Saturday, September 12, 2026
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Kerala Jail Menu: जेल के मेन्यू से मटन और मछली हटाने की तैयारी; चिकन, सोयाबीन और अंडे से बदलेगा कैदियों का आहार, देखिए डिनर टेबल

वर्तमान डाइट बनाम इतिहास (Historical Context)

  • मौजूदा डाइट: वर्तमान में कैदियों को शनिवार को दोपहर के भोजन में 100 ग्राम बोनलेस मटन और सोमवार व बुधवार को 140 ग्राम मछली करी दी जाती है।
  • ऐतिहासिक बदलाव:
    • मटन को 1967 में सूखी मछली (Dried Fish) की जगह मेन्यू में शामिल किया गया था।
    • 2012-2014 के बीच सख्त गेहूं की गोलियों (Gothambunda) को हटाकर डोसा, इडली, चपाती और मछली करी को भोजन में शामिल किया गया था।
  • शाकाहारी कैदी: शाकाहारी कैदियों को नॉन-वेज वाले दिनों में सब्जियों का अतिरिक्त पोर्शन दिया जाता रहेगा।

तिरुवनंतपुरम: केरल के जेल विभाग ने राज्य की जेलों में कैदियों को परोसे जाने वाले भोजन के मेन्यू में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव राज्य के गृह विभाग को भेजा है। जेलों के महानिदेशक (DG Prisons) एस. श्रीजीत द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव में कैदियों के साप्ताहिक आहार से मटन (बकरे का मांस) और मछली (Fish Curry) को हटाकर उनके स्थान पर चिकन, सोया चंक्स और अंडे शामिल करने की सिफारिश की गई है। विभाग ने इस कदम के पीछे बजट में भारी बचत, कैदियों के हृदय स्वास्थ्य (Cardiovascular Health) और खरीद प्रक्रिया से जुड़ी जटिलताओं को मुख्य कारण बताया है।

प्रस्तावित आहार बदलाव और वित्तीय विश्लेषण

जेल विभाग द्वारा तैयार किए गए वित्तीय आकलन के अनुसार, मेन्यू में इस संशोधन से राज्य के खजाने को सालाना लगभग ₹5.7 करोड़ की सीधी बचत होगी:

वर्तमान आहार मदवर्तमान वार्षिक व्ययप्रस्तावित विकल्पअनुमानित नया व्ययवार्षिक बचत
मटन (Mutton)₹5.72 करोड़चिकन (Chicken)₹1.26 करोड़₹4.46 करोड़
मछली (Fish)₹4.80 करोड़सोयाबीन व अंडा (Soya Chunks & Egg)₹3.40 करोड़₹1.40 करोड़
कुल योग₹10.52 करोड़₹4.66 करोड़₹5.86 करोड़ (लगभग ₹5.7 करोड़ नेट)

मेन्यू बदलाव के मुख्य कारण

  • 1. बजट व वित्तीय बोझ में कटौती: मटन और मछली की बढ़ती बाजार कीमतों के कारण जेल विभाग पर अत्यधिक वित्तीय दबाव पड़ रहा था। सस्ते और समान प्रोटीन युक्त विकल्पों से लागत आधी से भी कम हो जाएगी।
  • 2. हृदय स्वास्थ्य (Cardiovascular Risk) में सुधार: जेल अधिकारियों के अनुसार, नियमित रूप से रेड मीट (मटन) का सेवन करने से कैदियों में हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप की समस्याएं बढ़ रही थीं। चिकन और सोयाबीन को स्वास्थ्य की दृष्टि से अधिक सुरक्षित माना गया है।
  • 3. खरीद व गुणवत्ता प्रबंधन: ताजी मछली और गुणवत्तापूर्ण मटन की नियमित खरीद और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बनाए रखना प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था।

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वर्तमान व्यवस्था बनाम केरल जेलों का आहार इतिहास

  • वर्तमान रोस्टर: कैदियों को वर्तमान में सप्ताह में एक बार (शनिवार को दोपहर में 100 ग्राम बोनलेस मटन) और सप्ताह में दो बार (सोमवार और बुधवार को 140 ग्राम फिश करी) परोसी जाती है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
    • वर्ष 1967 में सूखी मछली (Dried Fish) को हटाकर जेल मेन्यू में पहली बार मटन शामिल किया गया था।
    • वर्ष 2012 में सख्त गेहूं के गोलों (Gothambunda) और सूखी मछली को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया गया।
    • वर्ष 2014 में व्यापक खाद्य सुधारों के तहत ताजी मछली करी को नियमित आहार का हिस्सा बनाया गया था।

दैनिक मेन्यू की अन्य प्रमुख विशेषताएं

  • शाकाहारी कैदियों के लिए: मांसाहारी दिनों में शाकाहारी बंदियों को सब्जियों और दाल की अतिरिक्त मात्रा परोसी जाती है।
  • नाश्ता: इडली, डोसा, चपाती और उपमा वैकल्पिक दिनों में, साथ में हरी मटर करी/चना करी/सांभर और चाय।
  • दोपहर और रात का भोजन: मुख्य अनाज चावल है। दोपहर में अवियल, थियाल, फ्राइड सब्जियां, पुलिसेरी, थोरन और दही रोटेशन पर दिए जाते हैं। रात में टैपिओका (कप्पा) मसाला, रसम और अचार परोसा जाता है।
  • विशेष डाइट व त्योहार: बीमार और शारीरिक रूप से कमजोर कैदियों को मेडिकल ऑफिसर की सलाह पर विशेष डाइट दी जाती है। इसके अलावा साल में 10 प्रमुख त्योहारों पर विशेष दावत और ओपन जेल के कैदियों को फसल कटाई के अंत में हार्वेस्ट दावत दी जाती है।

Kerala Jail Menu:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित राज्य/विभागकेरल जेल एवं सुधार सेवाएं विभाग (Kerala Prisons Department)
प्रस्तावित बदलावमटन और मछली हटाकर चिकन, अंडा और सोया चंक्स शामिल करना
वार्षिक अनुमानित बचतलगभग ₹5.7 करोड़
स्वास्थ्य कारणरेड मीट (मटन) के नियमित सेवन से हृदय रोगों (Cardiovascular Risk) का खतरा
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