अदालत में क्या हुआ और क्या गड़बड़ियां पाई गईं?
- अस्तित्वहीन स्टे ऑर्डर का हवाला:
- पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा एक औद्योगिक इकाई के खिलाफ जीते गए मध्यस्थता पुरस्कार के निष्पादन (Execution) के लिए श्री मुक्तसर साहिब की अदालत में अर्जी दी गई थी।
- निगम के स्टैंडिंग काउंसिल अभिलक्ष गैंद ने हाईकोर्ट को बताया कि 19 अगस्त 2026 को ADJ ने यह कहकर निष्पादन कार्यवाही रोक दी कि हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर है, जबकि हाईकोर्ट का ऐसा कोई स्टे आदेश था ही नहीं।
- देनदारों (Judgment Debtors) के वकील ने स्वीकार किया कि आदेश में यह केवल लिपिकीय/प्रक्रियात्मक गलती से लिखा गया, वास्तव में स्टे आदेश चंडीगढ़ जिला अदालत के जज ने दिया था जो मध्यस्थता पुरस्कार के खिलाफ आपत्ति याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।
- आदेश में अन्य विरोधाभास (Discrepancies): हाईकोर्ट ने 19 अगस्त 2026 के आदेश की अन्य गंभीर लिपिकीय गलतियों पर भी आपत्ति जताई:
- आदेश में एक तरफ दर्ज किया गया कि डिक्री धारक (Decree Holder) की उपस्थिति का इंतजार है, लेकिन साथ ही उसके वकील की उपस्थिति दर्ज कर ली गई।
- देनदारों (1 से 7) के खिलाफ एकतरफा (Ex-parte) कार्यवाही दर्ज करने के बावजूद, देनदार संख्या 3 से 6 के वकीलों की मौजूदगी दिखाई गई।
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने मध्यस्थता पंचाट (Arbitration Award) के निष्पादन (Execution) से जुड़े एक मामले में न्यायिक आदेश दर्ज करने में बरती गई घोर लापरवाही और तथ्यात्मक विसंगति पर सख्त रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने श्री मुक्तसर साहिब के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) द्वारा चंडीगढ़ की एक निचली अदालत के स्थगन आदेश को गलती से ‘पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर’ दर्ज कर देने और आदेश पत्र में परस्पर विरोधी हाजिरी दर्ज करने पर स्पष्टीकरण तलब किया है।
न्यायमूर्ति लपिता बनर्जी की एकल पीठ ने पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन (PSWC) द्वारा दायर निष्पादन याचिका में पारित आदेश में आई गंभीर विसंगतियों का संज्ञान लेते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश, श्री मुक्तसर साहिब से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
उच्च न्यायालय के प्रमुख अवलोकन एवं आदेश
न्यायमूर्ति लपिता बनर्जी ने 19 अगस्त 2026 के आदेश की विसंगतियों को रेखांकित करते हुए निर्देश दिया: “एग्जीक्यूशन याचिका (EXE-86-2024) में पारित 19 अगस्त 2026 के आदेश में आई विसंगतियों को स्पष्ट करते हुए विद्वान जिला न्यायाधीश, श्री मुक्तसर साहिब से एक स्टेटस रिपोर्ट तलब की जाए। इसमें यह भी स्पष्ट किया जाए कि डिक्री होल्डर (DH) की उपस्थिति की प्रतीक्षा दर्ज करने के बावजूद उनके वकील की उपस्थिति कैसे दर्ज की गई, और निर्णय देनदारों (JDs No. 1 to 7) के खिलाफ एकतरफा (Ex-parte) कार्यवाही करने का आदेश देने के बाद भी जेडी संख्या 3 से 6 के वकील की उपस्थिति कैसे दर्ज की गई।”
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं विधिक विवाद
- घरेलू मध्यस्थता पंचाट: पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन (PSWC) ने धान सौंपे जाने के बदले चावल की कम आपूर्ति (Short Supply of Rice) को लेकर एक औद्योगिक इकाई के खिलाफ घरेलू मध्यस्थता में पंचाट हासिल किया था।
- कुर्की वारंट का आदेश: पंचाट के निष्पादन के लिए कॉर्पोरेशन द्वारा श्री मुक्तसर साहिब की अदालत में निष्पादन याचिका (EXE-86-2024) दायर की गई थी। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने 27 मार्च को निर्णय देनदारों (Judgment Debtors) की संपत्ति कुर्क करने का वारंट जारी किया।
- हाईकोर्ट में चुनौती: निर्णय देनदारों ने कुर्की वारंट के आदेश को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) दायर की।
- गलत स्टे ऑर्डर का हवाला: 16 सितंबर को पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई के दौरान कॉर्पोरेशन के स्थायी वकील अभिलक्ष गैंद ने पीठ को अवगत कराया कि एडीजे मुक्तसर साहिब ने 19 अगस्त को निष्पादन कार्यवाही पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि हाईकोर्ट ने रोक लगाई है, जबकि वास्तव में हाईकोर्ट ने ऐसा कोई स्थगन आदेश दिया ही नहीं था।
- गलती का बचाव: निर्णय देनदारों के वरिष्ठ वकील ने स्पष्ट किया कि वास्तव में पंचाट के खिलाफ दायर आपत्ति याचिका पर चंडीगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने रोक लगाई थी। मुक्तसर साहिब के एडीजे ने अनजाने में चंडीगढ़ की अदालत के स्थगन आदेश को हाईकोर्ट का आदेश दर्ज कर दिया।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: हरदेव सिंह व अन्य बनाम पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन व अन्य [CR – पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय]
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ताओं (निर्णय देनदार) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार जिंदल (सहयोगी: अधिवक्ता अजय पाल सिंह, अभिषेक शुक्ला एवं विजयवीर)
- प्रतिवादियों (PSWC) की ओर से: स्थायी वकील अभिलक्ष गैंद (सहयोगी: अधिवक्ता राकेश रॉय एवं प्रिया जरियाल)
- प्रासंगिक कानून एवं प्रावधान:
- मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (Arbitration and Conciliation Act, 1996) की धारा 34 (पंचाट को चुनौती) एवं धारा 36 (पंचाट का प्रवर्तन/निष्पादन)
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) का आदेश XXI (डिक्री का निष्पादन) एवं धारा 115 (पुनरीक्षण क्षेत्राधिकार)
- पीठ: न्यायमूर्ति लपिता बनर्जी (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय)
- निर्देश: जिला एवं सत्र न्यायाधीश, श्री मुक्तसर साहिब को एडीजे के आदेश में आई तथ्यात्मक विसंगतियों और परस्पर विरोधी उपस्थिति दर्ज करने पर जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।
Explanation From Judge:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab & Haryana High Court) |
| एकल पीठ न्यायाधीश | न्यायमूर्ति लपिता बनर्जी (Justice Lapita Banerji) |
| मामला | हरदेव सिंह व अन्य बनाम पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन व अन्य |
| मूल विवाद | धान (Paddy) के बदले चावल की कम आपूर्ति से जुड़ा घरेलू मध्यस्थता पुरस्कार (Domestic Arbitration Award) |
| गड़बड़ी का केंद्र | श्री मुक्तसर साहिब कोर्ट द्वारा अस्तित्वहीन हाईकोर्ट स्टे का उल्लेख करना और आदेश में विरोधाभासी उपस्थिति दर्ज करना |

