Thursday, October 15, 2026
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Unpaid Fees: क्या फीस बकाया होने पर कॉलेज आपके ओरिजिनल सर्टिफिकेट रोक सकता है?; जानिए तेलंगाना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • सर्टिफिकेट छात्र की संपत्ति हैं: हाईकोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक प्रमाण पत्र छात्र की व्यक्तिगत और शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज हैं, जिन पर सिर्फ छात्र का मालिकाना हक है।
  • बकाया वसूली का तरीका गलत: अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कॉलेज का छात्र पर कोई वित्तीय बकाया है, तो वह उसे वसूलने के लिए अलग से कानूनी प्रक्रिया अपना सकता है। लेकिन बकाया वसूली के लिए सर्टिफिकेट जब्त करना कानूनन पूरी तरह गलत है।
  • तत्काल डॉक्यूमेंट लौटाने का आदेश: कोर्ट ने छात्रों के भविष्य और एडमिशन की अंतिम तिथि को देखते हुए कॉलेज को आदेश दिया कि फैसले की प्रति मिलते ही बिना किसी देरी के मूल प्रमाण पत्र वापस किए जाएं।

हैदराबाद: तेलंगाना हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों द्वारा फीस बकाए के नाम पर छात्रों के मूल दस्तावेज रोके जाने की प्रथा पर कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति जुव्वाडी श्रीदेवी की एकल पीठ ने बीटेक छात्रों द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए 21 अगस्त को यह आदेश पारित किया। अदालत ने एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज को निर्देश दिया कि वह तीन बीटेक (B.Tech) स्नातकों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र (Original Certificates) तुरंत लौटाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक प्रमाण पत्र छात्रों की निजी संपत्ति हैं और किसी भी बकाया राशि की वसूली के लिए संस्थान इन्हें बंधक नहीं बना सकते।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

शैक्षणिक दस्तावेजों के मालिकाना हक और कॉलेज के अधिकार क्षेत्र पर अदालत ने कहा: “उक्त प्रमाण पत्र, व्यक्तिगत और शैक्षणिक साख (Credentials) होने के नाते, निस्संदेह याचिकाकर्ताओं की संपत्ति हैं। ऐसी परिस्थितियों में कॉलेज के पास उक्त प्रमाण पत्रों को अपने पास रखने का कोई अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं के मूल प्रमाण पत्रों को अपने पास रोके रखना पूरी तरह से अनुचित और कानूनन अस्वीकार्य है।”

बकाया फीस वसूली के तरीके पर पीठ ने रेखांकित किया: “यदि कॉलेज का याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई वित्तीय दावा (Monetary Claim) बनता भी है, तो भी उनके मूल प्रमाण पत्रों को रोके रखने का उपयोग कथित बकाए की वसूली के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता है। कॉलेज इसके बजाय वसूली के लिए उचित कानूनी कार्यवाही कर सकता है। इस प्रकार का प्रतिधारण (Retention) गैरकानूनी है और इसे किसी भी वित्तीय देनदारी के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।”

