Thursday, September 17, 2026
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YouTuber Ajeet Case: दिल्ली हाईकोर्ट के जज और वकील जय देहाद्राई के बीच तीखी बहस; ‘अदालत में आपत्तिजनक शब्दों का ट्रांसक्रिप्ट इस तरह सीधे नहीं सौंपा जा सकता…

अदालत में हुई तीखी बहस के मुख्य अंश

  1. ट्रांसक्रिप्ट सौंपने पर जज की आपत्ति:जब एडवोकेट देहाद्रई ने अजीत भारती के वीडियो में बोले गए आपत्तिजनक शब्दों की ट्रांसक्रिप्ट कोर्ट को सौंपने की कोशिश की, तो न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कड़ी आपत्ति जताई:“आप कोर्ट को इस तरह की शब्दावली नहीं सौंप सकते। मैं आपको अवमानना का नोटिस जारी करूंगा। क्या आपके अनुसार इस्तेमाल की गई भाषा आपत्तिजनक नहीं है? एक वकील के रूप में आपको यह कोर्ट को नहीं सौंपना चाहिए।”न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी
  2. वकील का पक्ष और अवमानना पर तर्क:एडवोकेट देहाद्रई ने स्पष्ट किया कि यह केवल FIR में दर्ज आरोपों का अंश था और कोर्ट की सहायता के लिए दिया जा रहा था। उन्होंने कहा कि यह सामान्य अदालती प्रक्रिया है और उन्होंने कोई अवमानना नहीं की है।
  3. केस से हटने की पेशकश:अवमानना की चेतावनी से क्षुब्ध होकर देहाद्रई ने कहा कि वह मामले से हट रहे हैं और अब इस कोर्ट में पेश नहीं होंगे:“अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो मैं माफी चाहता हूं। मैं अभी इस केस से हटता हूं। मैं इस कोर्ट की सहायता करने के काबिल नहीं हूं, मैं किसी सीनियर वकील को नियुक्त करूंगा।”जय देहाद्रई (वकील)
  4. जज का स्पष्टीकरण और माहौल का शांत होना:न्यायमूर्ति बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उन्हें गलत समझा गया है और कोर्ट उन्हें केस से हटने के लिए नहीं कह रहा है:“मेरे मन में आपके खिलाफ कुछ नहीं है। एक वकील के रूप में आपके पास मेरे समक्ष पेश होने के सभी अधिकार और विशेषाधिकार हैं। मैं केवल यह कह रहा था कि आप फाइल में दर्ज आदेशों से इसका संदर्भ दें।”न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट में यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Plea) पर सुनवाई के दौरान उस समय अप्रत्याशित तनाव और तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब याचिकाकर्ता के वकील जय अनंत देहाद्राई और एकल पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी के बीच अदालती मर्यादा, रिकॉर्ड पर दस्तावेज सौंपने की प्रक्रिया और न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की चेतावनी को लेकर सीधा टकराव हो गया।

अदालत कक्ष में चली लंबी बहस और नोकझोंक के बाद, न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने पर अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित (Verdict Reserved) रख लिया।

अदालत कक्ष में तीखी बहस और मुख्य संवाद

1. आपत्तिजनक ट्रांसक्रिप्ट सीधे सौंपने पर पीठ की आपत्ति और अवमानना की चेतावनी विवाद तब शुरू हुआ जब अधिवक्ता जय देहाद्राई ने कथित आपत्तिजनक यूट्यूब वीडियो के कुछ विवादित अंशों (Offending remarks) का अलग से तैयार ट्रांसक्रिप्ट सीधे जज की डायस पर सौंपने का प्रयास किया। इस पर न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा: “आप उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए इन शब्दों को सीधे अदालत को नहीं सौंप सकते। मैं आपके खिलाफ अवमानना (Contempt) का नोटिस जारी करूंगा। क्या आपके अनुसार प्रयुक्त शब्दावली आपत्तिजनक नहीं है? कृपया ध्यान रखें कि आप क्या कर रहे हैं। इसमें ऐसे शब्द हैं जो… आप उन चीजों को कानून की अदालत में इस तरह नहीं सौंप सकते। एक वकील के रूप में आपको यह सीधे नहीं सौंपना चाहिए।”

  • जब देहाद्राई ने कहा कि वह केवल अदालत की सहायता के लिए एफआईआर में दर्ज आरोपों का अंश प्रस्तुत कर रहे हैं और यह सामान्य अदालती प्रक्रिया है, तो न्यायमूर्ति बनर्जी ने जवाब दिया कि ऐसे शब्दों का दस्तावेज इस तरह सौंपना ही अवमानना की श्रेणी में आता है और वे केवल कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कह रहे हैं।

