Wednesday, October 28, 2026
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Pensionary Benefit: मृतक कर्मचारी की दोनों पत्नियों को मिलेगी बराबर फैमिली पेंशन; नामांकित दूसरी पत्नी को ग्रेच्युटी, हाईकोर्ट का आदेश पढ़िए

मुख्य निष्कर्ष और कानूनी आधार

  1. विवाह की वैधता तय करना संविधान के अनुच्छेद 226 का दायरा नहीं: कोर्ट ने कहा कि रिट क्षेत्राधिकार के तहत यह तय करना उसका काम नहीं है कि कौन सा विवाह कानूनी रूप से बना रहना चाहिए और कौन सा समाप्त।“भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए, यह अदालत को तय नहीं करना है कि मृत कर्मचारी के दो विवाहों में से कौन सा अस्तित्व में रहना चाहिए।”
  2. CCS (Pension) Rules, 2021 का नियम 50(8)(c): अदालत ने सेवा नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी मृतक कर्मचारी की दो पत्नियां हैं, तो पारिवारिक पेंशन दोनों के बीच समान रूप से विभाजित होगी।
  3. ग्रेच्युटी और नामांकन (Nomination): केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के तहत कर्मचारी को जीवनकाल में अपनी ग्रेच्युटी के लिए नामांकित व्यक्ति चुनने का अधिकार होता है। चूंकि कर्मचारी ने दूसरी पत्नी को नामांकित किया था, इसलिए पूरी ग्रेच्युटी की हकदार वही होगी।
  4. अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment): कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दोनों पत्नियों द्वारा दी गई अनुकंपा नियुक्ति की अर्जियों पर नियमानुसार विचार किया जाए और जो भी पात्र पाई जाए, उसे नियुक्ति दी जाए।

कोलकाता: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के एक दिवंगत कर्मचारी के पेंशनरी लाभों (Pensionary Benefits) के विवाद पर फैसला सुनाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मृतक की पहली पत्नी को पारिवारिक पेंशन (Family Pension) का आधा हिस्सा जारी किया जाए। वहीं, अदालत ने यह भी व्यवस्था दी कि ग्रेच्युटी (Gratuity) की पूरी राशि दूसरी पत्नी को मिलेगी, क्योंकि दिवंगत कर्मचारी ने सेवा रिकॉर्ड में उसे इसके लिए नामांकित (Nominate) किया था।

न्यायमूर्ति रीतोब्रतो कुमार मित्रा की एकल पीठ ने रीना यास्मीन (पहली पत्नी) द्वारा दायर रिट याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश पारित किया।

उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां

1. अनुच्छेद 226 के तहत विवाह की वैधता तय नहीं की जा सकती दोनों शादियों की कानूनी वैधता पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया: “भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए यह तय करना इस अदालत का काम नहीं है कि दिवंगत कर्मचारी के दो विवाहों में से कौन-सा विवाह कानूनी रूप से बना रहेगा और किसे समाप्त माना जाए।”

2. पेंशन नियमों के तहत बराबर हिस्सेदारी का प्रावधान अदालत ने ‘केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2021’ [CCS (Pension) Rules, 2021] के नियम 50(8)(c) का हवाला दिया, जो यह प्रावधान करता है कि यदि किसी दिवंगत कर्मचारी की दो पत्नियां हैं, तो पारिवारिक पेंशन दोनों के बीच बराबर-बराबर (समान अनुपात में) बांटी जाएगी।

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मामले की पृष्ठभूमि और विवाद

  • कर्मचारी की मृत्यु और लाभों पर रोक: केंद्र सरकार के कर्मचारी की वर्ष 2024 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद पहली पत्नी (रीना यास्मीन) और दूसरी पत्नी (प्रतिवादी संख्या 7) दोनों ने पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के लिए आवेदन किया, जिसके चलते विभाग ने सभी लाभ रोक दिए थे।
  • तलाक के प्रमाण पत्र पर विवाद: अधिकारियों के समक्ष पहली शादी का एक तलाक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, याचिकाकर्ता (पहली पत्नी) का तर्क था कि चूंकि उनका विवाह ‘विशेष विवाह अधिनियम’ (Special Marriage Act) के तहत पंजीकृत हुआ था, इसलिए काजी द्वारा जारी तलाक प्रमाण पत्र को बाद में संबंधित काजी ने ही शून्य और अमान्य (Null and Void) घोषित कर दिया था।
  • विवाद की शुरुआत: केंद्रीय भूजल बोर्ड (Central Ground Water Board) के कर्मचारी का 2024 में सेवा के दौरान निधन हो गया था। उसकी पहली पत्नी रीना यासमीन ने पेंशन, ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के लिए आवेदन किया।
  • दूसरी पत्नी का दावा: दूसरी पत्नी (प्रतिवादी संख्या 7) ने भी पारिवारिक पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा किया, जिसके बाद अधिकारियों ने पेंशन रोक दी।
  • तलाक प्रमाणपत्र का विवाद: अधिकारियों के समक्ष पहली पत्नी से संबंधित एक काजी द्वारा जारी तलाक प्रमाणपत्र रखा गया था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने बताया कि जब काजी को पता चला कि पहला विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट (Special Marriage Act) के तहत पंजीकृत हुआ था, तो उसने उस तलाक प्रमाणपत्र को अमान्य और शून्य घोषित कर दिया था।

हाईकोर्ट का अंतिम निर्देश

  1. फैमिली पेंशन (50-50% बंटवारा): हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति मिलने के 6 सप्ताह के भीतर रीना यास्मीन (पहली पत्नी) को पारिवारिक पेंशन का आधा हिस्सा (50%) भुगतान किया जाए। शेष आधा हिस्सा दूसरी पत्नी को मिलेगा।
  2. ग्रेच्युटी का भुगतान: चूंकि दिवंगत कर्मचारी ने ग्रेच्युटी के लिए आधिकारिक रूप से अपनी दूसरी पत्नी को नामांकित किया था, इसलिए लागू नियमों के अनुसार ग्रेच्युटी की पूरी राशि दूसरी पत्नी को ही दी जाएगी।
  3. अनुकंपा नियुक्ति पर निर्णय: अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दोनों पत्नियों द्वारा अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए दिए गए आवेदनों पर कानून और पात्रता के अनुसार विचार किया जाए, और यदि कोई एक पात्र पाई जाती है तो उसे नियुक्ति दी जाए।

Pensionary Benefit: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
मामला / केस शीर्षकरीना यासमीन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य (WPA 1062 of 2025)
संबंधित कोर्टकलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति ऋतोब्रतो कुमार मित्रा
मृतक कर्मचारीसेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) के कर्मचारी (निधन वर्ष 2024)
लागू नियमकेंद्रीय सिविल सेवाएं (पेंशन) नियम, 2021 [Central Civil Services (Pension) Rules, 2021 – Rule 50(8)(c)]
कोर्ट का आदेश• पहली पत्नी को पारिवारिक पेंशन का 50% हिस्सा 6 सप्ताह के भीतर जारी किया जाए।
• ग्रेच्युटी नामित (दूसरी पत्नी) को मिलेगी।
• अनुकंपा नियुक्ति की अर्जियों पर कानूनन फैसला लिया जाए।
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