हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणियां
- “क्या आपकी अपनी बेटियों के लिए अनुच्छेद 21 लागू होता है, उनके लिए नहीं?”: वीडियो की भाषा और वॉइस-ओवर पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पीठ ने कहा:“प्रोग्राम में बैकग्राउंड आवाज आपकी है। आपने कहा कि उपमुख्यमंत्री कलेक्टर के साथ प्यार में हैं। क्या यह ठीक होता अगर कोई आपके घर की बेटियों के बारे में ऐसा बोलता? क्या संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने और गरिमा का अधिकार) की सुरक्षा केवल आपको प्राप्त है? क्या उन्हें नहीं?”
- महिला अधिकारियों की गरिमा का सम्मान: कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक बैठकों और काम के सिलसिले में एक महिला अधिकारी और मंत्री का संवाद होना स्वाभाविक है।“कलेक्टर ने क्या पाप किया है? क्या महिला होना गलत है? यदि कोई मंत्री बैठक में बुलाता है, तो क्या उन्हें नहीं जाना चाहिए? क्या उन्हें मंत्री की तारीफ नहीं करनी चाहिए?”
- व्यूज और टीआरपी के लिए दूसरों के घर तोड़ने का प्रयास: अदालत ने कहा कि केवल ऑनलाइन एंगेजमेंट और व्यूज हासिल करने के लिए दूसरों की गरिमा और परिवार के बच्चों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक असर की परवाह किए बिना ऐसी सामग्री बनाना बेहद निंदनीय है।
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक यूट्यूब चैनल पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर और तुमकुरु की महिला जिला कलेक्टर (IAS) शुभा कल्याण के बीच कथित प्रेम संबंध को लेकर आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायमूर्ति वी. श्रीशानंद की एकल पीठ ने याचिकाकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा, आवाज के नमूनों (Voice Samples) और दुर्भावनापूर्ण लांछनों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए याचिका खारिज कर दी। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी। अदालत ने ‘प्रजाशक्ति’ न्यूज चैनल के प्रबंध निदेशक (MD) शब्बीर पाशा और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) वी. कुसुमा के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को रद्द (Quash) करने से साफ इनकार कर दिया।
उच्च न्यायालय की तल्ख व तीखी टिप्पणियां
1. अनुच्छेद 21 और महिला की गरिमा पर सवाल याचिकाकर्ताओं के आचरण पर कड़ा प्रहार करते हुए न्यायमूर्ति श्रीशानंद ने कहा: “वीडियो में बैकग्राउंड वॉइस आपकी है। आपने कहा कि उपमुख्यमंत्री को जिला कलेक्टर से प्यार हो गया है। क्या यह ठीक होगा यदि कोई आपके घर की बेटियों के बारे में इस तरह की बातें कहे? क्या संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने और गरिमा का अधिकार) का संरक्षण केवल आपको ही प्राप्त है? क्या उन महिलाओं को नहीं?”
2. परिवार और बच्चों पर पड़ने वाले मानसिक आघात की चिंता अदालत ने रेखांकित किया: “क्या आपका यही काम है कि सुबह से रात तक दूसरों के घर तोड़े जाएं? क्या आपके घर में बेटियां नहीं हैं? यदि एक महिला जिला कलेक्टर के बारे में कहा जाए कि उसका मंत्री के साथ संबंध है, तो क्या उसे ठेस नहीं पहुंचेगी? क्या उनके बच्चे नहीं हैं? यदि उस महिला कलेक्टर के बच्चे से स्कूल में पूछा जाए कि क्या उसकी मां का मंत्री के साथ संबंध था, तो उस मासूम पर क्या बीतेगी? क्या उन्हें गरिमा के साथ जीने का अधिकार नहीं है?”
3. आधिकारिक कामकाज को गलत रंग देने की निंदा न्यायाधीश ने अधिकारियों और मंत्रियों के बीच पेशेवर समन्वय पर टिप्पणी करते हुए कहा:
- यदि एक महिला आईएएस अधिकारी किसी सरकारी बैठक में शामिल होती है या मंत्री के साथ आधिकारिक कार्य करती है, तो उसे प्रेम संबंध का रूप कैसे दिया जा सकता है? क्या महिला होना कोई पाप है?
