मुख्य मांग
- इलेक्ट्रॉनिक चालान/निगरानी का मुद्दा: वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कोर्ट को बताया कि इलेक्ट्रॉनिक निगरानी (Electronic Surveillance) से जुड़े मामलों (जैसे ट्रैफिक चालान या छोटे अपराध) में पुलिस पोर्टल पर 60 दिनों तक शमन (Compounding) की सुविधा मिलती है।
- ई-कोर्ट्स पोर्टल पर तकनीकी बाधा: 60 दिन बीत जाने के बाद जब केस स्वतः ई-कोर्ट्स पोर्टल (e-Courts Portal) पर ट्रांसफर हो जाता है, तो वहां शमन (Compounding) को दर्ज करने का स्पष्ट विकल्प नहीं मिलता।
- जरूरी तकनीकी बदलाव: याचिका में मांग की गई कि पोर्टल में सिर्फ एक अतिरिक्त एंट्री/ऑप्शन (‘Insertion’) जोड़ने की जरूरत है, जिससे जुर्माना या कंपाउंडिंग फीस जमा होते ही स्टेटस “Not Guilty” / “Compounded” के रूप में दिखाई दे।
- हाईकोर्ट की सिफारिशें: उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2024 में एक उच्च न्यायालय द्वारा भेजी गई सिफारिशों को ई-कमेटी ने दो बार मंज़ूरी दी थी, लेकिन पोर्टल में बदलाव का काम अभी भी “विचारणाधीन” पड़ा हुआ है। ई-अदालतों के सुचारू संचालन के लिए इसे लागू करना बेहद महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रोसेस होने वाले मुकदमों में अपराधों के शमन (Compounding of Offences / समझौते या जुर्माने के जरिए केस निस्तारण) की सुविधा जोड़ने के लिए अपनी ‘ई-कमेटी’ (e-Committee) को आवश्यक तकनीकी बदलाव करने पर विचार करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने प्रभजोत सिंह ढिल्लों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि ई-कोर्ट्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुगम बनाने के लिए पोर्टल में जरूरी सुधार किए जाने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
पीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश देते हुए कहा: “रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह इस मामले से संबंधित सभी दस्तावेजों का पूरा सेट सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी (e-Committee) को विचारार्थ भेजे, ताकि कमेटी पोर्टल में आवश्यक तकनीकी सुधार और संशोधन करने का प्रयास कर सके।”
याचिकाकर्ता की दलीलें और तकनीकी समस्या
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने ई-कोर्ट्स पोर्टल में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को पीठ के समक्ष रखा:
- इलेक्ट्रॉनिक चालान और पुलिस पोर्टल: इलेक्ट्रॉनिक निगरानी (Electronic Surveillance/CCTV/E-Challan) के तहत होने वाले अपराधों में कंपाउंडिंग की प्रक्रिया पुलिस पोर्टल पर 60 दिनों तक चलती है।
- 60 दिनों के बाद ई-कोर्ट्स पोर्टल पर ट्रांसफर: 60 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद यह मामला स्वतः ई-कोर्ट्स पोर्टल पर स्थानांतरित हो जाता है।
- पोर्टल में एक संशोधन की आवश्यकता: वर्तमान में ई-कोर्ट्स पोर्टल में ऐसा कोई सीधा विकल्प नहीं है जिससे मामले को ‘कंपाउंड’ (Compounded) के रूप में दर्ज किया जा सके और रिकॉर्ड में यह प्रदर्शित हो कि व्यक्ति दोषी नहीं है (Reflected as Not Guilty)। पोर्टल में केवल एक तकनीकी प्रविष्टि (Insertion) जोड़ने की जरूरत है।
- हाईकोर्ट की पूर्व सिफारिशें: वरिष्ठ अधिवक्ता ने रेखांकित किया कि वर्ष 2024 में एक उच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में की गई सिफारिशों को समिति ने दो बार सैद्धांतिक मंजूरी दी थी, लेकिन तकनीकी सुधार अब तक लंबित था। ई-कोर्ट्स के सुचारू संचालन और नागरिकों की सहूलियत के लिए यह बदलाव अत्यंत आवश्यक है।
महत्व
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद यदि ई-कमेटी ई-कोर्ट्स पोर्टल में कंपाउंडिंग की सुविधा जोड़ देती है, तो ट्रैफिक चालान और अन्य छोटे-मोटे अपराधों का निपटारा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सीधे हो सकेगा। इससे अदालतों पर बढ़ते मुकदमों का बोझ कम होगा और आम नागरिकों को बिना अदालत के चक्कर काटे ऑनलाइन केस निस्तारण की सुविधा मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
याचिकाकर्ता की दलीलों से सहमति व्यक्त करते हुए शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा: “रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह इस याचिका से संबंधित सभी दस्तावेज़ों का पूरा सेट इस अदालत की ई-कमेटी को भेजे, ताकि कमेटी इस पर विचार कर सके और पोर्टल में आवश्यक सुधार/संशोधन करने का प्रयास करे।”
E-Courts Portal: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Order)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठासीन पीठ | CJI सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना |
| मुख्य विषय | ई-कोर्ट्स पोर्टल पर अपराधों के शमन (Compounding) की सुविधा |
| निर्देश | सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी पोर्टल में आवश्यक तकनीकी सुधार और संशोधन करे |
| याचिकाकर्ता की ओर से | वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह |

