जनहित याचिका (PIL) में क्या चिंताएं उठाई गई थीं?
- हड़ताल का कारण: दैनिक वेतन वृद्धि, ओवरटाइम भुगतान और चिकित्सा सुविधाओं की मांग को लेकर DTC चालक और संवाहक (Conductors) 15 सितंबर से हड़ताल पर थे।
- आम जनता और महिलाओं पर असर: याचिकाकर्ता अमी सिसौदिया ने बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा महिलाओं को दी जाने वाली मुफ्त बस यात्रा सुविधा ठप होने के कारण महिलाओं को महंगे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
- मेट्रो पर बढ़ा दबाव: बसों के बंद होने से लाखों छात्रों, दैनिक वेतनभोगियों, वरिष्ठ नागरिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को परेशानी हुई, जिससे दिल्ली मेट्रो सेवाओं पर अतिरिक्त यात्री दबाव बढ़ गया।
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली परिवहन निगम (Delhi Transport Corporation – DTC) के संविदा व नियमित ड्राइवरों, कंडक्टरों और अन्य कर्मचारियों की हड़ताल से राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के चरमराने, लाखों दैनिक यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होने और आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (Essential Services Maintenance Act – ESMA) को लागू करने में सरकार की हिचकिचाहट पर बुधवार (23 सितंबर 2026) को सख्त संज्ञान लिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने अधिवक्ता अमी सिसोदिया द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। हालांकि, डीटीसी द्वारा यह बताए जाने पर कि स्थिति को संभाल लिया गया है और 96% बसें सड़कों पर वापस लौट चुकी हैं, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को एस्मा लगाने पर कानून के अनुसार विचार करने का निर्देश देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि जमीनी स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो वह पुनः उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती हैं। अदालत ने दिल्ली सरकार और डीटीसी से सीधा सवाल किया कि जब बस सेवाएं एक अत्यावश्यक जनसुविधा हैं, तो ऐसी हड़तालों पर अंकुश लगाने के लिए एस्मा (ESMA) के कड़े कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल अब तक क्यों नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत के अवलोकन एवं डीटीसी का विधिक पक्ष
1. ‘सड़कों पर डीटीसी बसों का संचालन बनाए रखने के लिए सरकार निर्णय ले’: खंडपीठ
सार्वजनिक परिवहन की निरंतरता को सर्वोपरि मानते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने निर्देश दिया: “हम अपेक्षा करते हैं कि राज्य सरकार समग्र स्थिति की समीक्षा करेगी और कानून के अनुसार उचित निर्णय (एस्मा लागू करने सहित) लेगी ताकि सड़कों पर डीटीसी बसों का निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जा सके।”
2. डीटीसी का विधिक बचाव: ‘व्हाट्सएप संदेशों से भड़काया गया, 96% बसें बहाल’
- डीटीसी की ओर से अधिवक्ता अवनीश अहलावत ने पक्ष रखते हुए कहा:
- हड़ताल कर रहे ड्राइवरों का कोई आधिकारिक या मान्यता प्राप्त पंजीकृत यूनियन (Recognized Union) नहीं है।
- कुछ असामाजिक व असंतुष्ट तत्व व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से संदेश भेजकर कर्मचारियों को हड़ताल के लिए भड़का रहे हैं और सरकारी बसों में तोड़फोड़ (Vandalism) कर रहे हैं।
- प्रशासन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई के चलते लगभग 96% बसें वापस सड़कों पर सेवा में लौट चुकी हैं।
- एस्मा की फाइल सरकार को प्रेषित: डीटीसी की वकील ने खंडपीठ को स्पष्ट किया कि निगम ने हड़तालियों पर सख्त कार्रवाई करने और सार्वजनिक हित में एस्मा (ESMA) लागू करने की संस्तुति वाली आधिकारिक फाइल दिल्ली सरकार को पहले ही भेज दी है, जिस पर सक्षम स्तर पर निर्णय लंबित है।
जनहित याचिका (PIL) में उठाए गए प्रमुख मुद्दे एवं जन-कठिनाई
- 15 सितंबर से जारी हड़ताल: वेतन वृद्धि, समान काम के लिए समान वेतन, स्थायीकरण और अन्य सेवा लाभों की मांग को लेकर डीटीसी और क्लस्टर बसों के चालक, परिचालक और अन्य सहयोगी कर्मचारी 15 सितंबर 2026 से हड़ताल पर चले गए थे।