2. वकील की केस से हटने (Recusal/Withdrawal) की पेशकश अवमानना की चेतावनी के बाद अधिवक्ता जय देहाद्राई ने नाराजगी व्यक्त करते हुए अदालत से स्वयं को अलग करने की बात कही: “यदि मैंने अदालत को नाराज करने के लिए कुछ किया है तो मैं क्षमा चाहता हूं। मैं अभी इस मामले से हट जाता हूं (Withdraw)। किसी न किसी तरह जब भी मैं अदालत की सहायता करने का प्रयास करता हूं, तो ऐसा मोड़ आ जाता है कि अदालत नाराज हो जाती है। मैं इस अदालत में उपस्थित होना बंद कर दूंगा… एक वकील से कहा जा रहा है कि उसके खिलाफ अवमानना जारी की जाएगी, सिर्फ इसलिए कि वह रिकॉर्ड से कुछ दिखाकर अदालत की मदद करने की कोशिश कर रहा है? मैं अदालत की सहायता के लिए एक वरिष्ठ वकील नियुक्त करूंगा। मुझे नहीं लगता कि मैं अदालत की सहायता करने में सक्षम हूं।”

3. पीठ का स्पष्टीकरण और बर्फ पिघलने का दौर न्यायमूर्ति बनर्जी ने स्थिति को संभालते हुए स्पष्ट किया कि वकील उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाल रहे हैं और अदालत उन्हें केस छोड़ने के लिए नहीं कह रही है:

  • दस्तावेज के संदर्भ पर निर्देश: पीठ ने कहा कि वह दस्तावेजों का हवाला देने से नहीं रोक रहे हैं, बल्कि उनका निर्देश यह था कि विवादित शब्दों को अलग से पर्चा सौंपने के बजाय केस फाइल में पहले से मौजूद आदेश या रिकॉर्ड से संदर्भित किया जाए।
  • व्यक्तिगत पूर्वाग्रह से इनकार: न्यायमूर्ति बनर्जी ने कहा:“मेरे मन में आपके खिलाफ या आपके पक्ष में कुछ भी नहीं है। एक वकील के रूप में आपके पास मेरे समक्ष पेश होने की पूरी स्वतंत्रता और विशेषाधिकार हैं। यदि आपको कुछ असहज लगता है, तो सामान्य बात यह है कि मेरा स्वभाव ऐसा ही है। किताब को उसके कवर से मत आंकिए (Don’t judge the book by the cover)।”

मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (यूट्यूबर अजीत भारती का मामला)

  • विवाद की उत्पत्ति: यूट्यूबर अजीत भारती के खिलाफ एक वीडियो में कथित तौर पर आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी लगाई थी।
  • बहस का मुख्य बिंदु: बचाव पक्ष यह साबित करने का प्रयास कर रहा था कि वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्द किसी भी गैर-जमानती अपराध को आकर्षित नहीं करते और याचिकाकर्ता की हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • बहस की समाप्ति: न्यायाधीश के आग्रह और आश्वासन के बाद अधिवक्ता देहाद्राई ने मामले में आगे जिरह जारी रखी और राज्य तथा शिकायतकर्ता के वकीलों ने भी अपनी दलीलें रखीं।

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अंतिम स्थिति

  1. बहस पूरी: उच्च न्यायालय ने यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की विस्तृत विधिक दलीलें पूरी होने के बाद सुनवाई समाप्त की।
  2. फैसला सुरक्षित: न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है, जो आगामी दिनों में सुनाया जाएगा।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: अजीत भारती बनाम राज्य (एनसीटी दिल्ली) [अग्रिम जमानत आवेदन – आपराधिक न्यायशास्त्र]
  • प्रासंगिक कानून: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 482 / दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 438 (अग्रिम जमानत); भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) / आईपीसी की संबंधित धाराएं; न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ता (अजीत भारती) की ओर से: अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई
  • पीठ: न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी (दिल्ली उच्च न्यायालय)

YouTuber Ajeet Case: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी (Justice Saurabh Banerjee)
याचिकाकर्ताअजीत भारती (Ajeet Bharti – यूट्यूबर)
याचिकाकर्ता के वकीलएडवोकेट जय अनंत देहाद्रई (Jai Anant Dehadrai)
मामले की प्रकृतिअग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Application)
विवाद का कारणयूट्यूब वीडियो के कथित आपत्तिजनक अंशों/शब्दों की ट्रांसक्रिप्ट कोर्ट को सौंपना
वर्तमान स्थितिपीठ ने दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित (Reserved Verdict) रख लिया है।
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