- आज उपमुख्यमंत्री के लिए ऐसा कहा जा रहा है, कल को जजों के चैंबर में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को लेकर भी ऐसी झूठी कहानियां गढ़ी जाएंगी। व्यूज और ऑनलाइन एंगेजमेंट के लिए किसी की प्रतिष्ठा को तार-तार नहीं किया जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि और दर्ज FIR
- ‘डिटेक्टिव लीजेंड्स’ वीडियो: 2 जुलाई को दर्ज शिकायत के अनुसार, ब्रह्मानंद रेड्डी नामक व्यक्ति के यूट्यूब चैनल “डिटेक्टिव लीजेंड्स” पर “DCM Parameshwar Love Story” शीर्षक से एक आपत्तिजनक और अपमानजनक वीडियो अपलोड किया गया था।
- वॉइस-ओवर का आरोप: याचिकाकर्ताओं (शब्बीर पाशा और वी. कुसुमा) पर आरोप है कि उन्होंने इस वीडियो के लिए अपनी आवाज (वॉइस-ओवर) दी थी। पुलिस ने उनके वॉइस सैंपल की जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था।
- लागू धाराएं: आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले शब्द या कृत्य), धारा 353 (सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए गए।
हाईकोर्ट का निर्देश और पुलिसिंग पर सवाल
- केस रद्द करने से इनकार: अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच जारी रहनी चाहिए और याचिकाकर्ताओं को कोई राहत देने का आधार नहीं बनता।
- एक ही घटना पर दो FIR दर्ज करने पर पुलिस को फटकार: अदालत ने एक ही घटना को लेकर दो अलग-अलग थानों में दो एफआईआर दर्ज करने पर राज्य पुलिस की खिंचाई की। पीठ ने अपर राज्य शासकीय अधिवक्ता सूर्य मुकुंदराज से पूछा—“क्या यह आपकी पुलिसिंग है? जब एक केस पहले से दर्ज था, तो दूसरी शिकायत को गवाह के रूप में शामिल किया जाना चाहिए था।”
- एक केस बंद करने का निर्देश: कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक ही केस को बरकरार रखे और दूसरे को बंद करने के लिए औपचारिक मेमो (Memo) दाखिल करे।
एक ही घटना पर दो FIR दर्ज करने पर पुलिस को फटकार
हालांकि अदालत ने मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया और जांच जारी रखने का निर्देश दिया, लेकिन एक ही घटना के सिलसिले में पुलिस द्वारा दो अलग-अलग थानों में दो FIR दर्ज करने पर राज्य सरकार के वकील को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि एक ही घटना के लिए कई शिकायतें दर्ज करना गलत पुलिसिंग प्रक्रिया है। अदालत ने राज्य सरकार को एक केस बरकरार रखने और दूसरे केस को बंद करने के संबंध में मेमो दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी।
विधिक प्रतिनिधित्व
- याचिकाकर्ताओं की ओर से: अधिवक्ता मोहम्मद ताहिर।
- राज्य सरकार की ओर से: अतिरिक्त राज्य शासकीय अधिवक्ता (Additional SPP) सूर्य मुकुंदराज।
Tumakuru-based channel:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति वी. श्रीशानंद |
| याचिकाकर्ता | शब्बीर पाशा (MD) और वी. कुसुमा (CEO), प्रजाशक्ति चैनल |
| विवादित वीडियो | “DCM Parameshwar Love Story” (यूट्यूब चैनल ‘डिटेक्टिव लीजेंड्स’) |
| कानूनी धाराएं | BNS की धारा 79 (महिला की गरिमा का अपमान) व 353 तथा IT अधिनियम |
| अगली सुनवाई | 11 सितंबर 2026 (दोहरी FIR के मुद्दे पर) |

