 2025 में हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी थी।
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी और भाजपा आईटी सेल के पूर्व प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ कांग्रेस नेता की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द करने की याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली है।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणा श्याम ने अर्नब गोस्वामी के प्रसिद्ध टीवी कैचफ्रेज का संदर्भ देते हुए बहस की, जिस पर अदालत में हल्का-फुल्का माहौल बन गया। अदालत ने मामले में आदेश सुनाने के लिए 3 सितंबर की तारीख तय की है और तब तक दोनों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी।
कोर्ट में दिलचस्प दलील: ‘The Nation Wants to Know’
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणा श्याम ने मामले के मूल बिंदु पर सवाल उठाते हुए दलील दी: “विचार के लिए संक्षिप्त बिंदु यह है कि इस तरह के मामलों में एफआईआर कैसे दर्ज की जा सकती है, ‘द नेशन वॉन्ट्स टू नो’ (The Nation Wants to Know)?”
वरिष्ठ वकील ने पूर्व की सुनवाई में तर्क दिया था कि गोस्वामी और मालवीय के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायतें पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित हैं।
मामले की पृष्ठभूमि और विवाद
- मई 2025 का विवाद: यह मामला रिपब्लिक टीवी पर प्रसारित एक लाइव डिबेट से जुड़ा है, जिसमें अमित मालवीय ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि तुर्की स्थित ‘इस्तांबुल कांग्रेस सेंटर’ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक कार्यालय है।
- कांग्रेस नेता की शिकायत: इस बयान के खिलाफ भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के लीगल सेल प्रमुख श्रीकांत स्वरूप बी.एन. ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर अर्नब गोस्वामी और अमित मालवीय के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
- हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम राहत: एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया था। हाईकोर्ट ने मई 2025 में ही उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
राज्य सरकार की ओर से राज्य लोक अभियोजक (SPP) बी.एन. जगदीश और याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकील की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा: “विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता और एसपीपी को सुना गया। आदेश 3 सितंबर को सुनाने के लिए सूचीबद्ध किया जाता है। मामले में लागू अंतरिम आदेश अगली सुनवाई की तारीख तक जारी रहेगा।”
अदालत की कार्यवाही
राज्य सरकार की ओर से विशेष सार्वजनिक अभियोजक (SPP) बी.एन. जगदीश और याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणि श्याम की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा: “विद्वान वरिष्ठ वकील और एसपीपी को सुना गया। 3 सितंबर को आदेश तय करने के लिए मामला सूचीबद्ध किया जाता है। तब तक मौजूदा अंतरिम आदेश (Stay) प्रभावी रहेगा।”
केस विवरण
- केस शीर्षक: अमित मालवीय बनाम कर्नाटक राज्य एवं अर्नब गोस्वामी बनाम कर्नाटक राज्य
- अगली तारीख: 3 सितंबर 2026 (आदेश सुनाए जाने के लिए)।
Arnab Goswami: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Hearing)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कर्नाटका उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना (Justice M Nagaprasanna) |
| याचिकाकर्ता | अमित मालवीय और अर्नब गोस्वामी (Amit Malviya & Arnab Goswami) |
| केस शीर्षक | Amit Malviya v. State of Karnataka / Arnab Goswami v. State of Karnataka |
| अगली तिथि/फैसला | 3 सितंबर 2026 को आदेश सुनाया जाएगा; तब तक अंतरिम रोक (Stay) जारी रहेगी। |