- महिला सुरक्षा और ‘पिंक टिकट’ योजना की विफलता: याचिकाकर्ता अधिवक्ता अमी सिसोदिया ने अदालत को बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा महिलाओं को दी जाने वाली मुफ्त बस यात्रा की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण उन्हें और हजारों कामकाजी महिलाओं को मजबूरन अत्यधिक महंगे निजी कैब और ऑटोरिक्शा जैसे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
- कमजोर तबकों पर मार और मेट्रो पर अतिरिक्त दबाव:
- याचिका में रेखांकित किया गया कि डीटीसी का ठप होना राजधानी के लाखों स्कूली छात्रों, दिहाड़ी मजदूरों, निम्न-आय वर्ग के कर्मचारियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और ओपीडी मरीजों की दैनिक आजीविका व गतिशीलता पर सीधा प्रहार है।
- बसों की अनुपलब्धता के कारण सारा यात्री दबाव अचानक दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) प्रणाली पर स्थानांतरित हो गया, जिससे मेट्रो स्टेशनों पर भारी भीड़ और अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हुई।
- सांविधिक दर्जा: याचिका में इस बात पर बल दिया गया कि दिल्ली सरकार ने स्वयं डीटीसी और क्लस्टर बस सेवाओं को आवश्यक सेवा अनुरक्षण ढांचे के तहत ‘अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यक परिवहन सेवा’ (Essential Transport Service) के रूप में वर्गीकृत कर रखा है।
उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश
- सरकार को निर्णय लेने का निर्देश: खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के गृह और परिवहन विभाग को निर्देश दिया कि वे डीटीसी द्वारा भेजी गई फाइल की तत्काल समीक्षा करें और कानून के अनुसार एस्मा लागू करने या अन्य वैधानिक उपाय करने पर अंतिम निर्णय लें।
- याचिका का निस्तारण (Disposed Of): 96% बसों के परिचालन में लौटने के आधिकारिक बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने याचिका बंद कर दी, परंतु यह स्पष्ट किया कि यदि बस सेवाएं फिर से बाधित होती हैं या स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होता है, तो याचिकाकर्ता नए सिरे से अदालत का रुख करने के लिए स्वतंत्र होंगी।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: अमी सिसोदिया बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD), परिवहन विभाग, DTC एवं अन्य [W.P.(C) – दिल्ली उच्च न्यायालय]
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता की ओर से: अधिवक्ता विक्रांत डबास
- दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की ओर से: अधिवक्ता अवनीश अहलावत
- प्रासंगिक कानून एवं सांविधिक प्रावधान:
- दिल्ली आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 2000 (Delhi Essential Services Maintenance Act, 2000 – ESMA) की धारा 3, 4 एवं 5 (सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में हड़ताल पर प्रतिबंध लगाने और उल्लंघन पर गिरफ्तारी/दंड की शक्ति)
- औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (Industrial Disputes Act, 1947) की धारा 22 (जनोपयोगी सेवाओं में हड़ताल से पूर्व अनिवार्य नोटिस)
- सड़क परिवहन निगम अधिनियम, 1950 (Road Transport Corporations Act, 1950)
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 21 (आजीविका एवं गरिमापूर्ण जीवन की सुरक्षा) एवं अनुच्छेद 226
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- टी.के. रंगराजन बनाम तमिलनाडु राज्य (2003, सुप्रीम कोर्ट) — ‘सरकारी कर्मचारियों या आवश्यक सेवाओं में कार्यरत कर्मियों को हड़ताल पर जाने का कोई मौलिक या पूर्ण अधिकार नहीं है; जनजीवन को बंधक नहीं बनाया जा सकता।’
- बी.आर. सिंह बनाम भारत संघ (1989, सुप्रीम कोर्ट) — ‘ट्रेड यूनियन अधिकारों को आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के निर्बाध संचालन के वैधानिक दायित्व के अधीन संतुलित किया जाना चाहिए।’
- पीठ: मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया (दिल्ली उच्च न्यायालय)
- आदेश तिथि: 23 सितंबर 2026
DTC Driver Strike: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| पीठ के न्यायाधीश | मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया |
| याचिकाकर्ता | अमी सिसौदिया (Ami Sisodia – अधिवक्ता एवं नियमित यात्री) |
| मुख्य मुद्दा | 15 सितंबर से जारी DTC चालकों/संवाहकों की हड़ताल से प्रभावित सार्वजनिक बस परिवहन |
| कोर्ट का निर्देश | दिल्ली सरकार कानून के तहत ESMA लागू करने पर समीक्षा कर जल्द निर्णय ले |

