Tuesday, October 27, 2026
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Noida DM: नोएडा DM को फटकार…नौकरशाहों की वफादारी संविधान के प्रति है, राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति नहीं; ₹5 लाख मुआवजा ठोका, पढ़ें

आकृत चौधरी मामले में कोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • विरोध का अधिकार लोकतांत्रिक सुरक्षा वाल्व है: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और सभा की स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है। आंदोलनों को दबाना प्रेशर कुकर के सेफ्टी वाल्व को बंद करने जैसा है, जिससे जब असंतोष सड़क पर फूटता है तो हिंसा अपरिहार्य हो जाती है।
  • डीएम मेधा रूपम की लापरवाही पर जुर्माना: हाईकोर्ट ने माना कि गौतम बुद्ध नगर की तत्कालीन जिलाधिकारी मेधा रूपम (DM Medha Roopam) ने पुलिस रिपोर्ट की गहन जांच किए बिना गैर-जिम्मेदाराना तरीके से रासुका (NSA) जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल किया।
  • ₹5 लाख का मुआवजा व सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज की जाएगी प्रतिकूल टिप्पणी: अदालत ने आकृत चौधरी को ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि सीधे डीएम और डोजियर तैयार करने में शामिल पुलिस अधिकारियों के वेतन से काटी जाएगी। साथ ही उनके सर्विस रिकॉर्ड (Service Records) में कोर्ट की नाराजगी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी और नागरिक स्वतंत्रताओं के हनन पर ऐतिहासिक और बेहद सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों की निष्ठा देश के संविधान के प्रति होनी चाहिए, न कि राजनीतिक कार्यपालिका (Political Executive) के प्रति।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास स्नातक छात्रा आकृति चौधरी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत निवारक हिरासत (Preventive Detention) आदेश को पूरी तरह अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया, जिसकी वसूली तत्कालीन जिलाधिकारी और संबंधित पुलिस अधिकारियों के वेतन से की जाएगी।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक व ऐतिहासिक टिप्पणियां

1. ब्रिटिश राज का अवशेष और ‘ऑरवेलियन डिस्टोपिया’ की चेतावनी नौकरशाही के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए खंडपीठ ने कहा: “हर बार जब नौकरशाह और पुलिसकर्मी अपनी शपथ और भारत के संविधान के प्रति निष्ठा को नजरअंदाज कर इसके विपरीत कार्य करते हैं, तो उत्तर प्रदेश की जनता उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य के एक दमनकारी अवशेष (Oppressive Vestige of the British Empire) के रूप में देखेगी, जिससे उनके प्रति गुस्सा और नफरत पैदा होगी और राज्य में नागरिक अशांति का माहौल बनेगा। यदि अदालतें इन अवैधताओं और नागरिक स्वतंत्रताओं के हनन पर रोक नहीं लगाएंगी, तो वह दिन दूर नहीं जब नौकरशाही की गलतियां उत्तर प्रदेश को एक ‘ऑरवेलियन डिस्टोपिया’ (Orwellian Dystopia – दमनकारी निरंकुश राज्य) में बदल देंगी।”

2. बिना जिम्मेदारी के सत्ता का दुरुपयोग रुडयार्ड किपलिंग के प्रसिद्ध कथन का हवाला देते हुए पीठ ने रेखांकित किया:

  • कानून द्वारा अधिकारियों को व्यापक शक्तियां दी गई हैं ताकि वे नागरिकों के अधिकारों, गरिमा और कल्याण की रक्षा कर सकें।
  • जब नौकरशाही मानवीय संवेदनशीलता से परे होकर लापरवाही से सत्ता का प्रयोग करती है, तो यह ‘बिना जिम्मेदारी के अधिकार’ (Power without responsibility) जैसा निरंकुश आचरण बन जाता है।

3. शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र में ‘प्रेशर कुकर का सेफ्टी वाल्व’ विरोध-प्रदर्शन के मौलिक अधिकार का समर्थन करते हुए अदालत ने कहा:

  • संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में सड़कों पर उतरना, किसी मुद्दे पर शांतिपूर्वक बिना हथियारों के एकत्र होना शामिल है।
  • शांतिपूर्ण आंदोलनों की अनुमति देना प्रेशर कुकर के ‘सेफ्टी वाल्व’ की तरह है, जो बढ़ते जन-असंतोष के दबाव को सुरक्षित रूप से बाहर निकालता है। यदि सरकार सार्वजनिक भावनाओं को दबाएगी, तो लोगों के सड़कों पर आने पर हिंसा अपरिहार्य हो जाएगी।

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मामले की पृष्ठभूमि और मनमानी NSA हिरासत

  • औद्योगिक मजदूरों का प्रदर्शन (अप्रैल 2026): नोएडा में औद्योगिक श्रमिकों के आंदोलन के दौरान डीयू की छात्रा आकृति चौधरी ने मजदूरों के समर्थन में आवाज उठाई थी।
  • NSA की दमनकारी कार्रवाई: गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) प्रशासन ने छात्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाकर उसे जेल में निरुद्ध कर दिया था।
  • अदालत का निष्कर्ष: हाईकोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर छात्रा द्वारा हिंसा भड़काने का कोई सबूत नहीं था; उसने केवल नागरिकों से मजदूरों का समर्थन करने का आह्वान किया था।

जिलाधिकारी के आचरण की निंदा और व्यक्तिगत जवाबदेही

  • डीएम के आचरण पर टिप्पणी: पीठ ने कहा कि गौतम बुद्ध नगर की तत्कालीन जिलाधिकारी मेधा रूपम का आचरण निंदनीय था। पुलिस रिपोर्ट में किसी भी पुख्ता सामग्री के अभाव के बावजूद, बिना सोचे-समझे NSA जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल किया गया।
  • शपथ का उल्लंघन: अदालत ने माना कि जिलाधिकारी अपनी पद की शपथ का उल्लंघन करने की दोषी हैं।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

  1. NSA आदेश रद्द: अदालत ने आकृति चौधरी की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।
  2. ₹5 लाख का हर्जाना (वेतन से वसूली): पीड़ित छात्रा को ₹5 लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया। यह पूरी राशि संबंधित जिलाधिकारी और डोजियर तैयार करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूल की जाएगी।
  3. सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज होगी प्रतिकूल टिप्पणी: हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि डीएम और संबंधित पुलिस अधिकारियों के इस निरंकुश आचरण और अदालत की नाराजगी को उनके सेवा अभिलेख (Service Records) में दर्ज किया जाए।

विधिक प्रतिनिधित्व

  • याचिकाकर्ता (आकृति चौधरी) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस, अधिवक्ता चार्ली प्रकाश, माणिक गुप्ता और राजवेंद्र सिंह।
  • भारत संघ की ओर से: अधिवक्ता बलराम गोविंद त्रिपाठी और कुलदीप कुमार।
  • उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से: अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता (AGA) नितेश कुमार श्रीवास्तव।

Noida DM: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)
पीठन्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति अचल सचदेव
याचिकाकर्ताआकृत चौधरी (दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा / एक्टिविस्ट)
मुहावरा/मुआवजा₹5 लाख का मुआवजा (DM व दोषी अधिकारियों के वेतन से वसूला जाएगा)
आदेश की मुख्य बातNSA हिरासत रद्द; DM गौतम बुद्ध नगर की भूमिका पर गंभीर सवाल व सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टि
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