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मामले की पृष्ठभूमि

  • एडमिशन के समय जमा कराए दस्तावेज: छात्रों ने बी.टेक में प्रवेश के दौरान 10वीं का सर्टिफिकेट (SSC), डिप्लोमा मार्क्स मेमो, प्रोविजनल व कंसोलिडेटेड सर्टिफिकेट, जाति प्रमाण पत्र और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) कॉलेज में जमा कराए थे।
  • सर्टिफिकेट रोकने की वजह: 2025 में कोर्स पूरा होने के बाद जब छात्रों ने आगे की पढ़ाई के लिए ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स मांगे, तो कॉलेज ने सरकारी फीस रीइम्बर्समेंट पेंडिंग होने का हवाला देकर देने से इनकार कर दिया और रिलीज के लिए ₹70,000 की मांग की।
  • एक साल का नुकसान: छात्रों का एक शैक्षणिक वर्ष पहले ही खराब हो चुका था और 2026 में उच्च शिक्षा (Postgraduate Courses) के एडमिशन बंद होने में महज 3 दिन बचे थे। एआईसीटीई (AICTE) और मानवाधिकार आयोग से राहत न मिलने पर छात्रों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
  • दस्तावेजों को रोके जाने का विवाद: याचिकाकर्ताओं ने 2025 में अपना बीटेक कोर्स पूरा किया था। प्रवेश के समय उन्होंने एसएससी (10वीं), डिप्लोमा मार्क्स मेमो, प्रोविजनल सर्टिफिकेट, जाति प्रमाण पत्र और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) जमा किए थे।
  • सरकार से रीइंबर्समेंट में देरी का हवाला: कोर्स पूरा होने के बाद जब छात्रों ने उच्च शिक्षा के लिए मूल दस्तावेज मांगे, तो कॉलेज ने यह कहते हुए प्रमाण पत्र रोक लिए कि सरकार की ओर से ट्यूशन-फीस प्रतिपूर्ति (Reimbursement) का पैसा अभी कॉलेज को नहीं मिला है। कॉलेज ने दस्तावेज जारी करने के लिए प्रत्येक छात्र से ₹70,000 की मांग की।
  • साल बर्बाद होने का जोखिम: याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे पहले ही एक शैक्षणिक वर्ष गंवा चुके हैं और शैक्षणिक सत्र 2026 के लिए स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया बंद होने की कगार पर है। यदि मूल प्रमाण पत्र तुरंत नहीं मिले, तो उनकी उच्च शिक्षा का अवसर हमेशा के लिए छिन जाएगा।

हाईकोर्ट द्वारा दिए गए मुख्य आधार

  1. सर्टिफिकेट पर छात्र का विशेषाधिकार: मूल प्रमाण पत्र छात्र की निजी संपत्ति हैं, जिन पर कॉलेज का कोई धारणाधिकार (Lien) या बंधक का अधिकार नहीं बनता।
  2. वसूली के लिए कानूनी रास्ता खुला: यदि कॉलेज की कोई फीस लंबित है, तो वह उचित विधिक मंच पर जाकर रिकवरी का वाद दायर कर सकता है, लेकिन छात्रों का करियर दांव पर लगाकर दस्तावेज नहीं रोक सकता।
  3. गैरकानूनी और मनमाना कृत्य: फीस रीइंबर्समेंट योजना के तहत सरकार और कॉलेज के बीच की प्रक्रियात्मक देरी का खामियाजा छात्रों पर नहीं डाला जा सकता।

तेलंगाना हाईकोर्ट की टिप्पणी

न्यायमूर्ति जुव्वाड़ी श्रीदेवी ने आदेश पारित करते हुए कहा: “उक्त प्रमाण पत्र, व्यक्तिगत और शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज होने के नाते, निस्संदेह याचिकाकर्ताओं (छात्रों) की संपत्ति हैं। ऐसी परिस्थितियों में, कॉलेज के पास इन प्रमाण पत्रों को अपने पास रखने का कोई अधिकार नहीं है। बकाया देनदारी के आधार पर शैक्षणिक दस्तावेजों को रोकना गैर-कानूनी है और इसे किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

अंतिम आदेश

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने कॉलेज की कार्रवाई को अवैध घोषित करते हुए निर्देश दिया कि वह आदेश की प्रति प्राप्त होते ही याचिकाकर्ता छात्रों के सभी मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से वापस करे।

विधिक प्रतिनिधित्व

  • याचिकाकर्ता (छात्रों) की ओर से: अधिवक्ता मोहम्मद लतीफ खान।

Unpaid Fees:एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालततेलंगाना उच्च न्यायालय (Telangana High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति जुव्वाड़ी श्रीदेवी (Justice Juvvadi Sridevi)
मामलाबी.टेक छात्रों के ओरिजिनल शैक्षणिक सर्टिफिकेट कॉलेज द्वारा रोके जाना
कॉलेज का तर्कसरकार से ट्यूशन फीस प्रतिपूर्ति (Fee Reimbursement) का बकाया होना
अदालत का फैसलासर्टिफिकेट छात्रों की निजी संपत्ति हैं; बकाया वसूली के लिए इन्हें रोकना गैर-कानूनी है।
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